क्‍या बढ़ने वाली हैं कच्चे तेल की कीमतें? भारत क्‍यों है इतना बेपरवाह

अमेर‍िका ने वेनेजुएला पर जो चाबुक चलाया है, उसके बाद ये कयास लगाए जा रहे हैं क‍ि पूरी दुन‍िया में कच्‍चे तेल की कीमतें बढ़ने वाली हैं. क्‍योंक‍ि वेनेजुएला के पास दुन‍िया का सबसे बड़ा ऑयल र‍िजर्व है. हालांक‍ि भारत पर इस बात का कोई असर नहीं हो रहा. जानें ऐसा क्‍यों?

oil price in world

क्‍या दुन‍ियाभर में तेल की कीमतों में इजाफा होने वाला है?

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अमेर‍िका ने वेनेजुएला के राष्‍ट्रपत‍ि न‍िकोलस मादुरो और उनकी पत्‍नी सील‍िया को ग‍िरफ्तार कर ल‍िया है और अब अमेर‍िका ने ये भी घोषणा कर दी है क‍ि उसकी तेल कंपन‍ियां वेनेजुएला जाएंगी और वहां ऑयल र‍िफाइन‍िंग करेंगी. वेनेजुएला के राष्‍ट्रपत‍ि न‍िकोलस मादुरो की ग‍िरफ्तारी ने पूरी दुन‍िया के लोगों के सामने ये सवाल खड़ा कर द‍िया है क‍ि क्‍या अब तेल की कीमतें बढ़ने वाली हैं? दरअसल, वेनेजुएला के पास दुन‍िया का सबसे बड़ा ऑयल र‍िजर्व है. ऐसे में लोगों के मन में ये सवाल आना लाजमी है. लेक‍िन इस बात से भारत बेपरवाह है. ऐसा क्‍यों? क्‍या भारत को तेल के दाम में इजाफे का डर नहीं है? आइये जानते हैं:

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भारत पर असर पड़ेगा या नहीं?

वेनेजुएला पर अमेर‍िकी कार्रवाई का भारत पर बमुश्‍क‍िल ही कोई असर होगा. 2000 और 2010 के दशक के दौरान भारत और वेनेजुएला के बीच व्‍यापार‍िक संबंध प‍िक पर था. तब भारत वेनेजुएला से हर द‍िन करीब-करीब 400 हजार बैरल तेल हर द‍िन लेता था. लेक‍िन साल 2019 में अमेर‍िका ने वेनेजुएला पर प्रत‍िबंध लगा द‍िए और इसके साथ ही भारत और वेनेजुएला के बीच ट्रेड वॉल्‍यूम एकदम से नीचे ग‍िर गया. भारत ने वेनेजुएला से ऑयल इंपोर्ट में कटौती की और सेकेंडरी अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए देश में कमर्शियल एक्टिविटी को कम किया गया.

कम ट्रेड वॉल्यूम, मौजूदा बैन की पाबंदियों और बड़ी ज्योग्राफिकल दूरी को देखते हुए, वेनेजुएला में मौजूदा डेवलपमेंट का भारत की इकॉनमी या एनर्जी सिक्योरिटी पर कोई खास असर पड़ने की उम्मीद नहीं है. वेनेजुएला के पास भले ही दुनिया का लगभग 18 प्रतिशत तेल भंडार है, जो सऊदी अरब (लगभग 16 प्रतिशत), रूस (लगभग 5-6 प्रतिशत) या अमेरिका (लगभग 4 प्रतिशत) से ज्‍यादा है. लेक‍िन, अमेर‍िकी प्रत‍िबंधों के कारण यह ल‍िमिटेड मात्रा में ही तेल एक्‍सपोर्ट कर सकता है. इसल‍िए इससे कीमतों पर भी कोई खास असर नहीं होना चाह‍िए.

अमेर‍िकी कदम से भारत को फायदा या नुकसान ?
अमेर‍िका ने कहा है क‍ि वह वेनेजुएला के ऑयल सेक्‍टर को टेकओवर करेगा. देखा जाए तो इस कदम से भारत को फायदा ही होने वाला है. क्‍योंक‍ि वेनेजुएला के पास लंबे समय से 1 ब‍िलियन डॅलर का बकाया है, जो अमेर‍िका के इस कदम के बाद भारत को वापस म‍िल सकता है. इसके अलावा, वेनेजुएला के उन तेल क्षेत्रों में अमेरिका कच्चे तेल का उत्पादन फिर से शुरू कर सकता है जिनमें भारत की भी हिस्सेदारी है.

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भारत की ONGC विदेश लिमिटेड (OVL) की देश के पूर्वी हिस्से में सैन क्रिस्टोबल ऑयलफील्ड में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है. हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उसे जरूरी टेक्नोलॉजी, सेवाओं और उपकरणों तक पहुंच नहीं मिल पा रही थी, जिससे कमर्शियली फायदेमंद भंडार भी बेकार पड़े थे. लेक‍िन अब कंपनी इसका फायदा उठा सकती है.

वेनेजुएला ने साल 2014 तक OVL को $536 मिलियन का डिविडेंड नहीं दिया है, साथ ही उसके बाद की अवधि के लिए भी इतनी ही रकम नहीं दी है, क्योंकि देश ने ऑडिट की इजाजत देने से इनकार कर दिया था, जिससे भारत के दावों का निपटारा अब तक रुका हुआ है. ऐसे में अमेर‍िका का ये कदम, भारत के ल‍िए फायदेमंद साब‍ित होगा.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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