गुरुवार को लोकसभा में टैक्सेशन एंड अंदर लॉज अमेंडमेंट बिल पास हुआ. इस बिल को लाने के पीछे सरकार का मकसद है कि भारत विदेशी निवेश, फैक्ट्रियों और विदेशी फंड मैनेजर्स के लिए ज्यादा आकर्षक बने. हालांकि, ये विधेयक आम जनता पर भी असर डालेगा. आइए इस बिल के बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं.
UPI पेमेंट पर क्या असर पड़ेगा?
जब भी कोई UPI पेमेंट करने के लिए टैप करता है या RuPay कार्ड स्वाइप करता है, जो दुकानदार से बैंक किसी तरह का एक्सट्रा चार्ज नहीं मांगता. एक नियम के मुताबिक, बैंक और पेमेंट कंपनियां ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR चार्ज नहीं ले सकतीं. साल 2020 में UPI से ये चार्ज हटा दिया गया, जिसके बाद लोग तेजी से इसका इस्तेमाल करने लगे. कर संशोधन बिल लागू होने के बाद सरकार ये फैसला ले सकती है कि वो चाहे तो ये चार्ज दोबारा लागू हो सकता है. आने वाले समय में दुकानदारों को UPI पेमेंट लेने के लिए कुछ फीस देनी पड़ सकती है. कई बार दुकानदार जानबूझकर इस तरह के चार्ज ग्राहक पर डाल देते हैं. जानकारी के मुताबिक, ऐसा हो सकता है कि सिर्फ बड़ी UPI पेमेंट्स के लिए ही दुकानदारों को एक्सट्रा चार्ज देना पड़े. यही वजह है कि छोटे वेंडर्स जैसे कि सब्जी वाले या चाय बेचने वालों पर इस बिल का कुछ खास असर नहीं पड़ेगा.
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विदेशी निवेशकों को करेगा आकर्षित
इस बिल का खास मकसद है कि विदेशी निवेशक भारत की तरफ आकर्षित हो. फंड मैनेजर्स के लिए ये बिल काफी खास है. पहले विदेश में रहने वाले किसी भी फंड मैनेजर के लिए भारत आना बेहद मुश्किल होता था, उसे काफी सारे नियमों का पालन करना पड़ता था. अगर वो अचानक भारत आए तो उसपर टैक्स लग सकता था. कर संशोधन बिल के आने से नियमों की लिस्ट काफी हद तक छोटी कर दी गई है, ताकि किसी भी फंड मैनेजर के लिए भारत आना आसान हो. विदेशी फंड मैनेजर्स के भारत आने से नौकरियां बढ़ेंगी और इंडियन मार्केट में पैसा भी ज्यादा आएगा. टैक्स अमेंडमेंट बिल के आने से REIT यानी रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट या InvIT (इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) पर टैक्स नहीं लगेगा. अगर किसी ने म्यूचुअल फंड या डीमैट अकाउंट के ज़रिए REIT या InvIT पर इन्वेस्ट किया तो, तो डिविडेंड टैक्स फ्री रहेगा.
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इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वालों के लिए क्या है खास?
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए ये बिल बेहद खास है. अब कंपनियों को विस्तार करने के लिए ज्यादा वक्त मिलेगा. जो विदेशी कंपनियां इंडिया में फोन, लैपटॉप और टैबलेट बनाने वाली फैक्ट्रियों को मशीनें सप्लाई करती हैं, उन्हें टैक्स में दस साल की और छूट दी जाएगी. कर संशोधन बिल लाने का मकसद है कि देश में ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्रियां शुरू की जाएं ताकि लोगों को नौकरियां मिल सकें. इसके अलावा विदेशी हीरा व्यापारी और भारत में जो क्लाउड कंपनियां डेटा सेंटर चला रही है, उन्हें टैक्स में छूट दी जाएगी.
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