हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

Toxic Movie Review: यश का दमदार अंदाज, बड़े एक्शन के बीच कहानी में छिपे हैं कई राज

Toxic Movie Review: यश की ‘टॉक्सिक’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. फिल्म में यश के साथ 5 एक्ट्रेसेस एक्शन सीन्स करती नजर आ रही हैं. वहीं फिल्म का पहला रिव्यू भी सामने आ गया है. चलिए जानते हैं यश की ‘टॉक्सिक’ की कहानी कैसी है.

विज्ञापन
(Pic Credit- Instagram) यश की 'टॉक्सिक' फिल्म सिनेमाघरों में हुई रिलीज

Movie name: ‘टॉक्सिक’

Director: गीतू मोहनदास

Moview Casts: यश, कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरेशी, तारा सुतारिया, रुक्मिणी वसंत

★★★★★

Toxic Movie Review: ‘टॉक्सिक’ को सिर्फ एक एक्शन ड्रामा फिल्म कहना इसके साथ नाइंसाफी होगी. फिल्म एक ऐसी दुनिया में ले जाती है, जहां अपराध और ताकत के साथ प्यार, परिवार, वफादारी और रिश्तों की अपनी लड़ाई भी चलती है. गीतू मोहनदास ने कहानी को बड़े कैनवास पर रखा है, लेकिन इसके बीच इंसानी भावनाओं को भी जगह दी है. शानदार विजुअल्स, बड़े एक्शन और धीरे-धीरे खुलती कहानी मिलकर ‘टॉक्सिक’ को एक ऐसी फेयरी टेल बनाते हैं, जो बच्चों के लिए नहीं, बल्कि ग्रोन-अप ऑडियंस के लिए है.

कहानी

‘टॉक्सिक’ की दुनिया में कदम रखते ही सबसे पहले सामना होता है राया से, जो अपराध की उस दुनिया का हिस्सा है जहां रिश्तों से ज्यादा ताकत और वफादारी की कीमत है. लेकिन कहानी सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रहती. उसके बेटे टिकट की एंट्री के साथ फिल्म का इमोशनल पक्ष सामने आता है और धीरे-धीरे राया की जिंदगी से जुड़े रिश्तों की कई अनकही बातें खुलती हैं. गंगा और नादिया भी कहानी को आगे बढ़ाते हुए इसे सिर्फ एक क्राइम ड्रामा बनने से बचाती हैं. फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, प्यार, परिवार, बदला और अपने लोगों के लिए लड़ने की भावना इसके साथ जुड़ती जाती है. पहले जहां कहानी एक गैंगस्टर की दुनिया दिखाती है, वहीं बाद में यह ज्यादा असल, हिंसक और खतरनाक हो जाती है. और जब लगता है कि कहानी की सारी परतें समझ आ चुकी हैं, तब क्लाइमैक्स एक ऐसा मोड़ लेकर आता है जो पूरी कहानी को नए नजरिए से देखने पर मजबूर कर देता है.

यश फिल्म में राया और उसके बेटे टिकट, दोनों किरदारों में नजर आते हैं और यही डबल रोल कहानी को एक अलग दिलचस्पी देता है. राया का अंदाज जहां खतरनाक, दमदार और गैंगस्टर वाली दुनिया से जुड़ा है, वहीं टिकट के किरदार में यश का एक अलग और ज्यादा इमोशनल रूप देखने को मिलता है. दोनों की बॉडी लैंग्वेज से लेकर उनकी एनर्जी तक में फर्क रखा गया है. कहानी आगे बढ़ने के साथ इन दोनों किरदारों की अलग-अलग परतें खुलती हैं, जिससे यश की परफॉर्मेंस और उनका डबल रोल दोनों ज्यादा असरदार लगते हैं.

विज्ञापन

यह भी पढ़ें: Toxic के हिंदी वर्जन पर सख्त हुआ सेंसर बोर्ड, फिल्म की रिलीज से 1 दिन पहले क्या-क्या बदलने के दिए आदेश?

सपोर्टिंग कास्ट

फिल्म की सपोर्टिंग कास्ट भी कहानी को मजबूती देने में पीछे नहीं रहती. नयनतारा गंगा के किरदार में कहानी का इमोशनल पक्ष सामने लाती हैं, जबकि कियारा आडवाणी की नादिया में एक अलग तरह की मासूमियत और संवेदनशीलता नजर आती है. हुमा कुरैशी एलिजाबेथ के किरदार में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराती हैं और रुक्मिणी वसंत मेलिसा बनकर चौंकाती हैं. उनका किरदार ज्यादा शोर नहीं करता, लेकिन जब भी स्क्रीन पर आता है, अपनी छाप छोड़ जाता है. इसके अलावा तारा सुतारिया, अक्षय ओबेरॉय, डैरेल डी’सिल्वा और सुदेव नायर भी अपने-अपने किरदारों के साथ फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाते हैं. इन सभी की मौजूदगी मिलकर ‘टॉक्सिक’ की दुनिया को सिर्फ यश की कहानी न बनाकर कई किरदारों की कहानी बना देती है.

विज्ञापन

पहला हाफ

फिल्म का पहला हिस्सा दर्शकों को अपनी दुनिया में धीरे-धीरे खींचता है. यहां मास अपील के साथ कहानी, किरदार और उनके रिश्तों पर भी ध्यान दिया गया है. गीतू मोहनदास जल्दबाजी नहीं करते और एक्शन ड्रामा को समझने का पूरा वक्त देते हैं. इसी बिल्डअप के बाद इंटरवल में ऐसा बड़ा सीक्वेंस आता है, जो फिल्म को अगले हिस्से के लिए पूरी तरह तैयार कर देता है और मन में यही सवाल छोड़ता है कि अब आगे क्या होगा.

सेकंड हाफ में बदला अंदाज

इसके बाद सेकंड हाफ में ‘टॉक्सिक’ का अंदाज पूरी तरह बदल जाता है. एक्शन का लेवल बढ़ता है, सीक्वेंस ज्यादा हिंसक और इंटेंस हो जाते हैं और कहानी भी ज्यादा असल फील देने लगती है. फिल्म का बड़ा स्केल यहां खुलकर सामने आता है, लेकिन सिर्फ भव्यता ही इसकी खासियत नहीं है. एक्शन में दिखने वाली असल एनर्जी और उसकी इंटेंसिटी ही सेकंड हाफ को ज्यादा असरदार बनाती है.

विज्ञापन

क्लाइमैक्स

कहानी जैसे ही एक तय दिशा में जाती हुई नजर आती है, ‘टॉक्सिक’ अचानक अपना रास्ता बदल देती है। क्लाइमैक्स में ऐसा मोड़ आता है, जिसकी आसानी से उम्मीद नहीं की जा सकती. यह ट्विस्ट सिर्फ कहानी को आगे नहीं बढ़ाता, बल्कि पहले से दिखाई गई कई चीजों को एक नए नजरिए से देखने का मौका भी देता है. फिल्म खत्म होने के बाद भी इसके कई हिस्से दिमाग में घूमते रहते हैं. फिनाले की खासियत सिर्फ बड़े एक्शन में नहीं, बल्कि उस असर में है जो थिएटर से बाहर आने के बाद भी बना रहता है.

यह भी पढ़ें: Toxic Advance Booking: यश की ‘टॉक्सिक’ का रिलीज से पहले ही जलवा! एडवांस बुकिंग में कर डाली करोड़ों की कमाई

विज्ञापन

गीतू मोहनदास ने ‘टॉक्सिक’ को सिर्फ एक सीधी एक्शन ड्रामा तक सीमित नहीं रखा है. उन्होंने फिल्म की दुनिया को काफी बड़ा रखा है, जहां कहानी के साथ-साथ हर किरदार की अपनी सोच, मकसद और सफर भी देखने को मिलता है. फिल्म हर बात को तुरंत खोलकर सामने नहीं रखती, बल्कि धीरे-धीरे कई राज और कनेक्शन सामने आते हैं. यही तरीका दर्शकों को कहानी के साथ जोड़े रखता है और उन्हें खुद अलग-अलग हिस्सों को समझने और जोड़ने का मौका देता है.

फाइनल वर्डिक्ट

‘टॉक्सिक’ उन दर्शकों के लिए है जिन्हें सिर्फ कहानी नहीं, बल्कि एक पूरा सिनेमाई अनुभव चाहिए. यश का अलग अंदाज, गैंगस्टर वर्ल्ड, रिश्तों की उलझन, इमोशन और बड़े एक्शन सीक्वेंस फिल्म को लगातार दिलचस्प बनाए रखते हैं. कहानी हर मोड़ पर कुछ नया सामने लाती है और जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, इसका असर भी बढ़ता जाता है. अगर आप कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो खत्म होने के बाद भी आपके दिमाग में चलता रहे, तो ‘टॉक्सिक’ को मौका दिया जा सकता है.

विज्ञापन

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola