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Share Market: 1 घंटे में डूबे 5 लाख करोड़ रुपये, एक्‍सपर्ट ने बताई असली वजह

Stock Market Crash Investors Lose 5 Lakh Crore In An Hour: सोमवार को शेयर बाजार में भारी गिरावट से 1 घंटे में निवेशकों के 5 लाख करोड़ रुपये डूब गए. सेंसेक्स 900 अंक टूटा और निफ्टी 23,000 के नीचे फिसला.

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शेयर बाजार में क्यों आया भूकंप? जानिए एक्‍सपर्ट अम‍ित न‍िगम ने भारी तबाही की कौन सी बड़ी वजहें बताईं. (फोटो क्रेड‍िट- एआई)

अगर आप भी सोमवार सुबह-सुबह शेयर बाजार का हाल देखकर दंग रह गए हैं, तो आप अकेले नहीं हैं. हफ्ते की शुरुआत ही भारतीय शेयर बाजार के लिए किसी भयानक सपने जैसी रही.

सोमवार को बाजार खुलते ही 1 घंटे के भीतर बीएसई (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4.82 लाख करोड़ रुपये से घटकर 4.77 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. यानी पलक झपकते ही निवेशकों की गाढ़ी कमाई के लगभग 5 लाख करोड़ रुपये स्वाहा (Market Valuation Wipeout) हो गए.

सेंसेक्स (Sensex) बाजार खुलते ही 900 से ज्यादा अंक नीचे गिर गया, वहीं निफ्टी 50 (Nifty 50) 23,000 का अहम मनोवैज्ञानिक स्तर तोड़कर नीचे आ गया. यह गिरावट ऐसे समय पर आई है जब बाजार पहले ही लगातार 7 हफ्तों की भारी गिरावट (7th Consecutive Weekly Decline) का सामना कर रहा था.

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यह भी पढ़ें : Stock Market Crash Today: सेंसेक्स 1000 अंक धड़ाम, निफ्टी 22,850 के नीचे; क्रूड ऑयल $106 पार होने से मचा हाहाकार

1 घंटे में तबाही लाने वाली बड़ी वजहें

शेयर बाजार विशेषज्ञों और मार्केट एनालिस्ट्स अम‍ित न‍िगम के मुताबिक, आज की इस भारी गिरावट के पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि 5 बड़े कारणों का तगड़ा कॉकटेल जिम्मेदार है:

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कच्चे तेल (Crude Oil) की बेकाबू आग
भारत के लिए कच्चा तेल सबसे बड़ी सिरदर्दी बन गया है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के पार बना हुआ है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता (Import) है. महंगा तेल आने से देश का इंपोर्ट बिल बढ़ता है, महंगाई (Inflation) बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है. साथ ही, ट्रांसपोर्ट और फ्यूल पर निर्भर कंपनियों का मुनाफा (Corporate Margins) बुरी तरह सिकुड़ जाता है.

अमेरिकी बांड यील्ड में भारी उछाल
अमेरिका की 10 साल वाली ट्रेजरी यील्ड (US 10-Year Treasury Yield) कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. अब आप कहेंगे क‍ि इसका क्या मतलब है? तो इसका मतलब ये हुआ क‍ि जब अमेर‍िका में ब‍िना क‍िसी जोख‍िम के सरकारी बॉन्ड्स पर ज्यादा ब्याज (Yield) मिलने लगता है, तो दुनियाभर के बड़े निवेशक भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स (Emerging Markets) से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड्स में लगाने लगते हैं. इसके अलावा, तेल की महंगाई के चलते अमेरिका में ब्याज दरें (Interest Rates) लंबे समय तक ऊंची रहने का डर भी बढ़ गया है.

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विदेशी निवेशकों (FIIs) की धुआंधार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भारत से पैसा निकालने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. ग्लोबल मार्केट में डर, महंगे तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की वजह से FIIs धड़ाधड़ सेल बटन दबा रहे हैं. जब विदेशी निवेशक बड़ी इंडेक्स कंपनियों (Large-Cap Stocks) को बेचते हैं, तो पूरा सेंसेक्स और निफ्टी भरभराकर नीचे आ गिरता है.

बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर्स बने बलि का बकरा
सोमवार की सुबह सबसे ज्यादा पिटाई बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर्स के शेयरों की हुई. दरअसल, सेंसेक्स और निफ्टी में HDFC Bank, ICICI Bank और SBI जैसे दिग्गज बैंकों का वजन (Weightage) सबसे ज्यादा होता है. जब ये हेवीवेट शेयर एक साथ गिरते हैं, तो छोटे-मोटे शेयरों की तुलना में पूरे इंडेक्स को बहुत तेजी से नीचे खींच लेते हैं.

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ग्लोबल टेंशन से फैला रिस्क-ऑफ (Risk-off Mood) माहौल
अमेरिका और ईरान के बीच गहराते संकट ने ग्लोबल मार्केट में अनिश्‍च‍ितता का माहौल पैदा कर दिया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशक फिलहाल कोई भी जोखिम (Risk) लेने के मूड में नहीं हैं. पहले से ही सुस्त पड़े भारतीय बाजार के लिए जैसे ही सोमवार को ग्लोबल संकेत कमजोर मिले, बिकवाली (Panic Selling) की सुनामी आ गई.

अगर आपका पोर्टफोलियो भी आज लाल निशान में तैर रहा है, तो पैनिक सेलिंग (घबराहट में शेयर बेचना) से बचें. जब तक मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव शांत नहीं होता और क्रूड ऑयल की कीमतें नीचे नहीं आतीं, तब तक बाजार में ऐसी ही उठा-पटक देखने को मिल सकती है. लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स के लिए यह समय जल्दबाजी में कोई भी बड़ा कदम उठाने के बजाय स्थिति पर नजर बनाए रखने का है.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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