टीवी अभिनेत्री प्रत्युषा बनर्जी की आत्महत्या से जुड़े करीब दस साल पुराने मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनके पूर्व साथी राहुल राज सिंह को बड़ी राहत दी है. अदालत ने राहुल राज सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाने समेत लगाए गए आरोपों से डिस्चार्ज कर दिया है. जस्टिस एस.जी. डिगे की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया. राहुल राज सिंह पर भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने के अलावा धारा 323, 504 और 506 के तहत भी आरोप लगाए गए थे.
‘बालिका वधू’ में आनंदी का किरदार निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाली प्रत्युषा बनर्जी ने 1 अप्रैल 2016 को गोरेगांव वेस्ट स्थित अपने किराये के फ्लैट में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. उस वक्त उनकी उम्र महज 24 साल थी.
प्रत्युषा की मां ने की थी राहुल के खिलाफ शिकायत
प्रत्युषा की मां सोमा बनर्जी की शिकायत के आधार पर बांगुर नगर पुलिस ने राहुल राज सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया था. परिवार की ओर से आरोप लगाया गया था कि राहुल ने प्रत्युषा को कथित तौर पर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया, जिसके चलते वह गंभीर तनाव और अवसाद में चली गई थीं. जुलाई 2016 में राहुल राज सिंह को बॉम्बे हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी. इसके बाद 2018 में पुलिस ने मामले में चार्जशीट दाखिल की. राहुल ने डिंडोशी सेशन कोर्ट में डिस्चार्ज याचिका दायर की, लेकिन अगस्त 2023 में उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी. उस समय सेशन कोर्ट ने गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए कहा था कि आरोपी के व्यवहार से मृतका की जिंदगी मुश्किल हो गई थी.
इसके बाद राहुल राज सिंह ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया. उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा और अधिवक्ता श्रेयांष मिठारे ने दलील दी कि एफआईआर जल्दबाजी में दर्ज की गई थी और मामले में कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ. बचाव पक्ष ने अंतिम बातचीत की रिकॉर्डिंग का भी हवाला दिया, जिसमें राहुल कथित तौर पर प्रत्युषा को कोई चरम कदम नहीं उठाने की सलाह दे रहे थे.
राहुल राज सिंह को कोर्ट ने किया आरोप मुक्त
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि प्रत्युषा को बचाने की कोशिश करने और अस्पताल पहुंचाने की पहल राहुल ने ही की थी. इन दलीलों और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष के पास मामले को ट्रायल तक ले जाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है. इसी आधार पर अदालत ने राहुल राज सिंह को मामले से डिस्चार्ज कर दिया. राहुल का लगातार दावा रहा है कि वह और प्रत्युषा दिसंबर 2016 में शादी करने वाले थे और प्रत्युषा पारिवारिक दबाव को लेकर परेशान थीं.
वहीं, प्रत्युषा के परिवार की ओर से राहुल पर उनकी बेटी के शोषण के आरोप लगाए जाते रहे हैं. हाईकोर्ट के इस आदेश के साथ करीब एक दशक से चल रहे इस मामले में राहुल राज सिंह को बड़ी कानूनी राहत मिली है. हालांकि, अभियोजन पक्ष के पास आदेश को आगे चुनौती देने का विकल्प मौजूद है.