त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ही भारत में चीनी के दाम बढ़ने लगे हैं. बीते एक महीने में खुदरा बाजार में चीनी की कीमत करीब 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है. वहीं, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में भी चीनी उद्योग की अहम भूमिका है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि पाकिस्तान में कितनी चीनी का उत्पादन होता है और वैश्विक चीनी बाजार में उसकी स्थिति क्या है.

पाकिस्तान में हर साल कितना होता है चीनी का उत्पादन?

पाकिस्तान में सामान्य तौर पर हर साल करीब 6.5 से 7 मिलियन टन यानी 65 से 70 लाख मीट्रिक टन चीनी पैदा होती है. हालांकि मौसम, बारिश, बाढ़, गन्ने की उपलब्धता और चीनी मिलों की क्षमता जैसे कारकों के कारण आंकड़े हर साल बदलते रहते हैं. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के अप्रैल 2026 के अनुमान के मुताबिक, पाकिस्तान में 2026/27 सीजन के दौरान चीनी उत्पादन करीब 6.85 मिलियन टन रहने का अनुमान है.

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बता दें कि पाकिस्तान में चीनी उत्पादन के लिए गन्ना मुख्य कच्चा माल है. इसकी खेती का बड़ा हिस्सा पंजाब, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में होता है. देश में गन्ना किसानों से लेकर मिलों, परिवहन और इससे जुड़े दूसरे कारोबारों तक एक बड़ा आर्थिक नेटवर्क इस उद्योग पर निर्भर करता है.

दुनिया में कौन से नंबर पर पाकिस्तान?

वैश्विक चीनी उत्पादन की बात करें तो पाकिस्तान शीर्ष उत्पादक देशों में शामिल है, हालांकि ब्राजील और भारत जैसे देशों से काफी पीछे है. USDA के 2024/25 के आंकड़ों में पाकिस्तान का उत्पादन करीब 6.86 मिलियन टन आंका गया था. इस स्तर के साथ वह दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादकों की लिस्ट में लगभग सातवें-आठवें स्थान के आस-पास रहा है. दुनिया में चीनी उत्पादन के मामले में ब्राजील सबसे आगे है, जबकि भारत भी प्रमुख उत्पादक देशों में शामिल है. इसके बाद चीन, थाईलैंड और अमेरिका जैसे देश महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं. पाकिस्तान की हिस्सेदारी वैश्विक उत्पादन में करीब 3 से 4 प्रतिशत के आस-पास रहती है.

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पाकिस्तान में कितनी चीनी मिलें?

पाकिस्तान के चीनी उद्योग का विस्तार आजादी के बाद काफी तेजी से हुआ है. देश में अब 80 से अधिक चीनी मिलें हैं और इनमें से ज्यादातर गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के आस-पास हैं. यह उद्योग सीधे तौर पर किसानों के अलावा मिल कर्मचारियों, ट्रांसपोर्टरों और अन्य कारोबारों को भी रोजगार देता है.

क्या है पाकिस्तान चीनी कार्टेल विवाद?

पाकिस्तान का चीनी उद्योग लंबे समय से जमाखोरी, कार्टेल और कीमतों में हेरफेर के आरोपों को लेकर विवादों में रहा है. इस क्षेत्र में देश के कारोबारी और राजनीतिक समूहों से करीबी संबंध होने के कारण चीनी की कीमतें महज आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील मुद्दा बन हैं. जब भी चीनी के दाम अचानक बढ़ते हैं, तो चीनी मिलों, स्टॉक रखने वाले कारोबारियों, सरकारी नीतियों और पूरी सप्लाई चेन पर भी सवाल उठने लगते हैं.

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पाकिस्तान क्यों करता है चीनी इंपोर्ट?

पाकिस्तान के चीनी बाजार की सबसे बड़ी समस्या इसकी अस्थिर आपूर्ति व्यवस्था रही है. घरेलू उत्पादन जरूरत से अधिक होता है तो अतिरिक्त चीनी का निर्यात किया जाता है. वहीं, उत्पादन घटने या घरेलू स्टॉक कम होने पर सरकार को आयात की अनुमति देनी पड़ती है. इससे बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ता है. चीनी की कीमतों को लेकर पाकिस्तान में उद्योग पर जमाखोरी, कार्टेल और बाजार में हेरफेर जैसे आरोप भी लगते रहे हैं. यही वजह है कि वहां चीनी केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा भी बनी हुई है. इस तरह करीब 7 मिलियन टन सालाना उत्पादन के बावजूद पाकिस्तान को घरेलू मांग, स्टॉक और कीमतों के बीच संतुलन बनाए रखने में लगातार चुनौती का सामना करना पड़ता है.

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