Vandana Saini
मेरा नाम वंदना सैनी है। मैं पिछले सात साल से मीडिया से जुड़ी हुई हूं और India News, Patrika जैसे संस्थानों के साथ काम कर चुकी हूं। अब मैं News24 के साथ काम कर रही हूं।
Read MoreAvnish By Salman Khan 35 Years: 35 साल से आप देख रहे हैं हेटर्स कहेंगे कि झेल रहे हैं और फैंस कहेंगे कि दिल से लगाकर जी रहे हैं, लेकिन सच ये है कि सलमान ख़ान (Salman Khan) जैसा स्टारडम हिंदी सिनेमा ने देखा नहीं है। बिना लॉजिक के भाई के स्वैग पर थियेटर में पैसा उड़ाने वाली जमात है। वो कुछ भी नहीं देखती बस देखती है, तो कि भाई है, रोमांस है, एक्शन है और स्वैग है तो फिर कुछ पूछना ही नहीं है। ये स्टारडम अगर पूरे इंडियन सिनेमा में किसी को अब तक हासिल हुआ है तो वो हैं केवल थलाईवा रजनीकांत। फिल्म ‘बीवी हो तो ऐसी’ को 35 साल हो गए हैं, जिसमें नौजवान विक्की, माइकल जैक्सन के गानों पर अपने कमरे के बेड पर कूदता रहता है और इसी को कूल समझता है।
फ़ारुख़ शेख़ (Farooq Shaikh) और रेखा (Rekha) की इस फिल्म को तो उतनी कामयाबी नहीं मिली, लेकिन सलमान के लिए ये उनकी पहली फिल्म के तौर पर तारीख़ में दर्ज़ हो गई। उस फिल्म को देखकर किसी को क्या, सलमान को भी अंदाज़ा नहीं था कि वो हिंदी सिनेमा में कोई ढंग का मुकाम बना पाएंगें।
सलमान की पहली हीरो वाली फिल्म यानि सूरज बड़जात्या की राजश्री प्रोडक्शन के बैनर में बनने वाली ‘मैने प्यार किया’ के रिलीज होने के एक साल पहले ही। आमिर खान (Aamir Khan) ‘कयामत से कयामत’ तक के साथ स्टार बन चुके थे। शाहरुख़ खान (Shah Rukh Khan) के फिल्म इंडस्ट्री में पैर रखने में अभी भी देरी थी। “दोस्ती में नो सॉरी, नो थैक्यू” डायलॉग के साथ सलमान ने साल 1989 में जो धमाका किया था।
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उसने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को एंग्री यंग मैन देने वाले सलीम ख़ान (Salim Khan) के साहबजादे को नई जेनेरेशन का आईकन बना दिया। हां… ये बात अलग थी सलमान को ये ब्रेक दिलाने में सलीम साहब ने सिफारिश के लिए उंगली तक नहीं उठाई थी। खैर, इसके बाद सलमान ने ‘बाग़ी’, ‘सनम बेवफ़ा’ जैसी एवरेज फिल्में की, संजय दत्त और माधुरी के साथ उनकी फिल्म साजन भी ख़ूब चली, लेकिन इसके साथ बाग़ी सूर्यवंशी, चंद्रमुखी जैसी फ्लॉप फिल्मों का दौर भी जारी है।
सूरज बड़जात्या ने सलमान खान (Salman Khan) को एक बार फिर ‘प्रेम’ बनाया और 5 साल बाद फिल्म बनाई ‘हम आपके हैं कौन’ पहली नजर में इस फिल्म को तब क्रिटिक्स ने शादी का वीडियो करार दिया, जिसमें लड़का-लड़की को मिलाने से लेकर, मेहंदी, संगीत, शादी, जूता चोरी, मुंह दिखाई सब थी।
मगर इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया, हिंदुस्तान के थियेटर्स ने पहली बार फैमिली ऑडियंस को इससे पहले भर-भर के सिर्फ़ जय संतोषी मां के लिए जाते देखा था। बड़जात्या सलमान को प्रेम बनाते पेश कर रहे थे और रीयल लाइफ़ में सलमान की इमेज बैड ब्वॉय की बनती जा रही थी।
आमिर के साथ अंदाज़ अपना-अपना और शाहरुख़ के साथ ‘करण-अर्जुन’ जैसी फिल्में करने के साथ सलमान ने ये भी जाता दिया था, कि ये स्टार बिल्कुल भी इनसिक्योर नहीं है। आमिर और शाहरुख़ ने भी माना था कि सलमान का औरा, उनकी शख़्सियत में ही सुपरस्टार वाली बात है।
हांलाकि, सलमान फैमिली, एक्शन, फैंटेंसी, रोमांस, मसाला हर तरह की फिल्में करते रहे हैं, लेकिन इस सुपरस्टार पर आप ये दाग़ नहीं लगा सकतें कि उन्होने कुछ हटकर करने की कोशिश नहीं की। भंसाली के साथ ख़ामोशी, रेवती के साथ फिर मिलेंगे जैसी फिल्में भी सलमान ने की, जिसकी लोगों ने तारीफ़ें तो खूब की, लेकिन देखने के लिए थियेटर नहीं गए।
हांलाकि, ‘प्यार किया तो डरना क्या’ जैसी ख़ूबसूरत रोमांटिक फिल्म के साथ सलमान ने ‘बीवी नंबर-1’ और ‘जुड़वा’ जैसी कॉमेडी फिल्में भी ख़ूब करते रहें। सनी से दोस्ती के लिए सलमान ने जीत में एक्सटेंडेड कैमियो किया, तो संजय दत्त (Sanjay Dutt) के साथ चल मेरे भाई, जैसी श्रॉफ़ की बंधन भी उनकी दोस्ती वाली मिसाल ही है।
सलमान की ऑन स्क्रीन इमेज, पर उनकी ऑफ़ स्क्रीन पर्सेनैलिटी हमेशा भारी रही, हांलाकि मौका मिलते ही सलमान ने अपना स्वैग छोड़ा। भंसाली की फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ और फिर ‘बागबां’ में सलमान के किरदार गवाही देते हैंकि सलमान ने ऐसे एक्सपेरीमेंट भी खूब किए हैं, जिन्हे तब कोई भी सुपरस्टार करने को तैयार नहीं होता।
डबल हीरो वाली फिल्में करने से भी सलमान को गुरेज़ नहीं रहा ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘हम तुम्हारे हैं सनम’, ‘जानेमन’, ‘पार्टनर’ जैसी फिल्में दोस्ती और दोस्तों के लिए की। कैमियो करने में भी सलमान, भंसाली के लिए ‘सांवरिया’ के नीले रंग में रंग गए, लेकिन एक दौर ऐसा भी आया, जब सलमान ने बैक टू बैक 9 फिल्में फ्लॉप दी।
‘बाबुल’ से शुरु हुआ ये सिलसिला ‘युवराज़’ तक चला। ऐसे में सलमान ने प्रभुदेवा का साथ लिया साउथ की रीमेक ‘वॉन्टेड’ के साथ एक्शन, डान्स और स्वैग को नई धार दी। उसके बाद सलमान ने इसे अपना ट्रेडमार्क बना लिया। ‘टाइगर’ सीरीज़ भी भाई की इस भाईगिरी के फॉर्मुले के सक्सेस की गवाही देते हैं।
कुछ हटके ‘बजरंगी भाईजान’ भी चली जैसे-तैसे ‘भारत’ भी चल ही गई, लेकिन ‘ट्यूबलाइट’, ‘राधे’, ‘अंतिम’ और ‘किसी का भाई किसी की जान’ से सलमान को अपने फॉर्मेट पर फिर से सोचने की ज़रूरत नज़र आने लगी है। ‘पठान’ की कामयाबी का क्रेडिट सलमान को भी जाता है, क्योकि उनकी और शाहरुख़ की केमिस्ट्री इस 1000 करोड़ वाली फिल्म का सबसे बड़ा हाईलाइट थी। अब ‘टाइगर-3’ (Tiger 3) तैयार हैं।
सलमान ने करण जौहर के प्रोडक्शन में ‘विष्णु वर्धन’ की फिल्म भी साईन कर ली है, जिसमें वो एक ऑर्मी ऑफिसर के कैरेक्टर में हैं। बॉक्स ऑफिस के इस भाईजान पर बाज़ार अब भी भरोसा करता है, सलमान सबसे बड़े ब्रैंड तो हैं ही। कोर्ट केसेज़ का चक्कर पूरी तरह से छूटा नहीं है। अब तो गैंगस्टर की धमकियां भी सलमान को परेशान करने लगी हैं। मगर क्या मजाल, इस स्टार के चेहरे पर थोड़ी सी भी शिकन हो, 35 साल बाद भी स्वैग हो तो भाई जैसा।
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