उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज का दिन बेहद हलचल भरा रहने वाला है. समाजवादी पार्टी के तीन चर्चित बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी अमेठी के गौरीगंज में आज होने वाले कार्यक्रम में औपचारिक रूप से BJP में शामिल हो रहे हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और BJP के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी समारोह में शामिल होंगे. सपा के बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी ने 2022 के चुनाव में BJP और उसके सहयोगी दलों के दिग्गजों को हराया था. अब इन तीनों के BJP में शामिल होने से स्थानीय स्तर पर सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं. सपा से आए इन विधायकों को 2027 में टिकट देना और अपने पुराने वफादार नेताओं को साधे रखना यही BJP के सामने सबसे बड़ा सिरदर्द होगा.
कौन हैं गौरीगंज से तीन बार के विधायक राकेश प्रताप सिंह?
राकेश प्रताप सिंह अमेठी जिले की गौरीगंज सीट से लगातार तीन बार (2012, 2017 और 2022) सपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे हैं. क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. राज्यसभा चुनाव में बगावत के बाद उन्होंने सपा के पीडीए (PDA) फॉर्मूले और परिवारवाद पर तीखे सवाल उठाए थे. उनका BJP में जाना अमेठी और आसपास के इलाके में सपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है.
2022 में राकेश प्रताप सिंह ने BJP के कद्दावर ब्राह्मण नेता चंद्र प्रकाश मिश्र ‘मटियारी’ को करीब 6,963 वोटों से हराया था.
BJP के सामने चुनौती: मटियारी अमेठी में बड़ा ब्राह्मण चेहरा हैं और पूर्व सांसद स्मृति ईरानी की कोर टीम का हिस्सा रहे हैं. राकेश के आने के बाद मटियारी पहले ही साफ कर चुके हैं कि पार्टी में आने से टिकट की गारंटी नहीं मिलती. 2027 में सीट पर ‘ब्राह्मण बनाम ठाकुर’ समीकरण साधना और स्थानीय कार्यकर्ताओं की नाराजगी रोकना BJP के लिए बड़ी चुनौती होगी.
अभय सिंह पूर्वांचल और अवध के कद्दावर नेता
अयोध्या की गोसाईंगंज सीट से विधायक अभय सिंह पूर्वांचल और अवध के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं. 2022 में उन्होंने सपा के सिंबल पर जीत दर्ज की थी. अभय सिंह का स्थानीय नेटवर्क और युवाओं के बीच असर काफी मजबूत माना जाता है. अयोध्या और आसपास के जिलों में BJP लंबे समय से सामाजिक व सियासी संतुलन साधने में जुटी है, ऐसे में अभय सिंह की एंट्री भगवा पार्टी को जमीनी बढ़त दिला सकती है.
2022 में अभय सिंह ने BJP प्रत्याशी आरती तिवारी को 13 हजार से अधिक वोटों से मात दी थी. आरती तिवारी पूर्व बाहुबली विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ ‘खब्बू तिवारी’ की पत्नी हैं.
BJP के सामने चुनौती: अयोध्या की राजनीति में अभय सिंह और खब्बू तिवारी की लड़ाई सिर्फ दो नेताओं की नहीं, बल्कि इलाके में ‘ठाकुर बनाम ब्राह्मण’ के वर्चस्व की रही है. अभय सिंह के BJP में आने से खब्बू तिवारी खेमा खुद को असहज महसूस कर सकता है. ऐसे में दोनों धुर-विरोधियों को एक मंच पर साथ लेकर चलना संगठन के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा.
जालौन में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष भी रहे विनोद चतुर्वेदी
बुंदेलखंड के जालौन जिले की कालपी विधानसभा सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी पेशे से वकील हैं और लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति कर चुके हैं. वह जालौन में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष भी रहे और 2007 में पहली बार विधायक बने. 2021 में उन्होंने सपा का दामन थामा और 2022 के चुनाव में जीत हासिल की. बुंदेलखंड में ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उनकी अच्छी पैठ मानी जाती है, जिससे BJP को इस अंचल में लाभ मिलने की उम्मीद है.
विनोद चतुर्वेदी ने BJP गठबंधन (निषाद पार्टी) के प्रत्याशी छोटे सिंह को महज 2,816 वोटों के अंतर से हराया था.
BJP के सामने चुनौती: कालपी सीट पर लंबे समय से क्षत्रिय राजनीति का दबदबा रहा है. 2017 में यहां BJP के नरेंद्र पाल सिंह जीते थे, जबकि 2022 में यह सीट गठबंधन में गई. ब्राह्मण चेहरे विनोद चतुर्वेदी की एंट्री से BJP को सहयोगी निषाद पार्टी के कैडर और अपने मूल क्षत्रिय वोट बैंक के बीच संतुलन बिठाना होगा.
इन तीनों विधायकों के BJP में आने से अवध से लेकर बुंदेलखंड तक सियासी समीकरण बदल सकते हैं.