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Share Market: घरों में लगी MCB की तरह काम करता है सर्किट ब्रेकर? साउथ कोरियाई बाजार में आज क्यों लगाना पड़ा लॉक, समझें

सर्क‍िट ब्रेकर को अपने घर में लगी MCB (Miniature Circuit Breaker) की तरह समझ सकते हैं. जैसे घर के बिजली बोर्ड में लगा शॉर्ट सर्किट होने पर बिजली काटकर पूरे घर के उपकरणों को जलने से बचाता है, ठीक वैसे ही शेयर बाजार का सर्किट ब्रेकर पूरे मार्केट को तबाह होने से बचाता है।

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आज यानी 23 जून 2026 को एशियाई शेयर बाजारों में अचानक एक बहुत बड़ी हलचल देखने को मिली। टेक (Tech) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में ऐसी अंधाधुंध बिकवाली (Panic Selling) आई कि दक्षिण कोरिया (South Korea) के शेयर बाजार में हाहाकार मच गया। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि वहां के स्टॉक एक्सचेंज को आनन-फानन में ट्रेडिंग रोकनी पड़ी।

बाजार को इस बड़े क्रैश से बचाने के लिए वहां सर्किट ब्रेकर (Circuit Breaker) और साइडकार (Sidecar) जैसे सेफ्टी टूल्स का इस्तेमाल करना पड़ा। आखिर ये दोनों चीजें क्या हैं, शेयर बाजार में ये कैसे काम करती हैं और निवेशकों के करोड़ों रुपये डूबने से कैसे बचाती हैं? आइए इसे बिल्कुल आसान शब्दों में समझते हैं।

साउथ कोरिया के बाजार में आज क्या हुआ?

ग्लोबल मार्केट में भारी मुनाफावसूली (Profit Booking) के चलते साउथ कोरिया का मुख्य इंडेक्स कोस्पी (KOSPI) इंट्राडे में 8% से ज्यादा टूट गया और एक समय यह करीब 10% की गिरावट तक पहुंच गया था। इस क्रैश की वजह से वहां की दिग्गज चिप निर्माता कंपनी SK Hynix के शेयर 11.5% और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) के शेयर करीब 8.7% तक गिर गए।

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जब KOSPI इंडेक्स 8% नीचे चला गया, तो एक्सचेंज ने दोपहर करीब 2:33 बजे (वहां के समयानुसार) 20 मिनट के लिए ट्रेडिंग को पूरी तरह सस्पेंड कर दिया। इसी का असर भारतीय बाजारों पर भी दिखा, जहां निवेशकों ने सुरक्षित रुख अपनाते हुए बिकवाली की।

क्या होता है सर्किट ब्रेकर (Circuit Breaker)?
इसे आप अपने घर में लगी MCB (Miniature Circuit Breaker) की तरह समझ सकते हैं. जैसे घर के बिजली बोर्ड में लगा शॉर्ट सर्किट होने पर बिजली काटकर पूरे घर के उपकरणों को जलने से बचाता है, ठीक वैसे ही शेयर बाजार का सर्किट ब्रेकर पूरे मार्केट को तबाह होने से बचाता है।

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    जब बाजार में अचानक कोई बुरी खबर आती है या अंधाधुंध बिकवाली होने लगती है, तो इंडेक्स (जैसे भारत में सेंसेक्स/निफ्टी या कोरिया में कोस्पी) एक तय सीमा से ज्यादा गिर जाता है। ऐसे में बाजार कुछ समय के लिए ‘लॉक’ कर दिया जाता है यानी ट्रेडिंग पूरी तरह रोक दी जाती है।

    दक्षिण कोरिया में सर्किट ब्रेकर के तीन लेवल होते हैं— 8%, 15% और 20% की गिरावट। आज जैसे ही बाजार में 8% की गिरावट का पहला लेवल ट्रिगर हुआ, तुरंत 20 मिनट के लिए लॉक लगा दिया गया।

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    सर्किट ब्रेकर लगाने के 3 बड़े कारण:
    1. कूलिंग-ऑफ पीरियड (Cooling-off Period): जब बाजार तेजी से गिरता है, तो निवेशकों में डर (Panic) बैठ जाता है। 20-30 मिनट के लिए ट्रेडिंग रुकने से निवेशकों को सोचने-समझने और शांत होने का समय मिलता है ताकि वे घबराहट में गलत फैसला न लें।

    2. सिस्टम को क्रैश से बचाना: आज के दौर में लाखों कंप्यूटर और एल्गोरिदम (Algos) ऑटोमैटिक ट्रेडिंग करते हैं। अगर एक साथ सब बेचने लगेंगे, तो पूरा सिस्टम बैठ जाएगा। सर्किट ब्रेकर इस चेन-रिएक्शन को तोड़ देता है।

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    3. वजह समझने का मौका: इस ब्रेक के दौरान रेगुलेटर्स और बड़े निवेशकों को यह परखने का मौका मिलता है कि गिरावट की असली वजह क्या है और क्या यह सिर्फ एक अस्थायी डर है।

    क्या होता है साइडकार (Sidecar)?
    आज सुबह सर्किट ब्रेकर लगने से पहले साउथ कोरियन मार्केट में साइडकार (Sidecar) भी एक्टिव किया गया था। यह भी बाजार का एक सुरक्षा कवच है, जो सर्किट ब्रेकर से थोड़ा अलग काम करता है।

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      जब बाजार में बहुत तेज उतार-चढ़ाव होता है, तो बड़े और संस्थागत निवेशक (जैसे विदेशी फंड, बड़े बैंक या हेज फंड) कंप्यूटर प्रोग्राम के जरिए धड़ाधड़ एल्गो ट्रेडिंग (Algo Trading) यानी ऑटोमैटिक कंप्यूटर बाइंग-सेलिंग करने लगते हैं। कंप्यूटर की स्पीड इंसानों से तेज होती है, इसलिए बाजार के अचानक क्रैश होने का रिस्क बढ़ जाता है।

      ऐसी स्थिति में एक्सचेंज साइडकार नियम लागू कर देता है। इसके तहत बड़े निवेशकों की ऑटोमैटिक या प्रोग्राम ट्रेडिंग को कुछ मिनटों के लिए रोक दिया जाता है या धीमा कर दिया जाता है, जबकि आम रिटेल निवेशकों की सामान्य ट्रेडिंग चलती रहती है।

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      आज साउथ कोरिया के कोस्पी (KOSPI) इंडेक्स में केवल 5 मिनट के लिए इस ऑटोमैटिक प्रोग्राम ट्रेडिंग को रोका गया था ताकि बाजार को संभाला जा सके।

      निवेशकों के लिए क्यों जरूरी हैं ये नियम?
      चाहे भारत का शेयर बाजार हो या साउथ कोरिया का, सर्किट ब्रेकर और साइडकार जैसे मैकेनिज्म यह सुनिश्चित करते हैं कि बाजार किसी एक बड़ी अफवाह या तकनीकी गड़बड़ी के कारण पूरी तरह शून्य (Zero) न हो जाए। यह आम निवेशकों के पैसे की सुरक्षा के लिए स्टॉक एक्सचेंज का सबसे बड़ा हथियार है। शेयर बाजार के तकनीकी नियमों, पर्सनल फाइनेंस, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी मार्केट तथा देश-दुनिया की हर बड़ी और प्रामाणिक खबर के लिए हमारे साथ बने रहें।

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      आप इस विषय पर क्या सोचते हैं? क्या आपको लगता है कि भारतीय बाजारों में भी एल्गोरिदम (Algo) ट्रेडिंग को नियंत्रित करने के लिए साइडकार जैसे और कड़े नियमों की जरूरत है?

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      Know More: Editorial Guidelines

      लेख समाप्त

      लेखक के बारे में

      Vandana Bharti

      वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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