हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: DiwaliIndia blocGyanesh KumarBigg Boss 20

अमेरिका की उस जमीन पर बस रहे हजारों भारतीय, जहां कभी हुआ था नस्लीय नरसंहार; कहा जाता था 'ट्रेल ऑफ टीयर्स'

Trail of Tears: 1830 के दशक में चेरोकी समुदाय को भी उनकी जमीन से हटाकर ओकलाहोमा भेज दिया गया था. इस घटना को अमेरिकी इतिहास में ‘ट्रेल ऑफ टीयर्स’ के नाम से जाना जाता है.

विज्ञापन
इस घटना को अमेरिकी इतिहास में 'ट्रेल ऑफ टीयर्स' के नाम से जाना जाता है. (Photo: PTI)

अमेरिका के जॉर्जिया राज्य का फोर्सिथ काउंटी कभी नस्लीय हिंसा और भेदभाव के लिए जाना जाता था. करीब दो शताब्दी पहले इसी इलाके से मूल अमेरिकी चेरोकी समुदाय को उनकी पुश्तैनी जमीन से बेदखल किया गया था. बाद में अश्वेत लोगों को भी हिंसा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा. लेकिन आज इसी जमीन पर हजारों भारतीय परिवार अपने नए घर बसा रहे हैं. आलीशान मकान, भारतीय मंदिर, किराना स्टोर और मिठाइयों की दुकानें इस इलाके को मिनी इंडिया का रूप दे रही हैं. हालांकि, भारतीय समुदाय की बढ़ती मौजूदगी के बावजूद स्थानीय लोगों के साथ घुलने-मिलने का मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है.

160 से बढ़कर 52000 हुई भारतीयों की आबादी

फोर्सिथ काउंटी में भारतीयों की आबादी वर्ष 2000 में महज 160 थी, जो अब बढ़कर करीब 52 हजार हो गई है. यहां की कुल आबादी में भारतीयों की हिस्सेदारी लगभग 16 प्रतिशत है. इस मामले में भारतीय समुदाय श्वेत अमेरिकियों के बाद दूसरे स्थान पर है. श्वेत आबादी करीब 63.5 प्रतिशत है. जॉर्जिया में भारतीयों के बसने की शुरुआत 1960 के दशक में हुई थी. उस समय ज्यादातर भारतीय पढ़ाई और एकेडमिक फील्ड से जुड़े थे. हालांकि, 1990 के दशक के अंत के बाद यहां भारतीयों की संख्या तेजी से बढ़ी.

सालाना आय करीब 1.5 लाख डॉलर

फोर्सिथ काउंटी भारतीय प्रवासियों के लिए पसंदीदा ठिकाना बन गया. इसकी वजह यहां पहले से मौजूद भारतीय समुदाय, अच्छे स्कूल, मंदिर और भारतीय सामान की उपलब्धता है. यूएसए इंडिया बिजनेस समिट के कार्यक्रम अध्यक्ष अनी अग्निहोत्री के मुताबिक, भारतीय परिवारों की औसत सालाना आय करीब 1.5 लाख डॉलर है, जो अमेरिकी औसत से काफी अधिक है. इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ है, लेकिन आर्थिक असमानता और सामाजिक दूरी को लेकर असंतोष भी बढ़ा है.

विज्ञापन

यहां भारतीय किराना स्टोर, मिठाइयों की दुकानें, कपड़ों के शोरूम और रेस्तरां तेजी से बढ़े हैं. ग्रेटर अटलांटा क्षेत्र में करीब 100 हिंदू मंदिर हैं. गणेश चतुर्थी और दिवाली जैसे त्योहार भी बड़े स्तर पर मनाए जाते हैं.

नस्लीय हिंसा का लंबा इतिहास

फोर्सिथ का इतिहास बेहद दर्दनाक रहा है. वर्ष 1912 में एक श्वेत युवती की हत्या के बाद अश्वेत समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क उठी. रॉब एडवर्ड्स नाम के अश्वेत व्यक्ति की भीड़ ने हत्या कर दी. इसके बाद दो अन्य अश्वेत लोगों को फांसी दी गई और इलाके के अश्वेत परिवारों को जबरन बेदखल कर दिया गया. वर्ष 1987 में भी नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं की शांति मार्च के दौरान श्वेत लोगों ने हिंसक विरोध किया था.

विज्ञापन

इससे पहले 1830 के दशक में चेरोकी समुदाय को भी उनकी जमीन से हटाकर ओकलाहोमा भेज दिया गया था. इस घटना को अमेरिकी इतिहास में ‘ट्रेल ऑफ टीयर्स’ के नाम से जाना जाता है.

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola