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क्या PoK के लोगों को मिल सकती है भारतीय नागरिकता? जानिए क्या कहता है भारतीय कानून

भारत PoK को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है, लेकिन वहां के लोगों को भारतीय नागरिकता खुद से नहीं मिलती है. नागरिकता के लिए उन्हें नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया, दस्तावेजों का सत्यापन और सुरक्षा जांच पूरी करनी होती है. आखिरी फैसला केंद्र सरकार द्वारा लिया जाता है.

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पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) अक्सर भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक चर्चा का विषय बना रहता है. जब भी PoK में बवाल होता है तो लोगों के बीच एक सवाल जरूर पैदा होता है कि क्या पीओके के लोगों को भारत आने पर भारतीय नागरिकता मिल सकती है? तो चलिए जानते हैं कि इसे लेकर भारतीय कानून और नियम क्या कहते हैं.

यदि कोई PoK निवासी भारत की नागरिकता चाहता है, तो उसे नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत तय कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होती है. आवेदन के बाद पहचान, दस्तावेजों और सुरक्षा संबंधी जांच की जाती है, जिसके आधार पर केंद्र सरकार अंतिम फैसला लेती है. इसलिए PoK के लोगों को भारतीय नागरिकता केवल कानून के अनुसार आवेदन और जांच प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही मिल सकती है.

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पीओके को लेकर क्या है भारत का रुख?

भारत सरकार का इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख है. सरकार के अनुसार, PoK का मामला सामान्य विदेशी नागरिकों या इमिग्रेशन से जुड़े मामलों से अलग है, क्योंकि भारत पूरे जम्मू-कश्मीर, जिसमें PoK भी शामिल है, को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है. यही कारण है कि भारत के कानूनी दृष्टिकोण में PoK के मूल निवासियों को सामान्य विदेशी नागरिकों की श्रेणी में नहीं देखा जाता है. हालांकि, भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए उन्हें कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है.

क्या POK के लोगों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करना पड़ता है?

भारत सरकार के अनुसार, केवल PoK का निवासी होने के कारण किसी व्यक्ति को नई नागरिकता लेने के लिए सामान्य विदेशी नागरिकों की तरह आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होती है. इसकी वजह यह है कि भारत पूरे जम्मू-कश्मीर, जिसमें PoK भी शामिल है, को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है. इसलिए PoK के मूल निवासियों को सामान्य विदेशी शरणार्थियों की श्रेणी में नहीं रखा जाता है.

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हालांकि, भारत में नागरिकता से जुड़े अधिकारों का लाभ उठाने के लिए संबंधित व्यक्ति को वैध तरीके से भारत आना होता है. इसके साथ ही उसे अपने निवास और पहचान से जुड़े आवश्यक दस्तावेज पेश करने होते हैं, ताकि संबंधित अधिकारियों द्वारा सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जा सके. इन सभी कानूनी औपचारिकताओं के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय की जाती है.

अगर PoK का कोई निवासी भारत आता है तो क्या प्रक्रिया होती है?

यदि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का कोई व्यक्ति कानूनी रूप से भारत आता है, तो सबसे पहले संबंधित सरकारी एजेंसियां उसकी पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि का सत्यापन करती हैं. इस दौरान यह देखा जाता है कि वह या उसके पूर्वज अविभाजित जम्मू-कश्मीर के निवासी रहे हैं या नहीं.

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सभी जरूरी दस्तावेजों की जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित व्यक्ति को लागू नियमों के अनुसार भारतीय पहचान से जुड़े दस्तावेज और सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है. हालांकि, हर एक मामले में आखिरी फैसला संबंधित अधिकारियों द्वारा कानून और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर लिया जाता है.

यह भी पढ़ें- दुनिया से क्या छिपा रहा पाकिस्तान? PoK विवाद के बीच विदेशी मीडिया पर लगाया सख्त प्रतिबंध, गाइडलाइन जारी

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किन परिस्थितियों में नागरिकता का दावा हो सकता है प्रभावित?

भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9(1) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से किसी दूसरे देश की नागरिकता स्वीकार कर लेता है, तो निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाती है. इस संबंध में अंतिम फैसला सक्षम प्राधिकारी द्वारा उपलब्ध तथ्यों और कानून के आधार पर लिया जाता है.

सरकार के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से पाकिस्तान का पासपोर्ट बनवाता है या आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान की नागरिकता स्वीकार करता है, तो इसका असर भारतीय नागरिकता के उसके दावे पर पड़ सकता है. हालांकि, हर मामले की अलग-अलग जांच की जाती है और फैसला नागरिकता अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार लिया जाता है.

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1947, 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान संघर्षों के दौरान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से हजारों परिवार जम्मू-कश्मीर के भारतीय हिस्से में आकर बस गए थे. इन परिवारों को विस्थापित नागरिकों के रूप में मान्यता दी गई और समय के साथ उन्हें कानून के तहत मिलने वाले अधिकार भी दिए गए. साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से जुड़े संवैधानिक बदलावों के बाद भी ऐसे पात्र परिवारों को अन्य योग्य निवासियों की तरह कानूनी अधिकार और सरकारी सुविधाएं मिलती रही हैं.

क्या PoK के लोगों पर CAA लागू होता है?

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए कुछ धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों को भारतीय नागरिकता पाने का विशेष प्रावधान देता है, बशर्ते वे तय समय-सीमा से पहले भारत आ चुके हों.

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हालांकि, PoK के लोगों की स्थिति इससे अलग मानी जाती है. भारत सरकार का कहना है कि चूंकि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है, इसलिए वहां के मूल निवासियों को किसी दूसरे देश से आए विदेशी शरणार्थी के रूप में नहीं देखा जाता. इसी कारण PoK के निवासियों के लिए भारतीय नागरिकता का मामला CAA के दायरे में नहीं आता, बल्कि उससे संबंधित प्रक्रिया अलग कानूनी प्रावधानों के तहत तय की जाती है.

First published on: Aug 07, 2026 02:18 PM

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