Ram Mandir Ayodhaya Ram Lala Pran Pratishtha: अयोध्या के ऐतिहासिक राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां जोरो-शोरों से चल रही हैं। 22 जनवरी 2024 को अभिजीत मुहूर्त में रामलला की प्रतिष्ठा राम मंदिर के गर्भगृह में होगी। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से मिली जानकारी के अनुसार, 22 जनवरी को दोपहर 12 बजे से 12.45 बजे के बीच रामलला विराजेंगे। 22 जनवरी को अभिजीत मुहूर्त मृगषिरा नक्षत्र में दोपहर 12:20 बजे का निकला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्राण प्रतिष्ठा करेंगे। वाराणसी के वैदिक पुजारी लक्ष्मी कांत दीक्षित प्राण प्रतिष्ठा समारोह का मुख्य अनुष्ठान करेंगे। PM मोदी के साथ काशी के 21 वैदिक ब्राह्मणों को भी स्पेशल यजमान होंगे। जानिए राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बारे में सब कुछ...  

समारोह की तैयारियां 4 चरणों में शुरू हुई

प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारी 4 चरणों में की जाएगी, जो गत 19 नवंबर से शुरू भी हो गई थीं। पहला फेज 20 दिसंबर तक चलेगा, जिसके तहत समारोह आयोजन की रूपरेखा बनेगी। छोटी-छोटी समितियां बनेंगी। जिला और खंड स्तर पर 10-10 लोगों की टोली बनाकर करीब 250 जगहों पर भेजा जाएगा, जो लोगों से समारोह में आने की अपील करेंगे। एक जनवरी 2024 से दूसरा फेज शुरू होगा, जिसमें देशभर के 10 करोड़ परिवारों को पूजित अक्षत, रामलला के विग्रह का चित्र और एक पत्रक वितरित किया जाएगा। दीपोत्सव की अपील की जाएगी। 22 जनवरी को प्रतिष्ठान के दिन पूरे देश में उत्सव मनाया जाएगा। चौथे चरण में देशभर के भक्तों को रामलला के दर्शन कराए जाएंगे। यह फेज 22 फरवरी 2024 तक चलेगा।  

16 से 22 जनवरी तक क्या प्रोग्राम होंगे?

रामलला का प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान 16 जनवरी से शुरू होगा। 17 जनवरी को रामलला की प्रतिमा अयोध्या नगरी के भ्रमण पर निकलेगी। 18 जनवरी को गणेश, अंबिका पूजन, वरुण पूजन, मातृका पूजन, ब्राह्मण वरण, वास्तु पूजन होगा। रामलला के गर्भ गृह की धुलाई होगी। इसके लिए 81 कलशों में सरयू नदी का जल लाया जाएगा। इसके बाद वास्तु शांति और रामलला का अन्नाधिवास, जलाधिवास और घृताधिवास होगा। 21 जनवरी को 125 कलशों के जल से रामलला की मूर्ति का दिव्य स्नान होगा। इसके बाद शय्याधिवास होगा। 22 जनवरी की दोपहर को 12 से एक बजे के बीच प्राण प्रतिष्ठा होगी। षोडशोपचार पूजन करने के बाद मूर्तियों पर अक्षत छोड़े जाएंगे। पहली महाआरती होगी। अगले दिन 23 जनवरी से श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर सकेंगे।  

समारोह का निमंत्रण किस-किस को दिया गया?

प्राण प्रतिष्ठा समारोह का सबसे पहला निमंत्रण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को, जो यजमान भी होंगे। वे 21 जनवरी को ही अयोध्या पहुंच जाएंगे। 22 जनवरी को सरयू में स्नान करेंगे। नाविकों से मिलेंगे। प्रधानमंत्री मोदी राम मंदिर में दक्षिण दिशा से एंट्री करेंगे। उत्तर दिशा में राम मंदिर में जाएंगे। दरअसल, जब राम वनवास पूरा करके अयोध्या आए तो वे दक्षिण से उत्तर की ओर सफर करते हुए, इसलिए प्रधानमंत्री भी दक्षिण से उत्तर में आएंगे। राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास, काशी विद्वत परिषद, काशी के संतों-महात्माओं को बुलाया गया है, जो 17 जनवरी को अयोध्या पहुंचेंगे।  

समारोह का निमंत्रण इन हस्तियों को मिला

  • लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटिहार, साध्वी ऋतंभरा, उमा भारती, मोहन भागवत, योग गुरु राम देव
  • कपिल देव, बाईचुंग भूटिया, सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली, मैरीकॉम, पीवी सिंधु, पी गोपीचंद, रोहित शर्मा, सुनील गावस्कर, अनिल कुंबले, राहुल द्रविड़
  • अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, आशा भोसले, दीपिका चिखलिया, अरुण गोविल, अक्षय कुमार रतन टाटा, मुकेश अंबानी, गौतम अडाणी
  • वे पत्रकार, जिन्होंने राम मंदिर का सफर पूरा कराया
  • पुजारी, शंकराचार्य, धार्मिक नेता, पूर्व सिविल सेवक, सेवानिवृत न्यायाधीश, वकील, वैज्ञानिक
  • मशहूर कवि, संगीतकार और पद्म पुरस्कार से सम्मानित हस्तियां
 

33 करोड़ देवी-देवताओं स्पेशल Museum बनेगा

अयोध्या में राम मंदिर के साथ श्रद्धालुओं को 33 करोड़ देवी-देवताओं के दर्शन करने को मिलेंगे। इसके लिए सरयू नदी के किनारे 50 एकड़ में स्पेशल म्यूजियम बनाने का प्लान है। देश की प्रसिद्ध वास्तुकार वृंदा सुमाया इसे डिजाइन करेंगी। यह देश के बड़े और प्राचीन मंदिरों के इतिहास, वास्तुकला दिखाएगा और पुण्यगाथा सुनाएगा। सनातन धर्म की मूलभूत अवधारणाओं के दर्शन कराएगा। म्यूजियम CM योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट है। म्यूजियम 12 हिस्सों में विभाजित होगा। वास्तुकार सुमाया और उनकी टीम ने सरयू नदी के किनारे चिह्नित 3 जगहों और रामपुर हलवारा में चिह्नित जगह देखी। इनमें से एक जगह पर म्यूजियम बनेगा। लेटेस्ट खबरों के लिए फॉलो करें News24 का WhatsApp Channel राम मंदिर की विशेषताएं
  • मुख्य प्रवेश द्वार ‘सिंह द्वार’, 12 प्रवेश द्वार
  • राजस्थान से आए ग्रेनाइट पत्थरों से बना
  • कुल 392 स्तंभ, गर्भगृह में 160, प्रथम तल पर 132 स्तंभ
  • मंदिर पर भूकंप का कोई असर नहीं होगा
  • निर्माण में लोहे की रॉड का इस्तेमाल
  • पत्थरों को तांबे के पत्तों से जोड़ा गया
  • मंदिर के अंदर ही 5 मंदिर, पंचदेव मंदिर
  • सूर्य देव मंदिर और विष्णु देवता मंदिर
  • सिंह द्वार के सामने नृत्य मंडप, रंग मंडप और गूढ़ मंडप