18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली में आज हो रहा है. दो दिन तक चलने वाले इस समिट में कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. शुरुआत में ब्रिक्स में सिर्फ 4 सदस्य शामिल थे, जो बाद में बढ़कर 5 हो गए. इनमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका थे. आज 20 साल बाद ब्रिक्स में 11 स्थायी सदस्य देश हैं और 10 सहयोगी सदस्य हैं. 2024 में विस्तार के बाद से ब्रिक्स में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को शामिल किया गया.
ये भी पढ़ें: ‘मतभेदों को सुलझाएं, मित्रता बनाए रखें’, BRICS समिट में PM मोदी और जिनपिंग की वार्ता से पहले बोला चीन
कैसे बढ़ा कुनबा?
2025 में इंडोनेशिया भी इनके साथ मिल गया. बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले साल ब्रिक्स के साझेदार देश बने. शुरुआत में इसका नाम BRIC था, लेकिन 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद ये BRICS बन गया. 2012 में भारत ने नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट की मेजबानी की. इस बार नई दिल्ली में चौथी बार ब्रिक्स का आयोजन हो रहा है. भारत अब सिर्फ ऐसा देश नहीं है जो इस ग्रुप में अपनी जगह को सही साबित करने की कोशिश कर रहा हो. अब भारत एक तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है.
क्यों अहम है ब्रिक्स सम्मेलन?
ब्रिक्स ग्रुप अब दुनिया की आबादी और अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है. ये सिर्फ एक नाम से आगे बढ़कर, उभरते और विकासशील देशों के लिए एक बड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक मंच बन गया है. इस विस्तार ने BRICS में भारत की स्थिति को और भी अहम बना दिया है. भारत नहीं चाहता कि ब्रिक्स को पश्चिमी देशों के खिलाफ किसी गठबंधन की तरह पेश किया जाए. इसके बजाय नई दिल्ली ने हमेशा से ब्रिक्स को एक मंच के तौर पर ऐसे दिखाया है, जहां अलग-अलग राजनीतिक सिस्टम और विदेश नीति की प्राथमिकताओं वाले देश विकास से जुड़ी आम चुनौतियों पर मिलकर काम कर सकें. युद्ध, प्रतिबंध, संरक्षणवाद और जरूरी सप्लाई चेन में रुकावटों की वजह से ग्लोबल ट्रेड पर खतरा बढ़ता जा रहा है. नई दिल्ली का मकसद व्यापार को ज्यादा अनुमानित बनाना और जरूरी सामान, टेक्नोलॉजी और कच्चे माल के रिसोर्स में डायवर्सिटी लाना है.
क्या है मकसद?
फाइनेंशियल सपोर्ट भारत के ब्रिक्स सम्मेलन का एक और अहम हिस्सा है. इस ग्रुप ने पुराने वक्त से चले आ रहे फाइनेंशियल तरीकों पर निर्भरता कम करने और नेशनल करेंसी के ज्यादा इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर चर्चा की हैं. 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट, फिनटेक और डिजिटल फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास तौर पर विचार-विमर्श हो सकता है. वहीं भारत के लिए बड़ा मकसद ये है कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं सिर्फ दूसरी जगहों पर विकसित टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ना करें, बल्कि वो नियम तय करने और टेक्नोलॉजी बनाने में भी हिस्सा लें.
ये भी पढ़ें: ब्रिक्स समिट में VIP मूवमेंट को लेकर बड़ा बदलाव, एक ही बस में सफर करेंगे मुख्यमंत्री और मंत्री
संबंधित खबरें
किन्हें दिया जाता है नोबेल पुरस्कार, अब तक कितने भारतीयों को मिला ये अवॉर्ड
2 hrs agoटैक्स अधिकारियों की अरेस्ट पावर क्यों खत्म करना चाहती है केंद्र सरकार?
6 hrs agoक्या है अमेरिका का वीजा बॉन्ड और 50 देशों पर क्यों हुआ लागू ? भारत को छूट
1 day agoक्यों हुई अजय राय की छुट्टी, कैसे मिली आराधना को UP की कमान?
2 days agoकांग्रेस की स्ट्रेटेजी : UP में क्यों खेला 40 साल पुराना 'ट्रिपल कार्ड'?
2 days agoचाकू, कांटा, चम्मच और कुल्हाड़ी... विमान में क्यों जरूरी हैं हथियार?
4 days agoITMS क्या है? मोदी सरकार का ये तोहफा दिल्लीवालों के लिए कैसे बनेगा वरदान
5 days ago'अल नीनो' क्या है, जो बदल सकता है वर्ल्ड क्लाइमेट, भारत पर कैसा होगा असर?
5 days agoSIR प्रक्रिया में क्या सॉफ्टवेयर खुद वोटर लिस्ट से हटा सकता है आपका नाम?
5 days agoFIR और NCR में क्या फर्क है? जानिए कैसे होती है कार्रवाई
6 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines