इनवर्टर का बैटरी बैकअप अचानक हो गया कम? ये हो सकती हैं वजह, बदलने से पहले चेक करें 5 चीजें

बिजली जाते ही अगर इनवर्टर पहले के मुकाबले जल्दी बंद हो रहा है, तो हर बार बैटरी खराब होना इसकी वजह नहीं है. यहां जानते हैं कौन-सी वो बातें है जिनकी वजह से बैटरी बैकअप कम होता है.

inverter battery backup

इनवर्टर की बैटरी जल्दी खत्म होने की क्या है वजह? (Image Credit-AI)

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अगर आपके घर में बिजली जाते ही इनवर्टर कुछ देर में जवाब देने लगा है, तो हर बार इसके लिए बैटरी को जिम्मेदार मानना सही नहीं है. कई बार बैकअप कम होने की वजह जरूरत से ज्यादा लोड, बैटरी की उम्र, पानी का लेवल, चार्जिंग सिस्टम या टर्मिनल पर जमा गंदगी भी हो सकती है. खास बात यह है कि इनमें से कुछ समस्याओं को समय रहते पहचान लिया जाए, तो इनवर्टर की बैटरी की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

पुरानी बैटरी दे सकती है कम बैकअप

इनवर्टर बैटरी की भी एक तय लाइफ होती है. लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद बैटरी की चार्ज रखने की पावर धीरे-धीरे कम हो सकता ही. ऐसी कंडीशन में बैटरी पूरी चार्ज दिखने के बावजूद बिलजी जाने के कुछ ही समय बाद डिस्चार्ज हो सकती है. अगर बैटरी काफी पुरानी है और लगातार बैकअप घट रहा है, तो उसकी जांच करवाना जरूरी है.

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जरूरत से ज्यादा लोड भी है वजह

इनवर्टर से एक साथ बहुत सारे उपकरण चलाने पर बैटरी तेजी से डिस्चार्ज हो सकती है. पंखा, लाइट, टीवी, कंप्यूटर और दूसरे उपकरण एक साथ चलने पर इनवर्टर पर लोड बढ़ जाता है. इसलिए बिजली जाने के दौरान कोशिश करें कि केवल जरूरी उपकरण ही इनवर्टर से चलें. इससे बैटरी पर पड़ने वाला अनावश्यक दबाव कम हो सकता है.

बैटरी में पानी का लेवल जरूर देखें

लेस-एसिड बैटरी में इलेक्ट्रोलाइट के पानी का सही लेवल बनाए रखना जरूरी होता है. पानी काम होने पर बैटरी की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है और बैकअप भी घट सकता है. बैटरी के टाइप और निर्देशों के मुताबिक ही पानी की जांच और टॉपअप करें.बिना जानकारी के बैटरी में कोई दूसरा लिक्विड डालना सही नहीं है.

चार्जिंग सिस्टम में खराबी हो सकती है

कई बार बैकअप कम होने की असली वजह बैटरी नहीं, बल्कि इनवर्टर का चार्जिंग सिस्टम होता है. अगर बैटरी पूरी तरह चार्ज नहीं हो पा रही है तो बिजली जाने पर बैकअप भी कम मिलेगा. ढीले कनेक्शन, खराब वायरिंग या चार्जिंग सर्किट में समस्या इसकी वजह हो सकती है. ऐसी स्थिति में किसी तकनीशियन से इनवर्टर की जांच करवाना बेहतर है.

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बैटरी के टर्मिनल भी करें चेक

बैटरी के टर्मिनल पर धूल जंग या गंदगी जमा होने से कनेक्श प्रभावित हो सकता है. इसकी तरह टर्मिनल का कनेक्शन ढीला होने पर भी बैटरी की परफॉर्मेंस पर असर पड़ सकता है. इसलिए समय-समय पर टर्मिनल की स्थिति चेक करते रहें. सफाई या किसी तरह की मरम्मत करते समय निर्माता की सुरक्षा संबंधी सलाह का पालन जरूर करें.

समय पर मेंटेनेंस से मिलेगी मदद

इनवर्टर का बैकअप अचानक कम होने पर तुरंत नई बैटरी खरीदने की जरूरत हर मामले में नहीं होती. पहले यह देखना जरूरी है कि समस्या बैटरी की उम्र, ज्यादा लोड, पानी के लेवल, चार्जिंग सिस्टम या टर्मिनल से जुड़ी तो नहीं है. समय-समय पर बैटरी और इनवर्टर की जांच कराने से समस्या को समय रहते पकड़ने में मदद मिल सकती है.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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