पश्चिमी एशिया (West Asia) में जारी युद्ध और तनाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक भावुक और रणनीतिक अपील की है। तेलंगाना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे कम से कम एक साल के लिए सोना खरीदने और विदेश यात्रा करने की योजना को टाल दें।
पीएम मोदी का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब कच्चे तेल और उर्वरकों (Fertilisers) की बढ़ती कीमतों ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ा दिया है।
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आखिर क्यों सोने पर लगी नजर?
भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। हम अपनी जरूरत का 90% से ज्यादा सोना विदेशों से आयात करते हैं। सोना आयात करने के लिए भारत को भारी मात्रा में डॉलर का भुगतान करना पड़ता है। भारत के कुल आयात बिल में अकेले सोने की हिस्सेदारी करीब 9% है, जो कच्चे तेल के बाद दूसरे नंबर पर है। क्योंकि भारत पहले से ही अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है और युद्ध की वजह से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, ऐसे में सरकार सोने जैसे गैर-जरूरी आयात को कम कर डॉलर बचाना चाहती है।
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आयात में पहले ही आई भारी गिरावट
रोचक बात यह है कि प्रधानमंत्री की अपील से पहले ही भारत में सोने का आयात ऐतिहासिक रूप से गिरा है:
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जनवरी 2026: करीब 100 टन सोना आयात हुआ।
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अप्रैल 2026: यह गिरकर मात्र 15 टन रह गया।
आयात घटने की वजह सिर्फ कीमतें नहीं, बल्कि बैंकों की सूची के नवीनीकरण में देरी और सीमा शुल्क (Customs) से जुड़ी प्रशासनिक अड़चनें भी रही हैं।
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पीएम मोदी का पंच फॉर्मूला
अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पीएम ने केवल सोने तक सीमित न रहकर कई सुझाव दिए हैं:
ईंधन की बचत: पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करें।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट: निजी वाहनों की जगह मेट्रो और बसों का उपयोग बढ़ाएं।
इलेक्ट्रिक व्हीकल: ईवी (EV) को प्राथमिकता दें।
Work From Home: कंपनियों से दोबारा वर्क फ्रॉम होम शुरू करने को कहा ताकि सड़कों पर गाड़ियां कम उतरें।
स्वदेशी को बढ़ावा: विदेशी सामानों के बजाय घरेलू उत्पादों का उपयोग करें।
ज्वैलरी शेयरों पर दिखेगा असर?
प्रधानमंत्री के इस बयान का असर सोमवार को शेयर बाजार पर भी दिखने की उम्मीद है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, Titan, Kalyan Jewellers और Senco Gold जैसे बड़े ज्वेलरी स्टॉक्स पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी।
भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि शादी-ब्याह और परंपराओं से जुड़ा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या देश की जनता प्रधानमंत्री की इस आर्थिक देशभक्ति वाली अपील पर अमल करती है या नहीं।