Explainer: मेटल सिक्योरिटी टैरिफ क्या है, किन धातुओं पर लगता है और ये आम टैरिफ से कैसे अलग है? जानिए एक-एक बात

मेटल सिक्योरिटी टैरिफ एक खास तरह का आयात शुल्क है, जिसे देश की सुरक्षा और घरेलू उद्योग को बचाने के लिए लगाया जाता है. जानिए ये टैरिफ किन धातुओं पर लागू होता है और सामान्य टैरिफ से कैसे अलग है.

Metal Security Tariff

Credit: Social Media

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हाल के दिनों में इंटरनेशनल बिजनेस और आयात-निर्यात से जुड़ी खबरों में मेटल सिक्योरिटी टैरिफ शब्द काफी सुनने को मिल रहा है. भारत सरकार ने हाल ही में चीन, वियतनाम और नेपाल से आने वाले खास इस्पात उत्पादों पर 3 साल के लिए 11-12% का शुल्क लगाया है, वहीं अमेरिका ने भी 25-50% तक के स्टील और एल्यूमीनियम टैरिफ लगाए हैं. आम लोगों के मन में सवाल है कि आखिर ये टैरिफ क्या होता है, किन चीजों पर लगाया जाता है और ये सामान्य टैरिफ से कैसे अलग है. चलिए हम इस बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं

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मेटल सिक्योरिटी टैरिफ क्या है?

मेटल सिक्योरिटी टैरिफ एक विशेष आयात शुल्क होता है, जो कोई देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर लगाता है. इसका मकसद ये सुनिश्चित करना होता है कि देश को जरूरी धातुओं के लिए पूरी तरह विदेशी देशों पर निर्भर ना रहना पड़े. अगर किसी देश को लगता है कि ज्यादा आयात से उसका घरेलू उद्योग कमजोर हो रहा है या भविष्य में सुरक्षा से जुड़ी दिक्कतें आ सकती हैं, तो वो इस तरह का टैरिफ लागू कर सकता है. मेटल सिक्योरिटी टैरिफ लगाने का मुख्य उद्देश्य देश के घरेलू मेटल उद्योग को सुरक्षित रखना होता है. कई बार सस्ते आयात के कारण स्थानीय स्टील और एल्यूमिनियम कंपनियां नुकसान में चली जाती हैं, जिससे उत्पादन घटता है और रोजगार पर असर पड़ता है. ऐसी स्थिति में सरकार इस टैरिफ के जरिए आयात को थोड़ा महंगा बनाती है, ताकि घरेलू कंपनियों को बाजार में टिके रहने का मौका मिल सके.

किन चीजों पर लगता है ये टैरिफ?

ये टैरिफ आमतौर पर उन धातुओं पर लगाया जाता है जिनका इस्तेमाल रक्षा उपकरणों, रेलवे, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल और भारी उद्योगों में होता है. इनमें स्टील, एल्यूमिनियम, लोहा और कुछ खास मिश्र धातुएं शामिल हैं. इन धातुओं को रणनीतिक इसलिए माना जाता है क्योंकि इनकी कमी सीधे देश की सुरक्षा और विकास परियोजनाओं को प्रभावित कर सकती है.

आम टैरिफ से कैसे अलग है?

मेटल सिक्योरिटी टैरिफ और सामान्य टैरिफ के बीच सबसे बड़ा अंतर इसके लगाने के कारण में होता है. सामान्य टैरिफ सरकार की इनकम बढ़ाने या व्यापार घाटा कम करने के लिए लगाया जाता है, जबकि मेटल सिक्योरिटी टैरिफ का आधार राष्ट्रीय सुरक्षा होता है. यही वजह है कि कई बार इस तरह के टैरिफ पर विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियम भी पूरी तरह लागू नहीं होते और देशों को सुरक्षा के नाम पर कुछ छूट मिल जाती है. मेटल सिक्योरिटी टैरिफ का असर केवल व्यापार पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय रिश्तों और कूटनीति पर भी पड़ता है.

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टैरिफ के फायदे और नुकसान

इस टैरिफ के कई फायदे भी हैं. इससे घरेलू मेटल उद्योग को मजबूती मिलती है, रोजगार सुरक्षित होते हैं और देश रणनीतिक रूप से आत्मनिर्भर बनता है. हालांकि इसके कुछ नुकसान भी देखने को मिलते हैं. आयात महंगा होने से कार, घर और मशीनरी जैसे उत्पादों की कीमत बढ़ सकती है. इसके अलावा दूसरे देश जवाबी टैरिफ लगाकर व्यापार तनाव भी बढ़ा सकते हैं. भारत समेत दुनिया के कई देश मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए अब अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने पर जोर दे रहे हैं. ऐसे में मेटल सिक्योरिटी टैरिफ को सिर्फ एक टैक्स नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित से जुड़ा अहम फैसला माना जा रहा है. आने वाले समय में इसका असर वैश्विक व्यापार और आर्थिक रिश्तों पर और ज्यादा देखने को मिल सकता है.

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

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वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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