Madras High Court News: मद्रास हाई कोर्ट ने प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) एक्ट के तहत दोषी पाए गए एक शख्स को जमानत दे दी है, और कहा है कि उसके खिलाफ आरोपों की गहरी न्यायिक जांच की जरूरत है. कोर्ट ने कहा कि मौजूद सबूतों के आधार पर, सीटी बजाने पर जवाब न देने पर नाबालिग लड़की का हाथ खींचने के आरोपी के कथित काम को अपने आप सेक्सुअल असॉल्ट नहीं माना जा सकता, इसे उत्पीड़न कहा जा सकता है.
---विज्ञापन---
अदालत ने माना हैरेसमेंट का मामला
जस्टिस एम निर्मल कुमार ने ये बात एक पिटीशन पर सुनवाई करते हुए कही, जिसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत ट्रायल कोर्ट की तरफ से दी गई सजा को सस्पेंड करने की मांग की गई थी. जज ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों से पता चलता है कि आरोपी ने लड़की को सीटी बजाई थी और बाद में जब उसने उसे नजरअंदाज किया तो उसका हाथ पकड़ लिया. कोर्ट ने कहा कि ऐसा बिहेवियर, पहली नजर में, हैरेसमेंट माना जा सकता है, लेकिन इसे तुरंत सेक्सुअल इरादे से किया गया नहीं माना जाना चाहिए. कोर्ट ने ये भी कहा कि अपील के दौरान ट्रायल कोर्ट के नतीजों पर फिर से विचार किया जाना चाहिए.
---विज्ञापन---
कब हुई थी वारदात?
आरोपी को पहले POCSO एक्ट के सेक्शन 8 के तहत दोषी ठहराया गया था और 3 साल की सजा सुनाई गई थी. प्रॉसिक्यूशन के मुताबिर, ये वारदात तब हुई जब लड़की उस रेजिडेंशियल कंपाउंड के गेट से गुजर रही थी जहां दोनों परिवार रहते थे. आरोपी ने कथित तौर पर बालकनी से उसे सीटी बजाई और बाद में जब उसने उसे नजरअंदाज किया तो उसका हाथ खींचने के लिए नीचे आया.
---विज्ञापन---
बचाव पक्ष का तर्क
डिफेंस ने तर्क दिया कि आरोपी और लड़की के पिता के बीच पहले हुए झगड़े की वजह से ये केस बनाया गया था. उसने दावा किया कि दोनों परिवारों के बीच मारपीट के बाद क्रिमिनल कंप्लेंट फाइल की गई थी. इसमें शामिल कानूनी मुद्दों और अपील की सुनवाई में वक्त लगने की संभावना को देखते हुए, हाई कोर्ट ने अपील का फैसला होने तक जेल की सजा सस्पेंड कर दी. कोर्ट ने आरोपी को 5000 र के बॉन्ड और 2 श्योरिटी देने पर बेल पर रिहा करने का भी आदेश दिया.
---विज्ञापन---