Apple iPhone Duo का ड्यूरेबिलिटी टेस्ट सामने आया है. (Image Credit-JerryRigEverything/YT)
Apple का पहला फोल्डेबल फोन iPhone Duo अब लोगों के हाथों में पहुंच चुका है. 23 अक्टूबर से इसकी बिक्री शुरू होने के बाद दुनिया भर में इसके ड्यूरेबिलिटी टेस्ट भी शुरू हो गए हैं. भारत में इस फोन की कीमत करीब 3 लाख रुपये से शुरू होकर 4.5 लाख रुपये तक जाती है. ऐसे में हर किसी की नजर इस बात पर है कि इतनी ज्यादा कीमत वाला यह फोल्डेबल फोन रोजमर्रा के इस्तेमाल में कितना मजबूत है. मशहूर टेक यूट्यूबर जैक नेलसन के JerryRigEverything चैनल पर किए गए टेस्ट में फोन के फ्रेम ने तो मजबूती दिखाई, लेकिन हिंज और अंदर की फोल्डेबल स्क्रीन से जुड़े कुछ सवाल जरूर खड़े हो गए.
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धूल और रेत में फंस गया iPhone Duo का हिंज
ड्यूरेबिलिटी टेस्ट में सबसे पहले iPhone Duo को धूल और रेत के संपर्क में लाया गया. फोन को रेत और मिट्टी रखने के बाद उसे कई बार खोल और बंद किया गया. ऐसा करने से हिंज में धूल और रेत के कण पहुंच गए तब फोन बंद नहीं हो रहा था. जैक नेलसन के मुताबिक, फोन के अंदर मौजूद मैग्नेट भी इन कणों को बाहर निकालने में कामयाब नहीं रहे.
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IP68 रेटिंग के बावजूद क्यों आई परेशानी?
iPhone Duo को IP68 रेटिंग के साथ पेश किया गया है. हालांकि IP68 का मतलब ये नहीं है कि फोन हर तरह की धूल, रेत या दूसरी कंडीशन में पूरी तरह सुरक्षित रहेगा. यह रेटिंग तय परिस्थितियों में धूल और पानी से सुरक्षा को दर्शाती है. फोल्डेबल फोन में हिंज तक मूविंग पार्ट होता है और इसमें बाहरी कण चले जान पर परेशानी हो सकती है. टेस्ट में भी यही देखने को मिला.
बाहरी स्क्रीन ने झेले स्क्रैच, अंदर की स्क्रीन ज्यादा नाजुक
स्क्रैच टेस्ट में फोन की बाहरी और अंदर वाली स्क्रीन के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला. iPhone Duo की बाहरी स्क्रीन पर Ceramic Shield 2 प्रोटेक्शन दिया गया है. टेस्ट के दौरान इस स्क्रीन पर Mohs स्केल के लेवल 7 तक हल्के निशान दिखाई दिए.
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लेवल 2 पर ही अंदर की स्क्रीन पर पड़े निशान
फोन की अंदर वाली फोल्डेबल स्क्रीन ज्यादा नाजुक निकली. रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्क्रीन पर Mohs स्केल के लेवल 2 पर ही खरोंच के निशान दिखाई देने लगे. इतना ही नहींं, नाखून के दबाव पड़ने पर भी स्क्रीन पर निशान आ सकते हैं. फोल्डेबल फोन की इस स्क्रीन को इस्तेमाल करते समय थोड़ी ज्यादा सावधानी रखने की जरूरत पड़ सकती है.
Image Credit-JerryRigEverything/YT
मैट फिनिश वाली स्क्रीन पर दिखीं खरोंच
iPhone Duo की अंदर वाली स्क्रीन पर मैट फिनिश के लिए नैनो टेक्सचर कोटिंग दी गई है. स्क्रीन चालू रहने पर कुछ खरोंच कम नजर आ सकती हैं, लेकिन स्क्रीन बंद होने पर ये निशान ज्यादा साफ दिखाई देते हैं. ऐसे में धूल के छोटे कण नाखून या दूसरी चीजें स्क्रीन के लिए परेशानी खड़ी कर सकती हैं.
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बेंड टेस्ट में फ्रेम रहा मजबूत
टेस्ट के आखिरी हिस्से में जैक नेलसन ने फोन को उल्टी दिशा में मोड़कर इसकी मजबूती जांची. इस दौरान iPhone Duo का टाइटेनियम फ्रेम काफी मजबूत रहा. काफी दबाव डालने के बावजूद फोन की बॉडी नहीं टूटी. हालांकि, इस टेस्ट में फोन की अंदर वाली स्क्रीन को नुकसान पहुंच गया.
मोड़ते ही स्क्रीन पर आई हरी लाइन
पहली बार फोन को उल्टी दिशा में मोड़ने के बाद डिस्प्ले पर एक हरी लाइन दिखाई देने लगी. इसके बाद दोबारा दबाव डालने पर स्क्रीन पर और लाइनें उभर आईं. आखिर में अंदर की डिस्प्ले का टच भी काम करना बंद कर गया. यानी फोन का फ्रेम तो टूटने से बच गया, लेकिन उसकी मुख्य फोल्डेबल स्क्रीन खराब हो गई.
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सिर्फ मजबूत बॉडी काफी नहीं
iPhone Duo के ड्यूरेबिलिटी टेस्ट से एक बात साफ नजर आती है कि फोल्डेबल फोन की मजबूती सिर्फ उसके बाहरी फ्रेम से तय नहीं होती. हिंज और अंदर की फोल्डेबल स्क्रीन भी उतने ही अहम हैं. फोन का फ्रेम मजबूत होने के बावजूद अगर स्क्रीन या हिंज को नुकसान पहुंचता है, तो इसका असर इस्तेमाल और रिपेयर खर्च दोनों पर पड़ सकता है.
iPhone Duo की स्क्रीन रिपेयर में कितना आता है खर्च
रिपोर्ट के मुताबिक, iPhone Duo की अंदर वाली स्क्रीन को रिपेयर कराने का खर्च भारत में करीब 1.5 लाख रुपये तक हो सकता है. यह रकम फोन की शुरुआती कीमत का काफी बड़ा हिस्सा है. हालांकि, वास्तविक रिपेयर खर्च नुकसान की स्थिति, उपलब्ध पार्ट्स और Apple की सर्विस शर्तों पर निर्भर करेगा. इसलिए 1.5 लाख रुपये को हर तरह की स्क्रीन खराब होने पर लागू होने वाली तय कीमत नहीं माना जाना चाहिए.
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4.5 लाख रुपये के फोन को रखना होगा संभालकर
iPhone Duo की कीमत भारत में करीब 3 लाख रुपये से शुरू होकर 4.5 लाख रुपये तक जाती है. ऐसे में ड्यूरेबिलिटी टेस्ट के नतीजे उन लोगों के लिए अहम हैं जो इस फोल्डेबल फोन को खरीदने की सोच रहे हैं. खासकर अंदर की स्क्रीन और हिंज को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी, क्योंकि इन हिस्सों को नुकसान पहुंचने पर रिपेयर का खर्च भी काफी ज्यादा हो सकता है.