केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूली शिक्षा के ढांचे में एक बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के सुझावों को मानते हुए बोर्ड अब कक्षा 6 और 9 के लिए नया करिकुलम लागू करने जा रहा है. इसका सीधा असर छात्रों के पढ़ने के तरीके और विषयों के चुनाव पर पड़ेगा. CBSE का मुख्य उद्देश्य रटने वाली शिक्षा को खत्म कर 'समझने वाली शिक्षा' को बढ़ावा देना है. बोर्ड ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे नए सत्र से इन बदलावों को अपनाने के लिए तैयार रहें. शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए जाएंगे ताकि वे नए पाठ्यक्रम को सही ढंग से छात्रों तक पहुंचा सकें.

क्या है थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला?

नए नियमों के मुताबिक, कक्षा 6 के छात्रों के लिए अब 'थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला' अनिवार्य होगा. इसका मतलब है कि छात्रों को अब तीन भाषाएं पढ़नी होंगी. इनमें से दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी जरूरी हैं. यह कदम छात्रों को अपनी जड़ों और भारतीय भाषाओं से जोड़ने के उद्देश्य से उठाया गया है. इसके अलावा, कक्षा 6 के लिए विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में भी बदलाव की तैयारी है ताकि वे वर्तमान जरूरतों के हिसाब से अधिक प्रासंगिक बन सकें.

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कक्षा 9 में गणित और विज्ञान का नया सिस्टम

अब नौवीं कक्षा के छात्रों को गणित और विज्ञान में 'टू-लेवल सिस्टम' का विकल्प मिल सकता है. पहला स्टैंडर्ड लेवल उन छात्रों के लिए जो भविष्य में इन विषयों में करियर बनाना चाहते हैं. वहीं, एडवांस लेवल उन छात्रों के लिए जिन्हें विषय की गहरी समझ चाहिए. यह व्यवस्था ठीक वैसी ही होगी जैसी फिलहाल कक्षा 10 में लागू है. इससे उन छात्रों का तनाव कम होगा जिन्हें गणित या विज्ञान कठिन लगते हैं, और वे अपनी क्षमता के अनुसार स्तर का चुनाव कर सकेंगे.

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