Ethanol in Aviation Fuel: पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग को लेकर देश में लंबे समय से चर्चा हो रही है. अब विमान ईंधन में एथेनॉल के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि कारों में इस्तेमाल होने वाले एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल और विमानों में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की तकनीकी जरूरतें काफी अलग होती हैं.
भारत में पेट्रोल के साथ एथेनॉल मिलाने की व्यवस्था पहले से लागू है. इसका मकसद पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले ईंधन का इस्तेमाल बढ़ाना है. लेकिन विमान का ईंधन बेहद सख्त तकनीकी मानकों के तहत तैयार किया जाता है. ऊंचाई पर बेहद कम तापमान और अलग-अलग परिस्थितियों में इंजन को सुरक्षित तरीके से चलाने के लिए विमान ईंधन की गुणवत्ता और संरचना में मामूली बदलाव भी महत्वपूर्ण हो सकता है.
---विज्ञापन---
क्या सीधे एथेनॉल को ATF में मिलाया जा सकता है?
6 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार ने उन खबरों को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें ATF में एथेनॉल की ब्लेंडिंग की योजना का दावा किया गया था. सरकार ने कहा कि ऐसी कोई योजना विचाराधीन नहीं है.
---विज्ञापन---
नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने गुरुवार (6 अगस्त) को साफ किया कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में इथेनॉल मिलाने की सरकार की कोई योजना नहीं है. उन्होंने कहा कि विमानन सुरक्षा को लेकर गलत जानकारी सामने आने से यात्रियों के बीच बेवजह डर और चिंता का माहौल बनता है.
---विज्ञापन---
मंत्री का यह बयान दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उस दावे के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार ATF में इथेनॉल मिलाने की तैयारी कर रही है. इसके जवाब में नायडू ने स्पष्ट किया कि ATF में इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है.
---विज्ञापन---
SAF और इथेनॉल को एक जैसा न समझें- नायडू
नायडू ने इस मुद्दे पर स्थिति साफ करते हुए कहा कि इथेनॉल और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) दो अलग तरह के ईंधन हैं. इसलिए दोनों को एक ही नजर से नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि SAF अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त एविएशन फ्यूल है. इसे इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) की मान्यता मिली हुई है और कई देशों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है. विमानन क्षेत्र में इस्तेमाल से पहले SAF को कई जरूरी जांच और परीक्षणों से गुजरना पड़ता है. साथ ही, इसे तय अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों को पूरा करना जरूरी होता है.
---विज्ञापन---
एविएशन सेक्टर में होगा SAF का इस्तेमाल?
एविएशन सेक्टर में सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) का इस्तेमाल होगा. इसे एथेनॉल या दूसरे बायोमास से तैयार किया जाता है. इसके लिए इन स्रोतों को एक खास प्रक्रिया के जरिए जेट फ्यूल जैसे हाइड्रोकार्बन में बदला जाता है. वहीं, पेट्रोल में एथेनॉल को सीधे मिलाया जा सकता है, क्योंकि सड़क पर चलने वाले वाहनों के इंजन और विमान के इंजन की जरूरतें अलग-अलग होती है. हालांकि, विमानन क्षेत्र में जैविक और दूसरे वैकल्पिक स्रोतों से तैयार सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) का इस्तेमाल जरूर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
एथेनॉल और SAF में क्या अंतर है?
एथेनॉल एक अल्कोहल आधारित ईंधन है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से पेट्रोल के साथ ब्लेंडिंग में किया जाता है. दूसरी ओर SAF ऐसा विमानन ईंधन है, जिसे अलग-अलग टिकाऊ स्रोतों और तकनीकों के जरिए तैयार किया जा सकता है. इनमें इस्तेमाल होने वाला ईंधन विमान के मौजूदा इंजन और ईंधन प्रणाली के अनुकूल होना जरूरी है. कुछ तकनीकों में एथेनॉल जैसे अल्कोहल को आगे की रासायनिक प्रक्रिया से जेट फ्यूल के लिए उपयुक्त हाइड्रोकार्बन में बदला जा सकता है. सरकार ने यह साफ किया कि कच्चे एथेनॉल को सीधे एविएशन टर्बाइन फ्यूल के साथ नहीं मिलाया जाएगा.
यानी, गाड़ियों में एथेनॉल ब्लेंडिंग और विमानों के लिए SAF का इस्तेमाल दो अलग प्रक्रियाएं हैं. विमानन क्षेत्र में किसी भी वैकल्पिक ईंधन को मंजूरी देने से पहले सुरक्षा, इंजन प्रदर्शन और ईंधन की गुणवत्ता से जुड़े कड़े परीक्षण किए जाते हैं.
सरकार ने ATF के नियमों में क्या बदलाव किया?
पूरे मामले को समझने के लिए सबसे पहले इथेनॉल और SAF के बीच का फर्क जानना जरूरी है. दोनों अलग-अलग तरह के ईंधन हैं. SAF अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विमान ईंधन है, जिसे इस्तेमाल से पहले कड़े सुरक्षा परीक्षणों से गुजरना होता है.
कब शुरू हुआ था विवाद?
इस मुद्दे पर बहस तब छिड़ी जब सरकार ने 17 अप्रैल 2026 में एक अधिसूचना जारी की. जिसमें बताया गया कि ATF से जुड़े पुराने नियमों में बदलाव किया गया है. हालांकि, इस अधिसूचना में कहीं यह नहीं कहा गया है कि विमानों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन में सीधे इथेनॉल मिलाया जाएगा. सरकार ने असल में ATF के नियमों का दायरा बढ़ाया है. अब तय मानकों के मुताबिक SAF के साथ मिश्रित ATF को भी इन नियमों के तहत मान्यता मिलेगी. यानी बदलाव का मकसद प्रमाणित SAF के इस्तेमाल का रास्ता साफ करना है, न कि विमान के ईंधन में सीधे इथेनॉल मिलाना.
एथेनॉल से कैसे तैयार होता है जेट फ्यूल?
एथेनॉल को सीधे विमान के फ्यूल में नहीं डाला जाता है. इसे पहले एक खास रासायनिक प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जिसे Alcohol to Jet या Ethanol to Jet तकनीक कहा जाता है. इस प्रक्रिया के दौरान एथेनॉल की संरचना बदल जाती है और इसे जेट फ्यूल जैसे हाइड्रोकार्बन में बदला जाता है. तैयार होने वाला यही ईंधन सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) कहलाता है. यानी पेट्रोल में मिलाए जाने वाले एथेनॉल और विमानन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले SAF में बड़ा अंतर है. पेट्रोल में एथेनॉल अपनी मूल अवस्था में मौजूद रहता है, जबकि SAF बनाने के दौरान एथेनॉल को पहले ही एक अलग ईंधन में बदला जा चुका होता है.
विमान में SAF कितना सुरक्षित है?
सरकार के मुताबिक, SAF को विमान में इस्तेमाल करने से पहले कड़े सुरक्षा मानकों और कई जरूरी परीक्षणों से गुजरना पड़ता है. ICAO और ASTM जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से तय मानकों के तहत मंजूरी मिलने के बाद ही इसे विमानन ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. बिना जरूरी परीक्षण और प्रमाणन के किसी भी SAF को विमान के ईंधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.