RBI ने Repo Rate में की कटौती, जानें क्‍या होता है ये और कैसे पड़ता है EMI पर इसका असर

Repo Rate: र‍िजर्व बैंक ऑफ इंड‍िया (RBI) आज रेपो रेट में कटौती कर सकता है, ज‍िसका असर आपके लोन की ईएमआई पर होगी. जान‍िये क्‍या होता है Repo Rate और इससे लोन की ब्‍याज दरें या ईएमआई कैसे प्रभाव‍ित होती है?

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रेपो रेट में कटौती की गई है

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आज हर व्‍यक्‍त‍ि की नजर RBI की मॉनेटरी पॉल‍िसी पर थी. क्‍योंक‍ि आरबीआई के फैसले से आपकी जेब पर सीधा असर होने वाला है. RBI ने आज रेपो रेट में कटौती की घोषणा की है. MPC की मीटिंग 3, 4 और 5 दिसंबर को पॉलिसी रेपो रेट पर विचार-विमर्श करने और फैसला करने के लिए हुई. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि बदलते मैक्रोइकोनॉमिक हालात और आउटलुक के डिटेल्ड असेसमेंट के बाद, MPC ने पॉलिसी रेपो रेट को तुरंत प्रभाव से 25 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 5.25% करने के लिए एकमत से वोट किया.

जो लोग इस शब्‍द से वाक‍िफ नहीं, उन्‍हें ये समझ भी नहीं आ रहा होगा क‍ि आख‍िर रेपो रेट है क्‍या और ये उनके लोन की ईएमआई को कैसे प्रभाव‍ित कर सकता है. आइये आपको रेपो रेट के बारे में आसान भाषा में समझाते हैं और बताते हैं क‍ि ये आपकी जेब पर कैसे सीधा असर डाल सकता है?

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क्‍या है Repo Rate?

यह रेट एक मेन मॉनेटरी पॉलिसी टूल है जिसका इस्तेमाल इकॉनमी में महंगाई और लिक्विडिटी को रेगुलेट करने के लिए किया जाता है. रेपो रेट बढ़ाने का मतलब है कि उधार लेना ज्‍यादा महंगा हो जाता है, जिससे महंगाई कम करने में मदद मिलती है. हालांकि, जब रेपो रेट कम होता है, तो लोन लेने को बढ़ावा मिलता है और इकॉनमिक एक्टिविटी को बढ़ावा मिलता है.

रेपो रेट में बदलाव आपकी EMI पर कैसे असर डालता है?

रेपो रेट में बदलाव का सीधा असर होम लोन की EMI पर पड़ता है, खासकर फ्लोटिंग-रेट लोन के मामले में. जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) रेपो रेट बढ़ाता या घटाता है, तो बैंक अपने लोन रेट बदलते हैं यानी ब्‍याज दरें प्रभाव‍ित होती हैं और नतीजतन, उधार लेने वालों को महीने के आखिर में कम या ज्‍यादा पेमेंट करना पड़ता है.

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2025 में, RBI ने पॉज बटन दबाने से पहले रेपो रेट में लगभग 100 bps की कटौती करके इसे 6.50 परसेंट से 5.50 परसेंट कर दिया था. अगस्त और अक्टूबर की पिछली दो MPC मीटिंग में, RBI ने रेपो रेट को 5.50 परसेंट पर बिना किसी बदलाव के रखा.

जब रेपो रेट बढ़ता है:

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बैंकों को RBI से पैसे उधार लेने के लिए ज्‍यादा पैसे देने पड़ते हैं, इसलिए वे होम, पर्सनल और ऑटो लोन जैसे लोन पर ब्याज दरें बढ़ाकर यह खर्च ग्राहकों पर डालते हैं. इससे मौजूदा फ्लोटिंग-रेट लोन के लिए EMI ज्‍यादा हो जाती है और नए लोन पर ब्याज ज्‍यादा हो जाता है.

जब रेपो रेट कम होता है:

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बैंक RBI से कम कीमत पर उधार ले सकते हैं और वे ग्राहकों के लिए अपनी लोन दरें कम कर सकते हैं. इससे EMI कम हो सकती है या उसी EMI अमाउंट के लिए लोन का समय कम हो सकता है, जिसका मतलब है कि आप लोन की पूरी अवधि में कम ब्याज देंगे. अगर इंटरेस्ट रेट 8.5% से घटकर 8% हो जाता है, तो 10 लाख रुपये के लोन पर EMI में 314 रुपये की बचत होगी और कुल इंटरेस्ट बचत 75320 रुपये होगी.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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