Exclusive: सुपरनैचरल की ओर Parambrata Chatterjee का क्यों है झुकाव? कैसे शुरू हुई थी जर्नी?

एक्टर और डायरेक्टर परमब्रत चटर्जी ने रिवील किया है कि उन्हें अलौकिक साहित्य में इतनी दिलचस्पी क्यों हैं? साथ ही उन्होंने अपने फ्यूचर प्लान को लेकर भी खुलासा किया है।

Parambrata Chatterjee

Parambrata Chatterjee File Photo

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बंगाली सुपरनैचरल थ्रिलर वेब सीरीज ‘भोग’ 1 मई 2025 को ओटीटी पर रिलीज हुई है। अब इसके डायरेक्टर परमब्रत चटर्जी ने अपनी इस सीरीज को लेकर खुलकर बात की है। परमब्रत ने बताया कि जब वो टीनएजर थे, तब से ही उन्हें सुपरनैचरल चीजों में दिलचस्पी है। 3-4 साल पहले उन्हें अहसास हुआ कि अलौकिक साहित्य के बारे में कंज्यूमर्स के बीच जबरदस्त क्यूरियोसिटी है और अब ये सब ऑडियो कहानियों में तब्दील हो रहा है।

परमब्रत चटर्जी को अलौकिक साहित्य से क्यों है लगाव?

परमब्रत चटर्जी ने रिवील किया कि वो ऐसे अलौकिक साहित्य पर आधारित ऑडियो कहानियों के आईडिया से काफी फेसिनेटेड थे और उन्हें महसूस हुआ कि ये कितना आकर्षण पैदा कर रहा है। तो वो खुद इसमें शामिल हो गए और उन्होंने काफी कुछ सुना। हालांकि, सभी ऑडियो कहानियां अच्छी नहीं थीं, लेकिन कुछ सच में शानदार थीं। ‘भोग’ उन पहली कहानियों में से एक थी, जो उन्हें उस प्रोसेस में मिली। इसके बाद वो लेखक अविक सरकार से मिले और उन्होंने उनके काम को पढ़ना शुरू कर दिया। परमब्रत चटर्जी ने बताया है कि वो उनकी कुछ और कहानियों पर भी काम कर रहे हैं। अब बांग्ला ही नहीं, बल्कि अविक सरकार की कुछ रचनाओं को हिंदी में भी एडाप्ट करने की प्लान कर रहे हैं।

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हॉरर फिल्मों के फैन हैं परमब्रत चटर्जी

परमब्रत चटर्जी ने बताया है कि वो वेस्टर्न हॉरर फिल्मों के बहुत बड़े फैन हैं और वो उन फिल्मों से इंस्पिरेशन लेते हैं। वो सामाजिक मनोविज्ञान को हॉरर के साथ जैसे जोड़ते हैं, वो उन्हें काफी फैसिनेटिंग लगता है। उनका कहना है कि अगर वो इस देश में अलौकिक डरावनी जगह में कुछ करना चाहते हैं, तो उन्हें स्थानीय लोककथाओं में, स्थानीय संस्कृति में अपनी तरह की पौराणिक या सामाजिक लोककथाओं की संरचना में या पृष्ठभूमि में डरावनी जड़ें जमानी होंगी।

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‘भोग’ में पहले से थी दिलचस्पी

परमब्रत चटर्जी ने 2023 से ही अलौकिक हॉरर बनाना शुरू कर दिया था। उन्होंने सीरीज के मेन किरदारों के आसपास एक फ्रेंचाइजी का निर्माण किया क्योंकि उनकी डरावनी कहानियां काफी अच्छी चल रही थीं। मंच पर वो चाहते थे कि परमब्रत चटर्जी फ्रेंचाइजी से परे इसी तरह का कुछ करें, इसलिए उन्होंने ‘भोग’ की क्योंकि इस तरह की डरावनी कहानी उन्हें तीन चार साल पहले पसंद आई थी। उन्हें पता चला कि इसके बंगाली अधिकार अभी भी मौजूद थे। ऐसे में उन्होंने सुनिश्चित किया कि उन्हें वो अधिकार मिले और उन्होंने इस पर काम करना शुरू कर दिया।

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