इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) के अरेस्ट वारंट के साए में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू गुरुवार को अमेरिका के न्यूयॉर्क पहुंचे. वे यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करने आए थे और शहर में 8 घंटे से भी कम समय बिताकर उसी दिन वापस रवाना हो गए. सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि उनका विमान उन तीन यूरोपीय देशों ग्रीस, इटली और फ्रांस के एयरस्पेस से होकर गुजरा, जो अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत उन्हें गिरफ्तार करने के लिए बाध्य हैं. फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, ये तीनों देश ‘रोम संधि’ का हिस्सा हैं, जिसके तहत दुनिया के 125 देश अपनी जमीन पर ICC के आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं.
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हालांकि, फ्रांस ने साफ किया कि सिर्फ एयरस्पेस से उड़ान की मंजूरी देना किसी अंतरराष्ट्रीय नियम का उल्लंघन नहीं है. वहीं अमेरिका रोम संधि का सदस्य ही नहीं है. न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी, जिन्होंने नेतन्याहू को गिरफ्तार करने के वादे पर प्रचार किया था, पहले ही मान चुके थे कि उनके पास ऐसा करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है.
UNGA में तीखा भाषण, दर्जनों राजनयिकों का वॉकआउट
नेतन्याहू सुबह करीब 9 बजे न्यूयॉर्क पहुंचे और UNGA में 40 मिनट का आक्रामक भाषण दिया. उनके मंच पर आते ही दर्जनों देशों के प्रतिनिधि सभा से बाहर चले गए. इस पर नेतन्याहू ने वॉकआउट करने वालों को ‘नैतिक कायर’ करार दिया और गाजा में नरसंहार के आरोपों को “सदी का सबसे बड़ा झूठ” बताया. इस पर पलटवार करते हुए ममदानी ने कहा कि कोई भी झूठ इस सच्चाई को नहीं बदल सकता कि नेतन्याहू पर युद्ध अपराधों के आरोप में गिरफ्तारी वारंट जारी है.
क्या है ICC वारंट का पूरा मामला?
7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुए युद्ध के मद्देनजर ICC ने 21 नवंबर 2024 को नेतन्याहू और तत्कालीन रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ वारंट जारी किया था. अदालत ने उन पर भुखमरी को हथियार बनाने और नागरिकों पर हमलों के युद्ध अपराधों का आरोप लगाया है. इजरायल का तर्क है कि उसने कभी रोम संधि को नहीं माना, इसलिए ICC का उस पर कोई अधिकार नहीं है. वहीं ICC का कहना है कि फिलिस्तीन 2015 से उसका सदस्य है, जिसके चलते अदालत को गाजा और वेस्ट बैंक में हुए अपराधों पर सुनवाई का पूरा अधिकार है. फिलहाल इजरायल इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कानूनी लड़ाई लड़ रहा है.
गिरफ्तारी की जिम्मेदारी किसकी है?
ICC के पास अपनी कोई पुलिस या सुरक्षा बल नहीं होता. वारंट जारी होने के बाद किसी संदिग्ध को पकड़ने और उसे हेग स्थित हिरासत केंद्र भेजने के लिए अदालत पूरी तरह से सदस्य देशों की सरकारों पर निर्भर रहती है. रोम संधि से जुड़े 125 देशों के लिए यह कानूनी दायित्व है कि यदि कोई आरोपी उनकी सीमा में पाया जाता है, तो वे उसे गिरफ्तार करें. अमेरिका, इजरायल और भारत इस संधि के सदस्य नहीं हैं. संधि के अनुच्छेद 27 के तहत प्रधानमंत्री या राष्ट्राध्यक्ष जैसे बड़े पद पर होने के बावजूद किसी को कानूनी छूट नहीं मिलती. इसी वजह से नेतन्याहू के लिए कई देशों की यात्रा करना बेहद मुश्किल हो गया है.
फ्रांस के ऊपर से कैसे उड़े नेतन्याहू?
रोम संधि का सदस्य होने के बावजूद फ्रांस ने नेतन्याहू के विमान को अपने आसमान से गुजरने दिया और अपने इस फैसले का बचाव भी किया. फ्रांस के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पास्कल कॉन्फावरेक्स ने साफ किया कि यह फैसला पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत था. फ्रांस का कहना है कि रोम संधि में ऐसा कोई नियम नहीं है जो किसी देश को अपने हवाई क्षेत्र से ऐसे विमान को गुजरने से रोकने के लिए बाध्य करे, जिसमें कोई वॉन्टेड व्यक्ति सवार हो.
कानून का वो पेंच, जिसने बचा लिया
रोम संधि के नियमों के मुताबिक गिरफ्तारी की शर्त तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति किसी देश के जमीनी क्षेत्र में ‘पाया’ जाए. कानून में इस बात का स्पष्ट जिक्र नहीं है कि देश के ऊपर से उड़ने वाला विमान सीमा के दायरे में माना जाएगा या नहीं. हवाई क्षेत्र को लेकर केवल एक ही नियम है- यदि कोई आरोपी पहले से हिरासत में हो और उसे विमान से अदालत ले जाया जा रहा हो. ऐसी स्थिति में अगर विमान किसी देश में आपातकालीन लैंडिंग करता है, तो स्थानीय प्रशासन उसे अदालत के अनुरोध तक 96 घंटे हिरासत में रख सकता है. लेकिन आजाद घूम रहे संदिग्ध के किसी देश के ऊपर से उड़ान भरने पर संधि पूरी तरह खामोश है और इसी कानूनी खामी का फायदा उठाकर नेतन्याहू सुरक्षित निकले. बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर उन्हें न्यूयॉर्क में गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?
अमेरिका पर ICC नियमों की कोई कानूनी बाध्यता नहीं
दरअसल, अमेरिका रोम संधि का हिस्सा नहीं है, जिसके तहत आईसीसी काम करता है. नियमों के अनुसार, अदालत किसी गैर-सदस्य देश से केवल समझौते या तदर्थ व्यवस्था के जरिए ही मदद मांग सकती है. इसके अलावा, आईसीसी संयुक्त राष्ट्र का कोई अंग नहीं है, दोनों के बीच सिर्फ एक सहयोग समझौता भर है.
इतना ही नहीं, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने आईसीसी के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल रखा है. ट्रंप सरकार ने आईसीसी के कर्मचारियों पर वित्तीय प्रतिबंध और वीजा पाबंदियां लगाई हैं. ट्रंप का कहना है कि आईसीसी के खिलाफ यह कदम नेतन्याहू को बचाने के लिए उठाया जा रहा है. ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में देशों से इस अदालत को छोड़ने की अपील करते हुए इसे “भ्रष्ट संस्था” करार दिया, वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे समाप्त करने का अभियान शुरू किया.
यदि सदस्य देश गिरफ्तार न करें तो क्या होता है?
आईसीसी के पास अपनी कोई पुलिस फोर्स नहीं है. यदि कोई सदस्य देश आरोपी को गिरफ्तार नहीं करता, तो अदालत के पास केवल उनका नाम सार्वजनिक करने और मामले को ‘राज्यों की सभा’ को भेजने का अधिकार है. इससे पहले भी सूडान के पूर्व राष्ट्रपति उमर अल-बशीर, व्लादिमीर पुतिन की मंगोलिया यात्रा और नेतन्याहू की हंगरी यात्रा के दौरान ऐसा देखा गया है. हंगरी ने दलील दी थी कि इजरायल पक्षकार नहीं है इसलिए नेतन्याहू को छूट प्राप्त है, लेकिन अदालत ने इसे दायित्वों का उल्लंघन माना. हंगरी ने अदालत छोड़ने का ऐलान किया था, जिसे बाद में 29 मई 2026 को वापस ले लिया गया.