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उड़ानों पर रोक, बाजार बंद… आखिर दक्षिण कोरिया की इस परीक्षा में ऐसा क्या होता है, जिसकी भारत में उठ रही मांग?

दक्षिण कोरिया में ‘सुनेओंग’ (कॉलेज स्कोलास्टिक एबिलिटी टेस्ट – CSAT) वहां की सबसे अहम और कठिन परीक्षाओं में से एक है. यह परीक्षा न केवल छात्रों का कॉलेज तय करती है, बल्कि उनके भविष्य, करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा को भी आकार देती है.

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भारत में हर साल आयोजित होने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET-UG) किसी न किसी वजह से अक्सर चर्चा और विवादों में घिरी रहती है. पेपर लीक के दावों से लेकर परीक्षा केंद्रों पर देरी से पहुंचने के कारण छात्रों को एंट्री न मिलने और उनके रोने-बिलखने की तस्वीरें हर साल सोशल मीडिया पर वायरल होती हैं. इस बीच, सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है. इंटरनेट यूजर्स भारत की नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से मांग कर रहे हैं कि देश की बड़ी परीक्षाओं में दक्षिण कोरिया के परीक्षा नियमों को लागू किया जाए.

क्या है दक्षिण कोरिया की ‘सुनेओंग’ परीक्षा?

दक्षिण कोरिया में ‘सुनेओंग’ (कॉलेज स्कोलास्टिक एबिलिटी टेस्ट – CSAT) वहां की सबसे अहम और कठिन परीक्षाओं में से एक है. यह परीक्षा न केवल छात्रों का कॉलेज तय करती है, बल्कि उनके भविष्य, करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा को भी आकार देती है. इसे वहां ‘जीवन बदलने वाली परीक्षा’ माना जाता है. यही वजह है कि इस परीक्षा के दिन पूरा दक्षिण कोरिया अपने छात्रों की सहूलियत के लिए थम सा जाता है.

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क्यों उठ रही है भारत में इसकी मांग?

भारत में अक्सर देखा जाता है कि ट्रैफिक जाम या किसी अन्य मजबूरी के कारण अगर कोई छात्र नीट या किसी बड़ी परीक्षा के केंद्र पर महज 5 मिनट भी देरी से पहुंचता है, तो उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलती. छात्र और उनके अभिभावक गेट पर मिन्नतें करते रह जाते हैं. इसके विपरीत, दक्षिण कोरिया की ‘सुनेओंग’ परीक्षा के दौरान सरकार और समाज मिलकर छात्रों की मदद करते हैं.

  • अगर कोई छात्र परीक्षा के दिन ट्रैफिक में फंस जाता है या उसे देरी हो रही होती है, तो वह पुलिस हेल्पलाइन पर कॉल कर सकता है. पुलिस की गाड़ियां और बाइकर्स विशेष रूप से उन छात्रों को समय पर परीक्षा केंद्र छोड़ने के लिए तैनात रहते हैं.
  • परीक्षा के दिन सुबह के समय सड़कों पर ट्रैफिक कम रहे, इसके लिए सभी सरकारी दफ्तरों, बैंकों और यहां तक कि शेयर बाजार के खुलने का समय भी एक घंटे आगे बढ़ा दिया जाता है, ताकि छात्र बिना किसी बाधा के समय पर पहुंच सकें.
  • सुनेओंग परीक्षा के दौरान अंग्रेजी का ‘लिसनिंग टेस्ट’ होता है. इस 25-30 मिनट की अवधि के दौरान पूरे देश में विमानों के टेक-ऑफ और लैंडिंग पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाती है. जो विमान हवा में होते हैं, उन्हें 10,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर ही होल्ड पर रखा जाता है ताकि विमानों की आवाज से छात्रों का ध्यान न भटके.
  • परीक्षा केंद्रों के आस-पास गाड़ियों के हॉर्न बजाने, भारी वाहनों के प्रवेश और किसी भी तरह के निर्माण कार्य पर सख्त पाबंदी होती है ताकि पूरी तरह शांति बनी रहे.

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सोशल मीडिया की मांग

भारतीय इंटरनेट यूजर्स का तर्क है कि भारत में नीट, जेईई (JEE) और यूपीएससी (UPSC) जैसी परीक्षाओं का दबाव भी छात्रों पर उतना ही होता है, जितना दक्षिण कोरिया में सुनेओंग का. लेकिन भारत में परीक्षा व्यवस्था अक्सर छात्रों के प्रति सहानुभूति रखने के बजाय बेहद कठोर नजर आती है. सोशल मीडिया पर यूजर्स का कहना है कि भारत सरकार और एनटीए को भी ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जहां प्रशासन छात्रों को ‘अपराधी’ या ‘लापरवाह’ समझने के बजाय उनकी यात्रा और मानसिक शांति में मदद करे. परीक्षा के दिनों में ट्रैफिक मैनेजमेंट को दुरुस्त करना, आपातकालीन स्थिति में छात्रों को पुलिस सहायता मिलना और परीक्षा केंद्रों के आस-पास शोर-शराबे पर रोक लगाना जैसे कदम भारत में भी उठाए जा सकते हैं.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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