सोमवार की सुबह जब निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो ऐप खोले, तो नजारा वाकई डरावना था. स्क्रीन पर हर तरफ लाल रंग फैला हुआ था. ईरान और इजराइल के बीच बढ़ती जंग की आग की लपटें सीधे भारतीय शेयर बाजार तक पहुंच गई हैं. सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में ऐसा कोहराम मचा कि सेंसेक्स देखते ही देखते 1000 अंकों से ज्यादा टूट गया और निवेशकों की मेहनत की करीब 6 लाख करोड़ रुपये की पूंजी एक झटके में स्वाहा हो गई.

क्या हुआ आज बाजार में?

बाजार के खुलते ही बिकवाली का दौर शुरू हुआ, जो थमने का नाम नहीं ले रहा है. निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही भारी दबाव में हैं. यह गिरावट केवल एक नंबर नहीं है, यह बाजार के सेंटीमेंट को दर्शाती है- उसके डर को द‍िखा रही. जब दुनिया के दो देश युद्ध के मुहाने पर खड़े हों, तो बाजार का नर्वस होना स्वाभाविक है.

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क्यों मचा है यह हाहाकार?
जियो-पॉलिटिकल टेंशन:
इजराइल-ईरान के बीच का तनाव अब एक ग्लोबल संकट बन चुका है. निवेशक रिस्क लेने से बच रहे हैं.

तेल के दामों में उछाल: जैसा कि हमने पहले देखा, क्रूड ऑयल के दाम बढ़ रहे हैं. यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक डबल अटैक जैसा है. बाजार गिर रहा है और महंगाई का खतरा बढ़ रहा है.

इन्वेस्टर पैनिक: बाजार में जो लोग थोड़े समय के लिए निवेश करते हैं, वे पैनिक में आकर अपने स्टॉक्स बेच रहे हैं, जिससे गिरावट और गहरी होती जा रही है.

निवेशकों के लिए गोल्डन रूल्स
इस गिरावट को देखकर घबराहट होना स्वाभाविक है, लेकिन एक समझदार निवेशक के तौर पर आपको खुद से ये 3 सवाल पूछने चाहिए:

  1. क्या मेरे फंडामेंटल्स सही हैं? अगर आपने अच्छी कंपनियों (Bluechip Stocks) में निवेश किया है, तो बाजार के इस शोर (Noise) से परेशान होने की जरूरत नहीं है. कंपनियां कहीं नहीं जा रही हैं.
  2. क्या मैं पैनिक में बेच रहा हूं? बाजार में गिरावट सेल की तरह होती है, न कि लूट की तरह. अगर आप डरकर अपने शेयर सस्ते में बेच रहे हैं, तो आप अपना ही नुकसान कर रहे हैं.
  3. कैश रिजर्व: अगर आपके पास सरप्लस कैश है, तो यह अच्छे शेयरों को डिस्काउंट पर खरीदने का एक बेहतरीन मौका हो सकता है.

शांति रखें, तूफान गुजर जाएगा
युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव बाजार के लिए हमेशा से अस्थाई रहे हैं. इतिहास गवाह है कि जब भी बाजार में ऐसी बड़ी गिरावट आती है, धैर्य रखने वाले निवेशक ही अंत में जीतते हैं. यह समय स्क्रीन को बार-बार रिफ्रेश करने का नहीं, बल्कि शांत रहकर अपने लॉन्ग-टर्म गोल पर टिके रहने का है.