फोन की घंटी बजती है और दूसरी तरफ से आपके भाई, बेटे, बेटी या किसी करीबी की आवाज सुनाई देती है. सामने वाला घबराई हुई आवाज में कहना है, मैं मुसीबत में हूं, अभी तुरंत पैसे भेज दो… आवाज बिल्कुल अपने जैसी लगती है, इसलिए बिना ज्यादा सोचे आप पैसे ट्रांसफर कर देते हैं. लेकिन अब सिर्फ आवाज सुनकर किसी पर भरोसा करना भारी पड़ सकता है. AI की मदद से साइबर ठक किसी की आवाज की हूबहू नकल तैयार कर रहे हैं और इसी के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बनाने की कोशिश हो रही है. दूरसंचार विभाग (DoT) ने भी लोगों को ऐसे वॉइस क्लोनिंग स्कैम से सावधान रहने की सलाह दी है.
कैसी होती है ये ठगी?
DoT के मुताबिक, साइबर ठग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके किसी परिचित की आवाज की नकल कर सकते हैं. इसके बाद वे परिवार के किसी सदस्य या करीबी बनकर फोन कर सकते हैं. हादसे, पुलिस केस, अस्पताल या किसी दूसरी परेशानी का बहाना बनाकर तुरंत पैसे भेजने के लिए कहा जा सकता है. आवाज जानी-पहचानी होने की वजह से सामने वाला घबरा जाता है और बिना पुष्टि किए पैसे भेज देते हैं.
कैसे बनाते हैं आवाज का क्लोन
वॉइस क्लोन तैयार करने के लिए ठगों को हमेशा आपकी निजी जानकारी चुराने की जरूरत नहीं होती. सोशल मीडिया पर मौजूद रील, वीडियो या किसी दूसरी रिकॉर्डिंग से भी आवाज का सैंपल मिल सकता है. इसके अलावा किसी के निजी वॉइस नोट का भी गलत इस्तेमाल किया जा सकता है. AI टूल्स की मदद से इसी आवाज को इस तरह तैयार किया जा सकता है कि फोन पर सुनने वाले को वह काफी हद तक असली लगे.
ठगी से कैसे बचें?
AI से तैयार की गई आवाज असली जैसी लग सकती है, इसलिए फोन पर किसी की आवाज पहचान लेना अब पक्की पुष्टि नहीं मानी जा सकती. अगर कोई करीबी बनकर अचानक पैसे मांगता है, तो तुरंत पैसे भेजने के बजाय कुछ मिनट रुकें. उस व्यक्ति के पुराने और सेव नंबर पर खुद कॉल करके बात की पुष्टि करें. अगर कॉल करने वाला किसी दूसरे नंबर से बात कर रहा है, तो इसे भी नजरअंदाज न करें.
घबराने की बजाय पूछें ये सवाल
ठग अक्सर जल्दबाजी और डर का माहौल बनाकर काम करते हैं. वे कह सकते हैं कि अभी पैसे नहीं भेजे तो बड़ी परेशानी हो जाएगी या किसी को इस बारे में बताना नहीं है. ऐसे प्रेशर में आकर ट्रांजैक्शन न करें. परिवार के किसी सदस्य से ऐसा सवाल पूछ सकते हैं जिसका जवाब सिर्फ वही करीबी व्यक्ति जानता हो. परिवार में पहले से कोई सीक्रेट कोड वर्ड तय करना भी मददगार हो सकता है, जिसे जरूरत पड़ने पर फोन पर पहचान की पुष्टि के लिए इस्तेमाल किया जा सके. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और ऐसे लोगों को इस तरह के AI स्कैम के बारे में जरूर बताएं, जो घबराहट में जल्दी फैसला ले सकते हैं.
OTP और UPI PIN बिल्कुल न बताएं
कोई व्यक्ति खुद को कितना भी करीबी क्यों न बताए, फोन पर OTP, UPI, PIN, बैंक डिटेल, कार्ड क जानकारी या इंटनेट बैंकिग से जुड़ी सेंसेटिव जानकारी साझा न करें. ध्यान रखें कि पैसे भेजने के लिए UPI पिन जरूरत होती है, पैसे लेने के लिए नहीं. अगर कोई पैसे भेजने के नाम पर आपसे UPI PIN डालने या स्क्रीन शेयर करने को कह रहा है, तो तुरंत सावधान हो जाएं.
ठगी की कोशिश हो तो कहां करें शिकायत
अगर आपको ऐसा संदिग्ध फोन या मैसेज मिलता है, तो उसकी शिकायत संचार साथी पोर्टल के चक्षु (Chakshu) सेक्शन में की जा सकती है. इससे संदिग्ध कम्युनिकेशन की रिपोर्ट की जा सकती है. वहीं अगर आपके खाते से पैसे निकल चुके हैं, तो इंतजार न करें. तुरंत 1930 पर कॉल करें और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं. जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, पैसे को ट्रेस या रोकने की कोशिश में उतनी मदद मिल सकती है.