मुख्य जानकारी:

  • सीबीएसई की तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल के आंतरिक परीक्षाओं के जरिए ही किया जाएगा.
  • कक्षा 9वीं में R3 विषय में फेल होने वाले छात्र भी अगली कक्षा यानी 10वीं में आसानी से प्रमोट हो सकेंगे.
  • कक्षा 10वीं का पासिंग सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए छात्रों को R3 भाषा पास करना जरूरी होगा.
  • 10वीं में तीसरी भाषा में पास होने वाले छात्रों को रिजल्ट से पहले री-असेसमेंट का मौका दिया जाएगा.
  • छात्र कक्षा 8वीं की तीन भाषाओं के कॉम्बिनेशन में से ही किसी एक को R3 भाषा के रूप में चुन सकेंगे.

CBSE Update: सीबीएसई के छात्रों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE ने R3 लैंग्वेज असेसमेंट फ्रेमवर्क जारी कर दिया है. तीसरी भाषा R3 का आकलन अब केवल स्कूल स्तर की आंतरिक परीक्षा से ही होगा. इस साल R3 के लिए कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी. बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि R3 में फेल होने वाले छात्रों को कक्षा 9 से 10 में प्रमोट कर दिया जाएगा.

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क्या कक्षा 10 में R3 क्लियर करना जरूरी है?

कक्षा 10 के छात्रों के लिए R3 क्लियर करना सीबीएसई सेकंडरी पास सर्टिफिकेट के लिए अनिवार्य होगा. अगर कोई छात्र कक्षा 10 में R3 में फेल होता है तो रिजल्ट घोषित होने से पहले उसे दोबारा आकलन का मौका मिलेगा. बोर्ड ने साफ कर दिया है कि कक्षा 8 की तीन भाषाओं का कॉम्बिनेशन कक्षा 9 में भी जारी रहेगा और इन्हीं में से एक को R3 चुना जाएगा.

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छात्रों के लिए राहत

यह नया फ्रेमवर्क छात्रों पर बोर्ड परीक्षा का बोझ कम करेगा. साथ ही भाषा सीखने को और मजबूत बनाएगा. छात्र अब स्कूल स्तर पर ही R3 की तैयारी पर फोकस कर सकेंगे. एनसीईआरटी ने छात्रों और स्कूलों के लिए R3 भाषा लर्निंग रिसोर्स अपनी वेबसाइट पर जारी कर दिए हैं. इससे छात्र आसानी से अपनी तीसरी भाषा की तैयारी कर सकेंगे. स्कूलों को भी इन संसाधनों का इस्तेमाल करके आंतरिक मूल्यांकन बेहतर तरीके से करने में मदद मिलेगी.

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निष्कर्ष:

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सीबीएसई का यह नया R3 लैंग्वेज फ्रेमवर्क छात्रों को तीसरी भाषा सीखने के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करता है. आंतरिक मूल्यांकन और री-असेसमेंट की सुविधा से छात्रों का तनाव कम होगा और वे बिना किसी रुकावट के अपनी स्कूली शिक्षा पूरी कर सकेंगे.