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Indian Rupee Vs US Dollar: डॉलर के मुकाबले 40 पैसा मजबूत हुआ रुपया, जानें क्‍यों

Dollar vs Rupees: भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 40 पैसे से ज्‍यादा मजबूत हुआ है. क्‍या इसके पीछे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की कोश‍िशें हैं? आइये आपको बताते हैं क‍ि रुपया अचानक कैसे मजबूत हो रहा है. क्‍या यह आगे और मजबूत हो सकता है?

डॉलर के मुकाबले रुपया 40 पैसा मजबूत हुआ

सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के बीच भारतीय रुपये के लिए आज 2 फरवरी 2026 को अच्छी खबर आई है. विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 40 पैसे मजबूत होकर एक बेहतर स्थिति में बंद हुआ है. शेयर बाजार में मची 'हाय-तौबा' के बावजूद रुपये की इस मजबूती के पीछे 3 मुख्य कारण हैं. आइये आपको बताते हैं.

अचानक कैसे मजबूत होने लगा रुपया

RBI की कोश‍िशें रंग लाईं
जब रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर (92 के करीब) पर पहुंच गया था, तब RBI ने हस्तक्षेप करते हुए भारी मात्रा में डॉलर बेचे. इससे बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ गई और रुपये की गिरती कीमत को सहारा मिला. रिपोर्ट्स के मुताबिक, RBI ने जनवरी के अंत तक लगभग 43.2 बिलियन डॉलर की बिक्री की है ताकि रुपये में एकतरफा गिरावट को रोका जा सके.

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पिछले कुछ दिनों से रुपया 92 प्रति डॉलर के स्तर को छू रहा था. जानकारों का कहना है कि RBI ने बहुत मजबूती से इस स्तर का बचाव किया है. केंद्रीय बैंक की कोशिश रही है कि रुपया इस मनोवैज्ञानिक स्तर के पार न जाए, क्योंकि इससे बाजार में घबराहट (Panic) फैल सकती थी.

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RBI केवल सीधे डॉलर नहीं बेच रहा है, बल्कि वह डॉलर-रुपया बाय-सेल स्वैप (Buy-Sell Swaps) का भी इस्तेमाल कर रहा है. 4 फरवरी को भी एक 10 बिलियन डॉलर का स्वैप प्लान किया गया है. इन तकनीकों के जरिए RBI बाजार में नकदी (Liquidity) को संतुलित करता है, जिससे रुपये को स्थिरता मिलती है.

डॉलर इंडेक्स में नरमी (Global Weakness in Dollar)
पिछले कुछ दिनों से डॉलर लगातार मजबूत हो रहा था, लेकिन आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर इंडेक्स में थोड़ी थकावट और नरमी देखी गई. जब वैश्विक स्तर पर डॉलर थोड़ा सस्ता होता है, तो भारतीय रुपया जैसी उभरती हुई मुद्राएं (Currencies) सांस लेती हैं और मजबूत होती हैं.

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विदेशी निवेशकों का भरोसा (FII Inflow)
बजट 2026 में सरकार ने कैपेक्स (Capex) के लिए जो 12.2 लाख करोड़ रुपये का भारी आवंटन किया है, उससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को संकेत मिला है कि भारत में ग्रोथ की संभावनाएं बरकरार हैं. इस भरोसे के चलते भारतीय बाजार में डॉलर का फ्लो बढ़ा है, जिससे रुपया मजबूत हुआ.

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट (Crude Oil Prices)
भारत अपनी तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आज कुछ कमी आई है. तेल सस्ता होने का मतलब है कि भारत को डॉलर में कम भुगतान करना पड़ेगा, जिससे रुपये की डिमांड बढ़ती है और वैल्यू में सुधार होता है.

आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है?
जब रुपया मजबूत होता है, तो इसके कई फायदे होते हैं:

  • सस्ता आयात: विदेश से आने वाली चीजें जैसे क‍ि मोबाइल कंपोनेंट्स, कच्चा तेल, खाद आद‍ि सस्ती हो सकती हैं.
  • विदेशी शिक्षा: अगर आप या आपका कोई परिचित विदेश में पढ़ाई कर रहा है, तो फीस और रहने का खर्च थोड़ा कम हो जाता है क्योंकि आपको डॉलर खरीदने के लिए कम रुपये देने पड़ते हैं.
  • महंगाई पर लगाम: तेल और गैस सस्ता होने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट घटती है, जिससे महंगाई को काबू करने में मदद मिलती है.

क्‍या आगे और मजबूत होगा रुपया :
बाजार के जानकारों का मानना है कि अगर रुपया 83.50 से 83.80 के स्तर के ऊपर टिका रहता है, तो आने वाले हफ्तों में यह और मजबूती दिखा सकता है.

भले ही वैश्विक कारणों जैसे अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ट्रंप की नीतियां से रुपये पर दबाव बना हुआ है, लेकिन RBI के पास $700 बिलियन से ज्यादा का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) है. इसी 'हथियार' के दम पर आज रुपये ने रिकवरी दिखाई है.


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