असम के गुवाहाटी से एक ऐसी खबर आई है जिसे सुनकर किसी का भी दिल दहल जाए. एक घर में घरेलू सहायिका के तौर पर काम करने वाली 13 साल की मासूम बच्ची को बेड के अंदर बने स्टोरेज बॉक्स (दीवान) में छिपाकर रखा गया था. जब जिला लेबर टास्क फोर्स और मजिस्ट्रेट की टीम ने वहां छापेमारी की, तो काफी तलाश के बाद बच्ची इस संदूक जैसे बेड के अंदर से बरामद हुई. सोशल मीडिया पर इस रेस्क्यू का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें डरी-सहमी और बेहद कमजोर दिख रही बच्ची को अधिकारी बाहर निकालते नजर आ रहे हैं. इस घटना ने पूरे इलाके में गुस्से और दुख की लहर पैदा कर दी है.

पकड़े जाने के डर से बेड में किया कैद

जांच दल को घर पर आता देख मकान मालिक ने चालाकी दिखाई और पकड़े जाने के डर से बच्ची को करीब 25 मिनट तक दीवान के अंदर बंद कर दिया. जब अधिकारियों ने बच्ची के बारे में पूछा, तो घर के लोगों ने झूठ बोला कि उसके पिता उसे कुछ दिन पहले ही ले गए हैं. लेकिन घर वालों के बदलते बयानों और अजीब व्यवहार ने टीम को शक पैदा कर दिया. घरवालों ने तलाशी रोकने की भी कोशिश की और बहाना बनाया कि अंदर कोई सो रहा है. जब अधिकारियों ने सख्ती दिखाई और कमरों की तलाशी ली, तो लकड़ी के उस भारी बॉक्स के अंदर से बदहवास हालत में वह मासूम मिली.

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बाहर निकलते ही फूट-फूट कर रो पड़ी बच्ची

बेड से बाहर निकालने के बाद बच्ची को सबसे पहले पानी पिलाया गया क्योंकि उसकी हालत बहुत नाजुक थी. होश में आते ही वह अपनी आपबीती सुनाते हुए फूट-फूट कर रोने लगी. शुरुआती पूछताछ में मासूम ने बताया कि वह पिछले 6 सालों से इस घर में काम कर रही थी और घर की मालकिन अरीना लश्कर खातून उस पर रोज जुल्म ढाती थी. बच्ची के शरीर पर शारीरिक शोषण के निशान थे जो उसकी सालों पुरानी तकलीफ की गवाही दे रहे थे. स्थानीय लोगों ने पहले ही शक जताया था कि इस घर में एक छोटी बच्ची को काम पर रखा गया है और उसके साथ बुरा बर्ताव होता है.

आरोपी महिला के खिलाफ जांच शुरू

इस मामले में पुलिस ने आरोपी मालकिन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी गई है. टास्क फोर्स के अधिकारियों का कहना है कि यह बाल श्रम और बाल शोषण का एक गंभीर मामला है जिसमें कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान है. बच्ची को फिलहाल रेस्क्यू करके सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है जहां उसका इलाज और काउंसलिंग की जा रही है. स्थानीय प्रशासन ने साफ किया है कि इस अमानवीय कृत्य के पीछे जो भी लोग शामिल हैं उन्हें बख्शा नहीं जाएगा. यह घटना हमें याद दिलाती है कि हमारे समाज के बीच आज भी मासूमों के साथ कैसी हैवानियत छिपी हुई है.