Raqueeb Alam Lyricist Statement: पिछले कुछ समय से एक्ट्रेस और डांसर नोरा फतेही काफी सुर्खियों में छाई हुई हैं. इस बार उनका डांस नहीं बल्कि जिस गाने पर उन्होंने ठुमके लगाएं हैं, उस गाने के भद्दे बोल कारण बन चुके हैं. दरअसल, नोरा फतेही और संजय दत्त के साथ आया गाना 'सरके चुनर तेरी सरके' बहुत विवाद में घिर गया है. यह गाना कन्नड़ फिल्म 'केडी: द डेविल' का हिस्सा है. गाने के बोल और वीडियो में दिखाए गए सीन लोगों को बहुत अश्लील लगे. अब इस पर गीतकार रकीब आलम का रिएक्शन सामने आया है. इन्होंने इस कन्नड़ गाने के बोल को हिन्दी में बदला, जिसकी वजह से उन्हें लोगों का गुस्सा झेलना पड़ रहा है. लेकिन अब उन्होंने इस मुद्दे पर अपना पक्ष सामने रखा है.
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मैंने मना किया था…
नोरा फतेही के इस गाने से हर जगह काफी विवाद बढ़ गया है. गीतकार रकीब आलम, जिनका नाम गाने से जुड़ा है, ने अब इस पर अपनी बात रखी है. रकीब ने कहा कि उन्होंने इस गाने को लिखने से साफ मना कर दिया था. उन्होंने बताया कि मूल गाना कन्नड़ भाषा में फिल्म के निर्देशक प्रेम ने लिखा था. निर्देशक ने उनसे सिर्फ इसका हिंदी में अनुवाद करने को कहा. रकीब ने कई बार मना किया और कहा कि ऐसे बोल हिंदी में नहीं चलेंगे. यह गाना बहुत भद्दा लगेगा और समस्या पैदा करेगा. लेकिन निर्देशक नहीं माने. उन्होंने कहा कि विवाद होगा तो वे खुद संभाल लेंगे. रकीब को बस कन्नड़ बोलों का शब्द-दर-शब्द हिंदी अनुवाद करना पड़ा.
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इंटरव्यू में दी सफाई
रकीब ने आगे बताया कि यह उनका मूल गाना नहीं है. उन्होंने फिल्म के लिए पांच अन्य गाने लिखे हैं, लेकिन इस वाले को उन्होंने ठुकरा दिया था. फिर भी उनका नाम क्रेडिट में डाल दिया गया. अब विवाद होने पर उन्हें ट्रोलिंग और गालियां सहनी पड़ रही हैं. रकीब ने कहा कि निर्देशक को जानबूझकर कॉन्ट्रोवर्सी चाहिए थी. वे चाहते थे कि गाने से चर्चा हो.
फिल्म इंडस्ट्री में अश्लील गानों का ट्रेंड
यह कोई पहली बार नहीं है, जब किसी भद्दे गाने के बोल ने लोगों को असहज महसूस कराया हो. इससे पहले भी कई गानों में इसी तरह के बोल लिखे गए हैं, जिसमें महिलाओं की शारीरिक संरचना पर भद्दे तरीके से टिप्पणी की गई है. हर बार लोगों की आलोचनाओं के बावजूद चंद व्यूज पाने की ख्वाहिश में मेकर्स किसी भी तरह के गाने फिल्म में डाल देते हैं. इस गाने का भी यही है. इस गाने के बोल इतने खराब थे, कि इसने भोजपुरी गानों की अश्लीलता को भी पीछे छोड़ दिया. नोरा फतेही और संजय दत्त को भी इस गाने के लिए हामी भरने पर कोसा जा रहा है. लेकिन देखने वाली बात है, कि इस विवाद के बाद भी मेकर्स या एक्टर्स अपनी ये जिम्मेदारी समझ पाएंगे या नहीं कि फिल्में सिर्फ मनोरंजन के लिए ही नहीं होती. सिनेमा का हमारे समाज और मानसिकता पर भी काफी प्रभाव पड़ता है. ऐसे गानों का नॉर्मलाइज करने से युवाओं की मानसिकता के साथ सीधा खिलवाड़ करना है.
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