'लाखों मजदूरों की जाएगी नौकरी…', अमेरिकी टैरिफ पर चिंतित कपड़ा व्यापारियों ने क्या कहा?

अमेरिका की ओर टैरिफ में बढ़ोतरी के भारत के Indian Textile Exporters on tariff: कपड़ा व्यापारियों ने इसको लेकर चिंता जताई है। व्यापारियों की मानें तो अगर दोनों देशों के बीच बात नहीं बनती है तो लाखों कर्मचारियों की छंटनी होना तय है क्योंकि उन्हें लागत से कम दाम पर अपना सामान बेचना होगा।

US tariff impact on Indian textiles

अमेरिकी टैरिफ से खतरे में मजदूरों की नौकरी (Pic Credit-Social Media X)

US tariff impact on Indian textiles: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह टैरिफ आज से लागू हो गया है। ऐसे में आज से अमेरिका जाने वाले भारतीय सामानों पर 25 प्रतिशत टैक्स लगेगा। इस बीच कपड़ा व्यापारियों ने बढे़ टैरिफ को लेकर चिंता जताई है। व्यापारियों की मानें तो उन्हें अपनी फैक्ट्रियों को बचाने, बड़े स्तर पर लोगों को निकालने से बचाने से बचाने के लिए लागत से कम कीमत पर अपने सामान को बेचना होगा। बता दें कि अमेरिका ने भारत पर पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत 50 देशों से ज्यादा टैरिफ भारत पर लगाया है।

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टैरिफ पर क्या बोले कपड़ा व्यापारी?

विदेशी कपड़ा व्यापारियों की एक संस्था एईपीसी के अध्यक्ष सुधीर सेखरी ने कहा कि हम इस भारी नुकसान की भरपाई के लिए सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करन की मांग करते हैं। एक्पोर्टर परेशान हैं क्योंकि उन्हें अपनी फैक्ट्रियों को चालू रखने और बड़े पैमाने पर लेबर की छंटनी से बचने के लिए लागत से कम दाम पर सामान बेचना होगा। एईपीसी ने आगे कहा कि भारतीय रेडिमेड गारमेंट्स के लिए अमेरिका एक प्रमुख बाजार है। 2024 में अमेरिका के कुल कपड़ा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 33 प्रतिशत थी।

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चीन पर 30 प्रतिशत टैरिफ लगाता है अमेरिका

बता दें कि फिलहाल चीन रेडिमेड गारमेंट्स में अमेरिका को सबसे अधिक कपड़े का निर्यात करता है। उसकी बाजार में हिस्सेदारी 21.9 प्रतिशत है। यह 2020 में 27.4 प्रतिशत थीं चीन, वियतनाम और बांग्लादेश मिलकर अमेरिका को 49 प्रतिशत आपूर्ति करेंगे। गौरतलब है कि अमेरिका ने चीन पर 30 प्रतिशत और वियतनाम, बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत टैरिफ निर्धारित किया है।

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अमेरिका के साथ दोगुना हुआ व्यापार

मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच व्यापार पिछले 10 साल में दोगुने से भी अधिका हो गया है। इसमें भारत की हिस्सेदारी ज्यादा है जबकि अमेरिका की कम है। 2015 में भारत-अमेरिका के बीच आपसी व्यापार 20 अरब डॉलर का था जोकि 2025 में बढ़कर 40 अरब डॉलर हो गया है। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, दवा और कपड़ा क्षेत्र में हुई बढ़ोतरी है।

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