Cheapest MBBS Fees In India: भारत में हर साल लाखों युवाओं का सबसे बड़ा सपना डॉक्टर बनने का होता है और उनके माता-पिता भी अपने बच्चों को इस नेक क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रेरित करते रहते हैं. इस वर्ष भी नीट परीक्षा के लिए रिकॉर्ड लगभग 23 लाख छात्रों ने फॉर्म भरे हैं. परीक्षा पास करने के बाद हर स्टूडेंट अच्छे से अच्छे कॉलेज में दाखिला पाना चाहता है, लेकिन प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की भारी-भरकम और महंगी फीस बच्चों व उनके पेरेंट्स दोनों को बहुत ज्यादा परेशान कर देती है. कई बार तो होनहार छात्र अच्छे नंबर लाने के बावजूद सिर्फ इसलिए डॉक्टर नहीं बन पाते क्योंकि उनके पास लाखों रुपये फीस देने की क्षमता नहीं होती. इसी वजह से बहुत से भारतीय स्टूडेंट्स पढ़ाई के लिए विदेश की ओर रुख कर जाते हैं.

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किस राज्य में है देश की सबसे सस्ती मेडिकल पढ़ाई?

अगर आप सोच रहे हैं कि भारत में बिना लाखों रुपये खर्च किए डॉक्टर नहीं बना जा सकता तो आपको जानकर बेहद हैरानी होगी कि देश में कुछ सरकारी संस्थान ऐसे हैं जहां बेहद कम खर्चे में पढ़ाई होती है. देश की राजधानी दिल्ली में स्थित एम्स भारत का सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान होने के साथ-साथ सबसे सस्ता भी है. एम्स दिल्ली में पूरे 5 साल की एमबीबीएस की कुल फीस सिर्फ 19,896 रुपये है, यानी आपको सालाना लगभग 4000 रुपये ही खर्च करने होंगे जिसे एक गरीब परिवार भी आसानी से उठा सकता है. हालांकि इतने सस्ते और शानदार कॉलेज में एडमिशन पाने के लिए छात्रों को कड़ी मेहनत करनी होगी और नीट के 720 अंकों के पेपर में कम से कम 710 नंबर लाने होंगे.

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किन राज्यों में MBBS की फीस है सबसे कम?

दिल्ली के अलावा दक्षिण भारतीय राज्य तेलंगाना में भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों की फीस बहुत ही कम रखी गई है. तेलंगाना के गांधी मेडिकल कॉलेज, काकतीय मेडिकल कॉलेज, उस्मानिया मेडिकल कॉलेज और सिद्दीपेट मेडिकल कॉलेज जैसे नामचीन सरकारी संस्थानों में सालाना फीस मात्र 10,000 रुपये के आस-पास ही है. इन कॉलेजों में अपनी सीट पक्की करने के लिए छात्रों को नीट परीक्षा में कम से कम 650 या उससे अधिक नंबर हासिल करने होते हैं. इसके साथ ही केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के जरिए डॉक्टरी की पढ़ाई काफी कम खर्च में पूरी हो जाती है.

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NEET में कम स्कोर वाले छात्रों के लिए क्या हैं विकल्प?

इन राज्यों के सरकारी कॉलेजों में भी सालाना फीस 10,000 रुपये से लेकर 20,000 रुपये के बीच ही होती है, लेकिन यहां भी सामान्य श्रेणी के बच्चों को एडमिशन के लिए नीट में 600 के आस-पास नंबर लाने ही होंगे. पिछले कुछ सालों में भारत सरकार ने देश के अलग-अलग हिस्सों में नए मेडिकल कॉलेजों की संख्या में भारी बढ़ोतरी तो की है, लेकिन कम फीस वाली सरकारी सीटों पर कॉम्पीटिशन अभी भी बहुत ज्यादा कठिन बना हुआ है. साफ है कि अगर कोई छात्र कम खर्च में भारत के भीतर रहकर ही एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करना चाहता है तो उसे नीट की मेरिट लिस्ट में टॉप पर आने के लिए दिन-रात बहुत ज्यादा मेहनत करनी ही होगी.

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