वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों और पश्चिम एशिया (Middle East) में युद्ध खत्म होने की उम्मीदों के बीच भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 12 जून को जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। मुख्य सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों ही 1% से ज्यादा की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर हमले की योजना टालने और दोनों देशों के बीच शांति समझौते की संभावनाओं ने ग्लोबल मार्केट के साथ-साथ घरेलू निवेशकों के सेंटिमेंट को भी बूस्ट कर दिया है। आइए, जानते हैं बाजार की इस महा-रैली के 5 बड़े कारण और आगे का गणित।
सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार तेजी, बैंक निफ्टी ने भी भरी उड़ान
शुक्रवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स 887.19 अंक (1.20%) उछलकर 74,719.74 पर पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 234.55 अंक (1.01%) की बढ़त के साथ 23,396.15 पर कारोबार कर रहा है। बाजार की इस तेजी को बैंकिंग और ऑटो सेक्टर से सबसे ज्यादा सपोर्ट मिला। बैंक निफ्टी 716.35 अंक (1.30%) चढ़कर 55,880.15 पर पहुंच गया। इसके अलावा निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 में भी 1.5% की शानदार बढ़त दर्ज की गई।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद और ग्लोबल मार्केट में रॉकेट सी तेजी
बाजार में आई इस हरियाली के पीछे दो सबसे बड़े कारण वैश्विक मोर्चे से जुड़े हैं:
- यूएस-ईरान शांति डील की उम्मीद: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अपने नियोजित हमलों को रद्द कर दिया है। उन्होंने संकेत दिया है कि इस वीकेंड तक दोनों देश एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, जिससे ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को शिपिंग के लिए दोबारा खोला जा सकेगा।
- ग्लोबल मार्केट्स में उछाल: अमेरिकी बाजार का डाउ जोंस (Dow Jones) ओवरनाइट 929 अंक (1.86%) उछलकर बंद हुआ। एशियाई बाजारों में भी इसका जबरदस्त असर दिखा; जापान का निक्केई (Nikkei) 4% से अधिक और दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 8% से ज्यादा की भारी बढ़त के साथ बंद हुआ।
कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में गिरावट, भारत को मिली बड़ी राहत
ट्रंप के फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड वायदा 2% गिरकर $88.55 प्रति बैरल और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 1.8% टूटकर $86.11 पर आ गया है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार, तेल सस्ता होने से भारत को भुगतान संतुलन (BoP) के संकट से निपटने में मदद मिलेगी, रुपया मजबूत होगा और घरेलू बाजार में महंगाई का दबाव कम होगा।
आरबीआई की नई नीति से बैंकिंग स्टॉक्स चमके, जानिए निफ्टी का अगला टारगेट
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा बैंकों के विदेशी मुद्रा कर्ज के लिए रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधा (Forex Swap Facility) का ऐलान करने के बाद बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में भारी खरीदारी हुई। नोमुरा (Nomura) के विश्लेषकों के मुताबिक, इससे बैंकों के पास रुपये की तरलता (Liquidity) बढ़ेगी और उनकी फंड लागत कम होगी। एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पालवीया के मुताबिक, जब तक निफ्टी 23,300-23,350 के ऊपर टिका है, बाजार का रुख पॉजिटिव रहेगा। अगर निफ्टी 23,500 के पार निकलता है, तो यह तेजी से 23,700 और उससे ऊपर के स्तरों को छू सकता है। हालांकि, निवेशकों को भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर नजर रखनी चाहिए।
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