US Stock Market News: पश्चिम एशिया में भड़की ताजा लड़ाई ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंताएं बढ़ा दी हैं। युद्ध की खबरों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है, जबकि दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजार वॉल स्ट्रीट (Wall Street) में निवेशकों ने भारी बिकवाली की है। ताजा संघर्ष के कारण ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतों में 5% की भारी बढ़त दर्ज की गई है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम 113 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्धविराम पूरी तरह से टूटता है और संघर्ष लंबा खिंचता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में ऐसी उथल-पुथल मचेगी जिसे संभालना मुश्किल होगा। कच्‍चे तेल के दाम में आई तेजी के कारण अब भारत में सरकारी तेल कंपन‍ियों के ऊपर कीमत बढ़ाने का दबाव बढ़ सकता है।

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अमेरिकी बाजार में गिरावट

तेल की बढ़ती कीमतों और युद्ध के डर से अमेरिकी शेयर बाजार बुरी तरह लड़खड़ा गया है। दिग्गज शेयरों वाले डाओ जोंस इंडेक्स (Dow Jones Index) में 2% की गिरावट देखी गई है। ऊंचे तेल दाम और महंगाई बढ़ने की आशंका से निवेशकों ने जोखिम वाली संपत्तियों से हाथ खींचना शुरू कर दिया है।

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भारत पर क्या होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्‍यादा कच्चा तेल आयात करता है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल $110 के ऊपर बना रहता है, तो घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) के मार्जिन पर असर पड़ सकता है, जो अब तक कीमतों को स्थिर रखे हुए थीं। आयात महंगा होने से भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और कमजोर हो सकता है।

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फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें युद्धविराम और कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हैं। अगर स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक रिकवरी दोनों ही खतरे में पड़ सकती हैं।

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