घरेलू मोर्चे पर आम जनता और अर्थव्यवस्था के लिए आज महंगाई के मोर्चे पर एक परेशान करने वाली खबर आई है। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में भारत की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित थोक महंगाई दर बढ़कर 9.68% (सालाना आधार पर) पर पहुंच गई है। थोक महंगाई में आई इस बड़ी तेजी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी सैन्य संकट और उसके चलते वैश्विक स्तर पर पैदा हुआ ऊर्जा संकट (Energy Shock) है। अप्रैल महीने में थोक महंगाई दर 8.26% पर थी। रॉयटर्स के पोल में अर्थशास्त्रियों ने इसके 9.05% तक रहने का अनुमान जताया था, लेकिन ताजा आंकड़े अनुमान से कहीं ज्यादा ऊपर आए हैं।

नई सीरीज का पहला आंकड़ा: 6 महीने में सबसे तेज बढ़त

सरकारी डेटा के मुताबिक, यह आधार वर्ष 2022-23 (Base Year 2022-23) की संशोधित नई सीरीज का पहला आधिकारिक प्रिंट है। नई सीरीज के तहत सरकार द्वारा की गई गणना के अनुसार, थोक महंगाई पिछले छह महीनों में सबसे तेज गति से बढ़ी है। जहां मई में भारत की खुदरा महंगाई (CPI) 3.93% के साथ काफी हद तक नियंत्रण में थी, वहीं ईंधन उत्पादों के अधिक भारांश (Weightage) के कारण थोक महंगाई लगभग 10% के करीब पहुंच गई है।

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अर्थशास्त्रियों का मानना है कि थोक मूल्य में इस तीव्र उछाल का देश की ब्याज दरों पर तुरंत कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) खुदरा महंगाई को 4% (2% से 6% के दायरे में) पर रखने का लक्ष्य रखता है। आरबीआई ने अपनी जून की बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखा है, ताकि वह ईंधन की ऊंची कीमतों के अन्य क्षेत्रों पर पड़ने वाले असर की समीक्षा कर सके।

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ईंधन और पावर सेक्टर में 30% से ज्यादा का उछाल

मई के आंकड़ों में सबसे ज्यादा आग ईंधन और ऊर्जा की कीमतों ने लगाई है। मई में थोक ईंधन और बिजली की कीमतें सालाना आधार पर 30.33% बढ़ गईं, जबकि अप्रैल में यह आंकड़ा 24.89% था। इस सेक्टर में सालाना आधार पर 61.51% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। फरवरी के अंत में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में 27% का उछाल आया था। इसी दबाव के चलते भारत की सरकारी तेल कंपनियों को मई में चार बार पेट्रोल-डीजल के रिटेल दाम बढ़ाने पड़े थे।

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भोजन और मैन्युफैक्चरिंग भी हुई महंगी

ईंधन के साथ-साथ अन्य प्रमुख सेक्टरों में भी महंगाई का ग्राफ ऊपर गया है। अप्रैल में 2.43% की बढ़त के बाद मई में खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई दर 3.60% पर पहुंच गई। विनिर्मित उत्पादों (Manufactured Products) की कीमतें अप्रैल के 6.68% के मुकाबले मई में 7.48% की दर से बढ़ी हैं।

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पहली बार जारी हुए न्यू इंडेक्स (PPI)

मई के इस रिलीज के साथ सरकार ने पहली बार नए प्रोड्यूसर प्राइस इंडिकेटर्स (PPI) की भी शुरुआत की है। इसमें एक आउटपुट पीपीआई, एक ट्रायल इनपुट पीपीआई और एक सर्विसेज पीपीआई शामिल है। यह सर्विसेज पीपीआई देश के 7 प्रमुख सेक्टरों—बैंकिंग, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन, पेंशन फंड मैनेजमेंट, इंश्योरेंस, रेलवे, हवाई यात्री परिवहन और टेलीकम्युनिकेशन को कवर करता है। रॉयटर्स की गणना के अनुसार, मई में उत्पादक कीमतें (Producer Prices) 9.38% की दर से बढ़ी हैं।

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आगे की राह: जून के आंकड़ों में मिलेगी बड़ी राहत

भले ही मई के आंकड़े डराने वाले हों, लेकिन जून 2026 के आंकड़ों में भारी गिरावट की पूरी उम्मीद है। रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) के मुख्य अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल के मुताबिक पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम के ऐतिहासिक समझौते के बाद वैश्विक ऊर्जा और कमोडिटी की कीमतों में तेज गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड के $84 के नीचे आने से जून 2026 के WPI महंगाई के आंकड़ों में भारत को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।