भारत में आने वाले महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है. इसकी वजह अमेरिका का एक संभावित फैसला है. खबरों के मुताबिक, अगर अमेरिका ईरान से तेल खरीदने पर दी गई छूट (Waiver) को अगस्त के बाद भी जारी रखता है, तो भारतीय सरकारी तेल कंपनियां ईरान से फिर से कच्चा तेल खरीद सकती हैं. जानकारी के मुताबिक, भारत की कई सरकारी रिफाइनरियां पहले से ही ईरानी तेल सप्लायर्स के साथ बातचीत कर रही हैं. हालांकि फिलहाल अगस्त तक की तेल आपूर्ति के लिए उनके पास काफी कॉन्ट्रैक्ट हैं, लेकिन अगर अमेरिकी छूट बढ़ती है और ईरानी तेल सस्ता मिलता है तो भविष्य में इसकी खरीद शुरू हो सकती है.
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ईरान से तेल क्यों है अहम?
ईरान दुनिया के बड़े कच्चा तेल उत्पादक देशों में शामिल है. भारत भी पहले ईरान से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता था. लेकिन अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के बाद भारत समेत कई देशों को ईरान से तेल आयात कम करना पड़ा. अब अगर अमेरिका प्रतिबंधों में और ढील देता है या छूट की अवधि बढ़ाता है, तो भारत के लिए ईरानी तेल का रास्ता दोबारा खुल सकता है. ईरान अक्सर अपने ग्राहकों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कच्चा तेल मुहैया कराता है. अगर भारतीय कंपनियां वहां से कम कीमत पर तेल खरीदती हैं, तो उनकी लागत घट सकती है. इसका असर आगे चलकर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है. हालांकि ईंधन के दाम सिर्फ कच्चे तेल की कीमत पर निर्भर नहीं करते, बल्कि टैक्स, रिफाइनिंग लागत, परिवहन और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति भी अहम भूमिका निभाती है.
अभी रूस से भी मिल रहा है सस्ता तेल
फिलहाल भारत बड़ी मात्रा में रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीद रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस के तेल पर मिलने वाली छूट अभी भी काफी आकर्षक है. ऐसे में भारतीय कंपनियां ईरानी तेल तभी खरीदेंगी जब उसकी कीमत और शर्तें ज्यादा फायदेमंद होंगी. अमेरिका की ओर से दी गई मौजूदा छूट अगस्त तक लागू है. अब पूरी नजर इस बात पर है कि क्या वॉशिंगटन इसे आगे बढ़ाता है या नहीं. अगर छूट जारी रहती है तो भारतीय रिफाइनरियां ईरानी तेल खरीदने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा सकती हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ ईरानी तेल की खरीद शुरू होने से पेट्रोल-डीजल तुरंत सस्ता नहीं होगा. लेकिन अगर भारत को लगातार कम कीमत पर कच्चा तेल मिलता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार स्थिर रहता है, तो भविष्य में ईंधन की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है. इससे आम लोगों और उद्योगों दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है.
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