हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: Asian Games 2026election commissionBigg Boss 20

RBI और सरकार के मेगा पैकेज के बाद भी क्यों शांत बैठा है शेयर बाजार? समझें पीछे का पूरा खेल

Share Market: सरकारी बॉन्ड्स पर टैक्स छूट और $40 बिलियन के इनफ्लो की उम्मीद के बाद भी निफ्टी फ्लैट है। कच्चे तेल की ₹110 की कीमत और अल नीनो ने बढ़ाई चिंता बढ़ा दी है।

विज्ञापन

आरबीआई (RBI) की मौद्रिक नीति और सरकार के बड़े टैक्स रिफॉर्म्स के बाद शुक्रवार को बाजार में एक अनोखा नजारा देखने को मिला। एक तरफ जहां नीतिगत मोर्चे पर सरकार और रिजर्व बैंक ने विदेशी कूटनीति और रुपये को संभालने के लिए चौतरफा बाजूका (बड़ा पैकेज) चला दिया, वहीं दूसरी तरफ शेयर बाजार का बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी (Nifty) पूरी तरह शांत या सपाट (Flat) बंद हुआ।

आम तौर पर इतने बड़े आर्थिक सुधारों के बाद शेयर बाजार में बंपर तेजी (Relief Rally) आती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. बाजार के इस रुख ने साफ कर दिया है कि निवेशकों की नजरें अब उन मोर्चों पर टिकी हैं जो न तो आरबीआई के हाथ में हैं और न ही सरकार के बस में।

पॉलिसी में क्या था वो मेगा पैकेज?

आरबीआई और सरकार ने मिलकर देश में डॉलर्स के प्रवाह को बढ़ाने और रुपये की कमजोरी को रोकने के लिए कई बड़े और कड़े नीतिगत फैसले लिए हैं। सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के लिए सरकारी बॉन्ड्स (G-Secs) पर लगने वाले लॉन्ग-पेंडिंग टैक्स के झंझटों को खत्म कर दिया है।

विज्ञापन

सरकारी कंपनियों (PSUs) को विदेशों से कर्ज (ECBs) जुटाने के लिए रियायती स्वाइप विंडो दी गई है और बैंकों को विदेशी मुद्रा अनिवासी जमा (FCNR-B) जुटाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। बाजार के जानकारों का अनुमान है कि इन कदमों से आने वाले महीनों में देश के भीतर करीब 30 से 40 अरब डॉलर का विदेशी फंड आ सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह पैसा कम से कम 3 से 5 साल की मैच्योरिटी वाला (‘Sticky Money’) होगा, जो वैश्विक उतार-चढ़ाव में अचानक देश से बाहर नहीं भागता।

तो फिर निफ्टी (Nifty) क्यों रह गया फ्लैट?

बाजार के विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे 3 सबसे बड़े कारण और ‘अज्ञात’ चुनौतियां हैं जो निवेशकों को सता रही हैं:

विज्ञापन

तेल का झटका और क्रूड का गणित (The Oil Factor)

भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय किसी लिक्विडिटी या मांग की कमी से नहीं, बल्कि सप्लाई चेन के झटके (Supply Shock) से जूझ रही है. पिछले दो महीनों में भारतीय क्रूड बास्केट की औसत कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल रही है। हालांकि, आरबीआई ने अपने नए ग्रोथ और महंगाई के अनुमानों में कच्चे तेल का भाव 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास माना है। बाजार को डर है कि अगर तेल की कीमतें इससे ऊपर बनी रहीं, तो यह घरेलू मांग को दबा देगी और रुपये पर दबाव फिर से बढ़ जाएगा।

अल नीनो (El Niño) और मानसून का खतरा

कच्चे तेल के साथ-साथ बाजार में अब अल नीनो और मानसून की बेरुखी को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। अगर देश में भयंकर गर्मी और असमान मानसून के कारण खेती प्रभावित होती है, तो ईंधन की महंगाई के साथ खाद्य महंगाई (Food Inflation) भी बेकाबू हो सकती है। भोजन और ईंधन, ये दो ऐसे मोर्चे हैं जो आम आदमी के घरेलू बजट और बाजार की दिशा तय करते हैं।

विज्ञापन

अमेरिकी बॉन्ड्स के मुकाबले कमजोर रिटर्न (The Yield Arithmetic)

विदेशी निवेशकों के लिए भारत ने अपने रास्ते जरूर आसान किए हैं, लेकिन गणित अभी भी भारत के पक्ष में नहीं है। भारतीय सरकारी बॉन्ड पर इस समय लगभग 6.2% से 6.3% का रिटर्न (Yield) मिल रहा है, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी (US Treasury) पर यह लगभग 4.5% है। जब विदेशी निवेशक इस पर 3% से 3.5% की हेजिंग लागत जोड़ते हैं, तो उन्हें नेगेटिव कैरी का सामना करना पड़ता है। यानी टैक्स छूट के बावजूद अमेरिकी निवेशकों के लिए भारतीय बॉन्ड मार्केट अभी भी बहुत मुनाफे का सौदा नहीं दिख रहा है।

Resilient Growth: डरने की बात नहीं, पर सतर्कता जरूरी

बाजार के लिए सबसे बड़ी तसल्ली की बात यह है कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयानों में कोई घबराहट या पैनिक नहीं था। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी (GDP) ग्रोथ का अनुमान मामूली रूप से घटाकर 6.6% (पहले 6.9%) किया है और महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1% (पहले 4.6%) किया है। आरबीआई का स्पष्ट संदेश है कि माहौल चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था किसी गंभीर तनाव की ओर नहीं बढ़ रही है।

विज्ञापन

सरकार और रिजर्व बैंक ने अपनी तरफ से सारे सुरक्षा चक्र (Buffers) तैयार कर दिए हैं। अब शेयर बाजार और रुपये की किस्मत पूरी तरह से इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल (Brent Crude) के तेवरों और देश में मानसून की चाल पर निर्भर करेगी।

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

 

 

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola