त्योहारों का सीजन बस शुरू ही होने वाला है. राखी, गणेश चतुर्थी, नवरात्रि और दिवाली लाइन से आने वाले हैं. ऐसे में अगर आपकी पसंदीदा मिठाइयां थोड़ी महंगी हो जाएं या बजट गड़बड़ा जाए, तो स्वाद थोड़ा फीका जरूर लग सकता है. वजह है चीनी की कीमतें (Sugar Price). पिछले कुछ दिनों में चीनी के दामों में जिस तरह आग लगी है, उसने आम जनता के साथ-साथ सरकार की भी नींद उड़ा दी है.
इसी को देखते हुए सरकार ने कीमतों पर ब्रेक लगाने के लिए दो बड़े और कड़े फैसले लिए हैं. आइए समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और सरकार के इस फैसले से आपको क्या राहत मिलेगी!
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20 दिनों में 20 रुपये महंगी हुई चीनी
अगर आप सोच रहे हैं कि अचानक क्या हो गया, जो चीनी 20 रुपये महंगी हो गई है. तो जरा इन आंकड़ों पर नजर डालिए. एक साल पहले जो चीनी थोक बाजार में लगभग 3900 रुपये प्रति क्विंटल थी, वह आज बढ़कर 5400 से 5500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है. वहीं अगर खुदरा (Retail) दाम की बात करें तो जो चीनी पहले 46 रुपये प्रति किलो के आसपास मिल रही थी, उसके दाम 20 अगस्त तक 65 रुपये प्रति किलो के आंकड़े को छू चुके हैं. यानी सिर्फ पिछले 20 दिनों में ही चीनी लगभग 20 रुपये महंगी हो गई.
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अब आपके मन में ये सवाल आ रहा होगा कि दाम क्यों बढ़ रहे हैं. दरअसल, इसकी मुख्य वजह यह है कि नए सीजन की शुरुआत से पहले बाजारों और गोदामों में चीनी का स्टॉक कम हो गया था. डिमांड ज्यादा और सप्लाई कम होने के कारण दाम में इजाफा देखने को मिला.
सरकार ने लिया एक्शन
कीमतों को तुरंत काबू में करने के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने ऐलान किया है कि देश में 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख टन कच्ची चीनी (Raw Sugar) का बिना किसी इंपोर्ट ड्यूटी (शुल्क-मुक्त) के आयात किया जाएगा.
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इससे ये फायदा होगा कि जब बाहर से सस्ती चीनी भारी मात्रा में देश में आएगी, तो बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ जाएगी. सप्लाई बढ़ते ही कीमतों में आई अचानक तेजी पर लगाम लगेगी और दाम नीचे आएंगे.
जमाखोरी पर भी लगाम और नई स्टॉक लिमिट
कई बार व्यापारी और बड़े थोक उपभोक्ता चीनी को दबाकर बैठ जाते हैं, ताकि जब दाम बढ़ें तब मुनाफा कमाया जा सके. इस कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए सरकार ने सख्त नियम बनाए हैं. जो बड़ी कंपनियां, बेकरी या हलवाई एक महीने में 10 टन से ज्यादा चीनी का इस्तेमाल करते हैं, वे अब अपने पास केवल 15 दिन की जरूरत के बराबर ही चीनी का स्टॉक रख सकेंगे. इससे पहले भी सरकार ने व्यापारियों के लिए स्टॉक लिमिट 4000 क्विंटल तय की थी.
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त्योहारों की मिठास पर क्या पड़ेगा असर?
आगे आने वाले त्योहारों में मिठाइयों, कैंडीज और सॉफ्ट ड्रिंक्स की मांग बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. सरकार के इस कदम का सीधा मकसद यही है कि त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की कोई किल्लत न हो और आम आदमी को सही दाम पर चीनी मिलती रहे.
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