रामानंद सागर भारतीय टेलीविजन इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित निर्माता रहे हैं, जिन्होंने 'रामायण' जैसे शोज बनाए. उनके बाद उनके बेटे आनंद सागर ने उनकी विरासत को संभाला और ‘सागर आर्ट्स’ को आगे बढ़ाने का काम किया. अब आनंद सागर भी दुनिया में नहीं रहे. उनका 84 साल की उम्र में निधन हो गया. उनके परिवार ने इस दुखद खबर की पुष्टि की और उनकी मौत की वजह के बारे में बताया. वह 12-15 सालों से एक गंभीर दर्द से जूझ रहे थे.
आनंद सागर का बीते दिन यानी कि 13 फरवरी को निधन हुआ और शाम को ही विले पार्ले स्थित पवन हंस श्मशान घाट पर हिंदू रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. उनकी अंतिम विदाई में मनोरंजन जगत की कई हस्तियां पहुंची थीं. उनकी मौत की खबर से इंडस्ट्री में मातम छा गया.
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आनंद सागर का इंडस्ट्री में योगदान
रामानंद सागर के बाद उनके बेटे आनंद सागर का इंडस्ट्री के इतिहास में अहम योगदान रहा. उन्होंने पिता की विरासत को आधुनिक दुनिया तक पहुंचाने का काम किया था. उन्होंने साल 2008 में 'रामायण' के पुनर्गठन (रीमेक) किया. इसमें गुरमीत चौधरी और देबिना बनर्जी ने राम-सीता की भूमिका निभाई थी. इस पौराणिक कहानी को नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाने में आनंद सागर का अहम योगदान रहा था.
आनंद सागर केवल डायरेक्टर ही नहीं बल्कि निर्माता भी रहे. उन्होंने बतौर निर्माता 'आंखें', 'अरमान' और 'अलिफ लैला' जैसे सक्सेस शो का निर्माण किया. टीवी इंडस्ट्री के इतिहास में पिता रामानंद सागर के बाद उनका अहम योगदान माना जाता है.
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15 सालों से इस दर्द में थे आनंद सागर
बहरहाल, अगर आनंद सागर की मौत के पीछे की वजह के बारे में बात की जाए तो 84 वर्षीय निर्माता गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. परिवार ने उनके निधन की खबर की पुष्टि की और मौत के पीछे की वजह के बारे में बात करते हुए बताया कि पिछले 12-15 सालों से वह पार्किंसन डिजीज (Parkinson’s Disease) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. ये एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी थी.
क्या है पार्किंसन डिजीज?
इसके अलावा अगर पार्किंसन डिजीज के बारे में बात की जाए तो ये एक ऐसी बीमारी है, जो दिमाग की नसों (न्यूरॉन्स) के धीरे-धीरे खराब होने या मरने के कारण होती है. इस बीमारी की वजह से शरीर में कंपन, मांसपेशियों में अकड़न और संतुलन बनाने में कठिनाई होती है. यह पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित करती है.