हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: Tiger ShroffCJP ProtestGyanesh KumarBigg Boss 20

खामेनेई की मौत पर भारत की 'चुप्पी'… क्या है मोदी सरकार की कूटनीति? जानिए इसके पीछे के मायने

खामेनेई की मौत पर भारत ने एक ‘सोची-समझी चुप्पी’ साध रखी है. यह रुख किसी आकस्मिक फैसले का नतीजा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों और दशकों के कड़वे अनुभवों पर आधारित है.

विज्ञापन
खामेनेई की मौत के बाद अमेरिका-इजरायल के खिलाफ J&K में प्रदर्शन करती महिलाएं.

ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की शनिवार को हुए अमेरिकी-इजरायल के हमलों में मौत हो गई. खामेनेई की मौत के बाद कई देशों ने शोक व्यक्त किया, लेकिन भारत की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं आया. खामेनेई की मौत पर भारत में विपक्ष दलों ने सरकार से औपचारिक बयान की मांग की है. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक ‘सोची-समझी चुप्पी’ साध रखी है. भारत का यह रुख किसी आकस्मिक फैसले का परिणाम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों और दशकों के कड़वे अनुभवों पर आधारित हो सकता है.

भारत के मामलों में दखल

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, 2017 से 2024 के बीच खामेनेई ने कम से कम चार बार भारत के आंतरिक मामलों में सीधा दखल दिया था. जिसकी वजह से हर बार विदेश मंत्रालय को ईरानी दूतों को तलब करना पड़ा. साल 2017 और 2019 (कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद) में खामेनेई ने कश्मीरियों को ‘उत्पीड़ित’ बताते हुए पाकिस्तान की भाषा बोली थी. फिर 2020 में दिल्ली दंगों को ‘हिंदू चरमपंथियों’ द्वारा ‘मुसलमानों का नरसंहार’ करार दिया था और सोशल मीडिया पर भड़काऊ हैशटैग चलाए थे.

यह भी पढ़ें : अमेरिका ने जिस बम से बनाया ईरान को निशाना, कितनी है उसकी कीमत? हो गया सब तबाह

विज्ञापन

इसके अलावा ईरानी संसद ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) की तीखी आलोचना की थी. सितंबर 2024 में खामेनेई ने भारत की तुलना गाजा और म्यांमार से कर दी थी, जिसका विदेश मंत्रालय ने कड़ा विरोध किया था.

खामेनेई की मौत पर तेहरान में शोक मनाती एक ईरानी महिला.

दूसरे देशों का रुख

भारत की चुप्पी दूसरे देशों की प्रतिक्रिया के अनुरूप है. किसी भी G7 देश ने खामेनेई की मौत पर शोक व्यक्त नहीं किया है. अमेरिका ने उन्हें ‘इतिहास का सबसे दुष्ट व्यक्ति’ बताया, जबकि यूक्रेन और फ्रांस ने उनके अंत पर संतोष व्यक्त किया है. भारत एक जिम्मेदार लोकतंत्र के रूप में इन्हीं वैश्विक मानकों का पालन कर रहा है.

विज्ञापन

यह भी पढ़ें : ईरान को परमाणु हथियार बनाने से क्यों रोकता है अमेरिका-इजरायल? क्या है 11 साल पुराना विवाद, जो बना जंग की वजह

खाड़ी देशों के साथ संबंध

भारत के लिए सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देश रणनीतिक रूप से कहीं ज्यादा अहम हैं. इन देशों में प्रवासी भारतीयों की तादाद बहुत ज्यादा है. अभी ईरान इन्हीं देशों पर मिसाइल से हमले कर रहा है. ऐसे में ईरान के प्रति सहानुभूति दिखाना भारत के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों को नाराज कर सकता है. यूएई ने पहले तो ईरान को हमला ना करने की धमकी दी, फिर तेहरान में अपना दूतावास तक बंद कर दिया.

विज्ञापन
खामेनेई की हत्या के खिलाफ श्रीनगर में विरोध-प्रदर्शन करते लोग.

विपक्ष इस चुप्पी को को लेकर निशाना साध रहा है. लेकिन हकीकत यह है कि 57 मुस्लिम देशों के संगठन (OIC) में से भी केवल 10 से कम देशों ने शोक जताया है. भारत ने हमेशा ‘संवाद और कूटनीति’ पर जोर दिया है, जैसा कि पीएम मोदी ने हाल ही में कनाडाई पीएम के साथ वार्ता में दोहराया.

यह भी पढ़ें : ईरान-इजरायल युद्ध के बीच OPEC+ देशों का बड़ा ऐलान, 8 देशों ने की तेल उत्पादन बढ़ाने की घोषणा

विज्ञापन

उन्होंने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ एक ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘भारत शांति और स्थिरता के पक्ष में खड़ा है. भारत ने हमेशा ऐसे विवादों का समाधान खोजने के लिए संवाद और कूटनीति का आह्वान किया है.’

यह भी पढ़ें : ट्रैकिंग सिस्टम या अपनों की गद्दारी! कैसे लीक हुई खामेनेई की सटीक लोकेशन? सिर्फ 30 सेकेंड और…

विज्ञापन

संयम बरतने का आग्रह किया

भारत के विदेश मंत्रालय कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अध्यक्षता करते हुए संयम, संवाद का आग्रह किया और यूएई सहयोगियों पर ईरान के हमलों की निंदा की.

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola