अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले और वहां काम कर रहे आईटी प्रोफेशनल्स (IT Professionals) के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. अमेरिकी नागरिकता और अप्रवासन सेवा (USCIS) ने एक प्रमुख आईटी कंसल्टिंग कंपनी के कई H-1B वीजा याचिकाओं को खारिज और रद्द (Revoke) कर दिया है.
USCIS का कहना है कि कंपनी ने कुशल टेक पेशेवरों को उनके असल काम और जिम्मेदारी के मुकाबले काफी कम वेज लेवल (Wage Level/वेतन स्तर) पर रजिस्टर किया था. अगर आप भी यूएस आईटी सेक्टर में काम करते हैं या H-1B वीजा के जरिए अमेरिका जाने की योजना बना रहे हैं, तो इस नए क्रैकडाउन के बारे में विस्तार से जानें.
आखिर क्यों हुई यह बड़ी कार्रवाई?
USCIS के वर्मोंट (Vermont) कार्यालय ने जांच में पाया कि एक बड़ी आईटी कंसल्टिंग फर्म ने एच-1बी याचिकाओं में गड़बड़ी की थी. कंपनी ने जिस स्तर का काम (Job Duties) और अनुभव दिखाया था, उसकी तुलना में कर्मचारियों का वेज लेवल काफी नीचे रखा गया था. USCIS के मुताबिक, ऐसा करने से न केवल विदेशी कर्मचारियों को तय मानकों से कम सैलरी मिलती है, बल्कि इससे अमेरिकी वर्करों (US Workers) के लिए भी अनुचित प्रतिस्पर्धा (Unfair Competition) पैदा होती है.
एजेंसी ने स्पष्ट किया कि वीजा नियमों के दुरुपयोग को रोकने और एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड इमिग्रेशन सिस्टम की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है. बता दें कि USCIS ने अपने आधिकारिक पोस्ट में कंपनी के नाम और प्रभावित कर्मचारियों की सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया है.
भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स पर इसका क्या असर होगा?
इस खबर का सीधा कनेक्शन भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स से है. USCIS की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में मंजूर हुए कुल H-1B वीजा में से 71% यानी 2,83,397 लाभार्थी भारत में जन्मे नागरिक थे. अमेरिका में भारतीय आईटी इंजीनियर्स का एक बड़ा हिस्सा कंसल्टिंग और आउटसोर्सिंग कंपनियों के जरिए काम करता है. ट्रंप प्रशासन के तहत USCIS द्वारा वेज लेवल और जॉब रोल के मिलान की अब और ज्यादा बारीक जांच (Strict Scrutiny) की जाएगी.
जिन कर्मचारियों के H-1B वीजा रिवोक हुए हैं, उनके कानूनी स्टेटस पर सीधा असर पड़ेगा और एम्प्लॉयर को इसके कानूनी नतीजों का सामना करना पड़ सकता है.
H-1B आवेदकों और कर्मचारियों के लिए
अगर आप H-1B वीजा के लिए अप्लाई कर रहे हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि आपका एम्प्लॉयर आपकी पढ़ाई, अनुभव और काम की जिम्मेदारियों के हिसाब से ही सही Prevailing Wage Level तय करे. जॉब रोल और वेज लेवल में थोड़ा सा भी मिसमैच आपकी याचिका के रिजेक्ट होने का कारण बन सकता है.
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