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हूती लड़ाकों को कहां से मिलती हैं फंडिंग, उनके पास कौन-कौन से हथियार?

हूतियों ने हाल ही में सऊदी अरब पर ताबड़तोड़ अटैक किए हैं. ऐसे में अब सवाल ये उठ रहे हैं कि हूती लड़ाके किसके दम पर उछल रहे हैं, कहां से उन्हें पैसा मिल रहा है और उनके पास कौन-कौन से हथियार हैं.

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हूती लड़ाकों को कहां से मिलती हैं फंडिंग? (Photo: AI)

यमन के हूती लड़ाकों और सऊदी अरब के बीच तनातनी लगातार जारी है. हूतियों ने सऊदी के शहरों पर मिसाइलों और ड्रोनों से ताबड़तोड़ हमले किए, जिसके जवाब में सऊदी एयरफोर्स ने भी यमन में हूतियों के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की. हूतियों ने हाल ही में ये दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के F-15 फाइटर जेट को निशाना बनाया है. ऐसे में अब सवाल ये उठ रहे हैं कि हूती लड़ाके किसके दम पर उछल रहे हैं, कहां से उन्हें पैसा मिल रहा है और उनके पास कौन-कौन से हथियार हैं. चलिए हम आपको इन सभी सवालों का सिलसिलेवार तरीके से जवाब देते हैं.

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कहां से आती है फंडिंग?

हूती लड़ाकों का सबसे बड़ा समर्थक है- ईरान. हूती संगठन शिया मुस्लिमों के जैदी संप्रदाय से जुड़ा है, जिसे ईरान हर तरह से सपोर्ट देता है. हूती संगठन को ईरान की तरह से हर साल करोड़ों डॉलर कैश में भेजता है ताकि वो अपने लड़ाकों को पाल सके. इसके अलावा ईरान उन्हें भारी मात्रा में कच्चा तेल फ्री में या बहुत कम दाम में देता है, जिसे हूती इंटरनेशनल ब्लैक मार्केट में बेचकर अरबों रुपये छापते हैं. वहीं, यमन के सबसे अहम पोर्ट होदेइदा पर हूतियों का कब्जा है, जिससे उनकी मोटी कमाई होती हैं. हूती यहां आने वाले हर जहाज से जबरदस्ती टैक्स वसूलते हैं.

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हूतियों के पास कौन-कौन से घातक हथियार?

हूती लड़ाके इस वक्त बेहद खतरनाक हैं, इसकी वजह है उनके पास मौजूद घातक हथियार. शुरुआत में हूतियों के पास सिर्फ पुरानी AK-47 बंदूकें थीं, लेकिन आज उनके पास मिसाइलों और ड्रोन्स का खजाना है. जानकारी के मुताबिक, ईरान अलग-अलग स्पेयर पार्ट्स के तौर पर समंदर के रास्ते इन्हें यमन ट्रांसपोर्ट करता है, जिन्हें हूती इंजीनियर वहां असेंबल करते हैं. हूतियों के पास Burkan-3 और Quds सीरीज की क्रूज मिसाइलें हैं, जो 1500 से 2000 किलोमीटर तक निशाना बना सकती हैं. इन्हीं मिसाइलों के जरिए हूती लड़ाके यमन में बैठे-बैठे इजरायल के शहरों पर हमला कर रहे हैं.

समंदर में कैसे करते हैं अटैक?

समुद्र में चलते जहाजों को निशाना बनाने के लिए हूती लड़ाके सय्यज और अल-मंदब जैसी खतरनाक मिसाइलों से अटैक करते हैं. इन मिसाइलों की खासियत है कि ये रडार को चकमा देकर अपने टारगेट पर वार करती हैं. हूतियों के पास Samad-3 और Waid जैसे ड्रोन हैं, जो सस्ते भी हैं और बेहद घातक भी. ये ड्रोन हवा में घूमते हुए सीधे अमेरिकी वॉरशिप या व्यापारिक जहाजों से टकराकर तबाही मचा देते हैं. इसके अलावा, हूती लड़ाके बाकी जहाजों को निशाना बनाने के लिए रिमोट कंट्रोल नावों में भारी विस्फोटक भरकर उन्हें समुद्र में छोड़ देते हैं. ये नाव बाकी जहाजों से टकराकर उन्हें डुबो देती है.

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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