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Explainer: कैसे होती है वोट काउंटिंग, EVM-बैलेट पेपर में अंतर क्या, जानें मतगणना से जुड़े सवालों के जवाब

Election Voting EVM VVPAT Ballot Paper Explainer: देश के 5 राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में 3 दिसंबर दिन रविवार को मतगणना है। 30 नवंबर को जारी हुए एग्जिट पोल के अनुसार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में जहां भाजपा सरकार बना रही है। वहीं छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में कांग्रेस को बहुमत दिया […]

Election Voting EVM VVPAT Ballot Paper Explainer: देश के 5 राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में 3 दिसंबर दिन रविवार को मतगणना है। 30 नवंबर को जारी हुए एग्जिट पोल के अनुसार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में जहां भाजपा सरकार बना रही है। वहीं छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में कांग्रेस को बहुमत दिया जा रहा है। मिजोरम में एक बार फिर मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) सरकार बना रही है, लेकिन फाइनल नतीजे वोट काउंटिंग के बाद ही पता चलेंगे, लेकिन यह वोट काउंटिंग क्या है? कैसे होती है और इसका प्रोसेस क्या है? EVM और बैलेट पेपर में क्या अंतर है? मतगणना केंद्र और स्ट्रॉन्ग रूम क्या होता है, जानिए इस बारे में सब कुछ…

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स्ट्रॉन्ग रूम

मतगणना से पहले बात करते हैं स्ट्रॉन्ग रूम की, जिसमें मतदान से पहले और बाद में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) मशीनों को रखा जाता है। स्ट्रॉन्ग रूम हर वक्त CCTV कैमरों की नजर में रहता है। डबल लॉकिंग के साथ 24 घंटे सुरक्षा कर्मी तैनात रहते। सिक्योरिटी इतनी टाइट होती कि यहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता। स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा थ्री लेयर की होती है। पहली लेयर में CAPF गार्ड होते हैं, जो 24 घंटे तैनात रहते। दूसरी लेयर स्टेट पुलिस की होती है। तीसरी लेयर में डिस्ट्रिक्ट एग्जीक्यूटिव फोर्स के गार्ड होते हैं। इस सुरक्षा को भेदना परिंदे के बस का भी नहीं।

मतगणना केंद्र

वोट काउंटिंग मतगणना केंद्र में होती है। यह एक बड़ा हॉल रूम या कमरा हो सकता है, जहां कड़ी सुरक्षा रहती है। चुनाव अधिकारी, मतगणना कर्मचारी, प्रत्याशी, उनके एजेंट, सुरक्षा कर्मी और अन्य अधिकारी वोटों की गिनती करते हैं। हर विधानसभा या संसदीय क्षेत्र में मतगणना केंद्र बनाए जाते हैं। मगगणना केंद्र से करीब 200 से 500 मीटर की दूरी तक किसी को आने जाने की परमिशन नहीं होती।

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मतगणना की शुरुआत

रिटर्निंग ऑफिसर और असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर मतगणना की गोपनीयता की शपथ लेते हैं। रिटर्निंग ऑफिसर की मौजूदगी में EVM की जांच होती है। चुनाव प्रत्याशी के साथ काउंटिंग या इलेक्शन एजेंट ही काउंटिंग सेंटर के अंदर रह सकते हैं। सभी के बैठने की जगह पहले से तय होती है। पर्यवेक्षकों के अलावा किसी और को मतगणना केंद्र के अंदर मोबाइल इस्तेमाल करने की परमिशन नहीं होती।

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वोटों की गिनती

बूथ के आधार पर वोटों की गिनती होती। रिटर्निंग ऑफिसर की मौजूदगी में सबसे पहले पोस्टल बैलेट काउंटिंग होती है। इसके बाद EVM के वोट काउंट होते हैं। EVM ऑन करके टोटल नंबर वाले बटन यानी रिजल्ट बटन की सील खोली जाती है, जिसके एक एक खास चाकू इस्तेमाल होता है। बटन दबाते ही हर EVM में कैंडिडेट को मिले नंबर्स सामने आ जाते हैं। एक राउंड की गिनती होते ही EVM सील कर दी जाती है। राउंड खत्म होने पर सभी की सहमति ली जाती है। EVM डैमेज होने या VVPAT में पर्चियों में गड़बड़ी होने पर चुनाव आयोग को सूचना दी जाती है। वोटिंग पर आपत्ति जताए जाने पर काउंटिंग दोबारा कराई जाती है। आखिरी फैसला चुनाव अधिकारी का होता है। सभी राउंड की काउंटिंग पूरी होने के बाद फाइनल नतीजे जारी किए जाते हैं।

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पोस्टल बैलेट

पोस्टल बैलेट की शुरुआत 1980 के दशक में हुई। यह एक तरह का पेपर वॉलेट होता है। सैनिक, चुनाव ड्यूटी कर रहे कर्मचारी, देश के बाहर तैनात अधिकारी, दिव्यांग या 80 से अधिक उम्र के वोटर्स मतदान केंद्र पर आकर EVM से वोट नहीं कर पाते। इन्हें सर्विस या अब्सेंट वोटर कहा जाता है। यह वोटर्स पोस्टल बैलेट से वोट डालते हैं, जो पोस्ट के जरिए वोटर के पास भेजे जाते हैं या चुनाव ड्यूटी दे रहे अधिकारी घर जाकर पोस्टल बैलेट से वोट डलवाते हैं। इनकी संख्या पहले से तय होती है। पोस्टल बैलेट सिर्फ उन्हें दिए जाते हैं, जो इसके लिए आवेदन करते हैं। पोस्ट के जरिए ही पोस्टल बैलेट वापस भेज दिए जाते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM)

एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है। इसमें एक Control Unit और दूसरी Voting Unit 5 मीटर की केबल से कनेक्ट होती है। EVM का उपयोग पहली बार वर्ष 1982 में केरल के (70) परूर विधानसभा क्षेत्र में किया गया था। EVM अधिकतम 2 हजार वोट रिकॉर्ड कर सकती है। EVM की अपनी एक मेमोरी होती, जिसमें 10 साल तक वोट सुरक्षित रहते। EVM में बैलेट पेपर नहीं दिया जाता है। कंट्रोल यूनिट प्रभारी बैलेट बटन दबाकर बैलेट जारी करते हैं। इसके बाद वोटर अपने पसंदीदा कैंडिडेट और उसके चुनाव चिह्न के सामने लगे नीले बटन को दबाकर वोट डालता है।

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वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT)

VVPT इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से जुड़ा सिस्टम है, जिससे वोटर चैक कर सकते हैं कि वोट पसंदीदा उम्मीदवार को गया या नहीं। वोट डालने के बाद स्लिप निकलती है, जो 7 सेकेंड के लिए मशीन पर डिस्पले होती है। फिर खुद कट कर VVPT के सीलबंद ड्रॉप बॉक्स में गिर जाती है। VVPT पावर पैक बैटरी पर चलता है।

First published on: Dec 02, 2023 08:49 AM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के IMC&MT इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं Mphil कोर्स किया है। पिछले 12 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रही हैं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के News 24 Hindi डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हैं। यहां खुशबू नेशनल, इंटरनेशनल, लाइव ब्रेकिंग, पॉलिटिक्स, क्राइम, एक्सप्लेनर आदि कवर करती हैं। इससे पहले खुशबू Amar Ujala और Dainik Bhaskar मीडिया हाउस के डिजिटल विंग में काम कर चुकी हैं।

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