ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की शनिवार को हुए अमेरिकी-इजरायल के हमलों में मौत हो गई. खामेनेई की मौत के बाद कई देशों ने शोक व्यक्त किया, लेकिन भारत की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं आया. खामेनेई की मौत पर भारत में विपक्ष दलों ने सरकार से औपचारिक बयान की मांग की है. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक ‘सोची-समझी चुप्पी’ साध रखी है. भारत का यह रुख किसी आकस्मिक फैसले का परिणाम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों और दशकों के कड़वे अनुभवों पर आधारित हो सकता है.
भारत के मामलों में दखल
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, 2017 से 2024 के बीच खामेनेई ने कम से कम चार बार भारत के आंतरिक मामलों में सीधा दखल दिया था. जिसकी वजह से हर बार विदेश मंत्रालय को ईरानी दूतों को तलब करना पड़ा. साल 2017 और 2019 (कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद) में खामेनेई ने कश्मीरियों को ‘उत्पीड़ित’ बताते हुए पाकिस्तान की भाषा बोली थी. फिर 2020 में दिल्ली दंगों को ‘हिंदू चरमपंथियों’ द्वारा ‘मुसलमानों का नरसंहार’ करार दिया था और सोशल मीडिया पर भड़काऊ हैशटैग चलाए थे.
यह भी पढ़ें : अमेरिका ने जिस बम से बनाया ईरान को निशाना, कितनी है उसकी कीमत? हो गया सब तबाह
इसके अलावा ईरानी संसद ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) की तीखी आलोचना की थी. सितंबर 2024 में खामेनेई ने भारत की तुलना गाजा और म्यांमार से कर दी थी, जिसका विदेश मंत्रालय ने कड़ा विरोध किया था.
दूसरे देशों का रुख
भारत की चुप्पी दूसरे देशों की प्रतिक्रिया के अनुरूप है. किसी भी G7 देश ने खामेनेई की मौत पर शोक व्यक्त नहीं किया है. अमेरिका ने उन्हें ‘इतिहास का सबसे दुष्ट व्यक्ति’ बताया, जबकि यूक्रेन और फ्रांस ने उनके अंत पर संतोष व्यक्त किया है. भारत एक जिम्मेदार लोकतंत्र के रूप में इन्हीं वैश्विक मानकों का पालन कर रहा है.
यह भी पढ़ें : ईरान को परमाणु हथियार बनाने से क्यों रोकता है अमेरिका-इजरायल? क्या है 11 साल पुराना विवाद, जो बना जंग की वजह
खाड़ी देशों के साथ संबंध
भारत के लिए सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देश रणनीतिक रूप से कहीं ज्यादा अहम हैं. इन देशों में प्रवासी भारतीयों की तादाद बहुत ज्यादा है. अभी ईरान इन्हीं देशों पर मिसाइल से हमले कर रहा है. ऐसे में ईरान के प्रति सहानुभूति दिखाना भारत के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों को नाराज कर सकता है. यूएई ने पहले तो ईरान को हमला ना करने की धमकी दी, फिर तेहरान में अपना दूतावास तक बंद कर दिया.
विपक्ष इस चुप्पी को को लेकर निशाना साध रहा है. लेकिन हकीकत यह है कि 57 मुस्लिम देशों के संगठन (OIC) में से भी केवल 10 से कम देशों ने शोक जताया है. भारत ने हमेशा ‘संवाद और कूटनीति’ पर जोर दिया है, जैसा कि पीएम मोदी ने हाल ही में कनाडाई पीएम के साथ वार्ता में दोहराया.
यह भी पढ़ें : ईरान-इजरायल युद्ध के बीच OPEC+ देशों का बड़ा ऐलान, 8 देशों ने की तेल उत्पादन बढ़ाने की घोषणा
उन्होंने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ एक ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘भारत शांति और स्थिरता के पक्ष में खड़ा है. भारत ने हमेशा ऐसे विवादों का समाधान खोजने के लिए संवाद और कूटनीति का आह्वान किया है.’
यह भी पढ़ें : ट्रैकिंग सिस्टम या अपनों की गद्दारी! कैसे लीक हुई खामेनेई की सटीक लोकेशन? सिर्फ 30 सेकेंड और…
संयम बरतने का आग्रह किया
भारत के विदेश मंत्रालय कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अध्यक्षता करते हुए संयम, संवाद का आग्रह किया और यूएई सहयोगियों पर ईरान के हमलों की निंदा की.
संबंधित खबरें
कौन हैं 81 साल के लूला डा सिल्वा, जिन्हें चौथी बार मिली ब्राजील की सत्ता?
22 hrs agoबंगाल की खाड़ी से आ रहे चक्रवात का नाम 'अर्नब' कैसे पड़ा? जानिए इसकी वजह
23 hrs agoक्या है दसवीं अनुसूची जिसके तहत जा सकती है विधायक-सांसद की सदस्यता?
2 days agoक्या हैं पुलिस बॉन्ड, कितने प्रकार के होते, उल्लंघन किया जाए तो क्या होगा?
2 days agoअखिलेश ने जेल जाकर क्यों साधा आजम का किला, जानिए क्या पक रही सियासी खिंचड़ी
2 days agoजेल में कैद मां के साथ रहने वाले बच्चों को गोद ले सकते हैं क्या? जानें नियम
3 days agoपाकिस्तान समेत 4 देशों का रक्षा समझौता, भारत की बढ़ेगी चिंता?
4 days agoदिल्ली-NCR में कब-कौन तय करता है Grap, कैसे और कौन-सा फेज होगा लागू?
4 days agoक्या है SEM कोर्ट? जहां अटकी है सौरव-रांका की रिहाई, अदालत से अलग कैसे?
5 days agoMecca Defence Pact: तुर्की, सऊदी और पाकिस्तान के समझौते की पूरी जानकारी
5 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines