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वॉटर प्यूरीफायर का फिल्टर कब बदलना चाहिए? ये 5 संकेत दिखें तो हो जाएं सावधान

घर में रोजाना वॉटर प्यूरीफायर का पानी पीते हैं, तो उसकी सफाई के साथ फिल्टर की हालत पर भी ध्यान देना जरूरी है. जानिए वॉटर प्यूरीफायर का फिल्टर कब बदलना चाहिए और किन 5 संकेतों से इसकी पहचान कर सकते हैं.

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वॉटर प्यूरीफायर के फिल्टर को कब बदलना है इस पर ध्यान देना भी जरूरी है. (Image credit-AI)

सुबह उठकर पानी पीने से लेकर चाय और खाना बनाने तक, घर में रोजना प्यूरीफायर के पानी का इस्तेमाल होता है. लेकिन ज्यादातर लोग सिर्फ इस बात पर ध्यान देते हैं कि मशीन चल रही है या नहीं. उसके अंदर लगे फिल्टर की हालत पर अक्सर ध्यान नहीं जाता. लंबे समय तक इस्तेमाल होने पर फिल्टरमें मिट्टी, जंग और दूसरी गंदगी जमा होने लगती है, जिससे उसकी क्षमता कम हो सकती है.  इसका असर पानी के टेस्ट से लेकर उसकी सप्लाई पर दिखाई दे सकता है. ऐसे में समय रहते फिल्टर बदलना जरूरी है. जानते हैं कि फिल्टर कितने समय में बदलना चाहिए और कौन से संकेत मिलने पर तुरंत इसकी जांच करानी चाहिए.

वॉटर प्यूरीफायर का फिल्टर कब बदलना चाहिए?

वॉटर प्यूरीफायर में अलग-अलग तरह के फिल्टर इस्तेमाल होते हैं और सभी की उम्र एक जैसी नहीं होती. सामान्य तौर पर सेडिमेंट फिल्टर को 3 से 6 महीने, कार्बन फिल्टर को 6 से 12 महीने, RO मेम्ब्रेन को 12 से 24 महीने और UF फिल्टर को करीब 12 महीने में बदलने की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि, फिल्टर कितने समय तक चलेगा यह पानी की क्वालिटी और इस्तेमाल पर भी निर्भर करता है. कुछ RO मेम्ब्रेन इससे ज्यादा समय तक भी चल सकते हैं.

फिल्टर बदलने का सही समय जानने के लिए अपने प्यूरीफायर के मैनुअल और कंपनी के सर्विस निर्देशों को प्राथमिकता दें. नया फिल्टर लगाने के बाद सिस्टम को निर्माता के निर्देश के मुताबिक फ्लश करना और सभी कनेक्शन में लीकेज की जांच करना भी जरूरी है.

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फिल्टर बदलने से कुछ संकेत

पानी का टेस्ट या स्मेल बदल जाए

अगर प्यूरीफायर से निकलने वाले पानी का स्वाद अचानक नमकीन, धातु जैसा या मिट्टी जैसा लगने लगे, तो इसे नजरअंदाज न करें. पानी में अजीब गंध आना भी फिल्टर की क्षमता कम होने का संकेत हो सकता है. खासकर कार्बन फिल्टर लंबे समय तक इस्तेमाल होने पर पानी से गंदगी और कुछ अवांछित गंध को हटाने की अपनी क्षमता खो सकता है. ऐसी स्थिति में फिल्टर की जांच करवाना बेहतर है.

पानी पहले से धीरे निकल रहा है

अगर पहले के मुकाबले प्यूरीफायर से पानी निकलन में ज्यादा समय लग रहा है, इसकी वजह फिल्टर में गंदगी जमा होना हो सकती है. सेडिमेंट या कार्बन फिल्टर के ज्यादा भर जाने पर पानी बहाव कम हो सकता है. ऐसे में सिर्फ मशीन की मोटर या दूसरी सेटिंग को दोष देने के बजाय फिल्टर और पूरे सिस्टम की जांच करवानी चाहिए.

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पानी धुंधला या उसमें कण दिखाई दें

प्यूरीफायर से निकलने वाला पानी साफ दिखाई देना चाहिए. अगर पानी पहले की तुलना में धुंधला नजर आ रहा है या उसमें छोटे-छोटे कण दिखाई दे रहे हैं, तो यह फिल्ट्रेशन सिस्टम की कार्यक्षणता प्रभावित होने का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में उस पानी का इस्तेमाल करने से बचें और प्यूरीफायर की जांच करवाएं.

RO पानी का TDS बढ़ने लगे

अगर RO से साफ होने के बाद पानी का TDS पहले के मुकाबले बढ़ रहा है, तो RO मेम्ब्रेन या पूरी फिल्ट्रेशन सिस्टम की जांच करानी चाहिए. हालांकि सिर्फ TDS मीटर के आधार पर पानी की पूरी क्वालिटी का पता नहीं लगाया जा सकता. पानी में मौजूद हर तरह की गंदगी या दूषित पदार्थ को TDS मीटर नहीं मापता. इसलिए लगातार बढ़ते TDS को फिल्टर और RO सिस्टम की जांच कराने का एक संकेत मान सकते हैं.

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प्यूरीफायर फिल्टर बदलने का अलर्ट दे

आजकल कई मॉडर्न वॉटर प्यूरीफायर में फिल्टर बदलने के लिए इंडिकेटर लाइट या सर्विस अलर्ट दिया जाता है. अगर मशीन फिल्टर बदलने का संकेत दे रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें. प्यूरीफायर के मैनुअल में दिए निर्देशों के मुताबिक फिल्टर की जांच कराएं और जरूरत पड़ने पर उसे बदलवा दें. इससे मशीन को सही तरीके से काम करने में मदद मिल सकती है.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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