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औंधे मुंह गिरा रुपया! डॉलर के मुकाबले पहुंचा निचले स्तर पर, क्या है इसकी वजह

Dollar vs Rupee: रुपया डॉलर के मुकाबले निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिसमें कच्चे तेल की कीमत एक बड़ा कारण है।

Photo Credit: Google
Rupee Fall:  हाल ही में रुपये ने डॉलर के मुकाबले निचले स्तर पर जाकर एक नया रिकॉर्ड बना लिया है। नई रिपोर्ट में सामने आया है कि शुक्रवार को रुपया गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 83.9900 के निचले स्तर पर पहुंच गया है। यह अपने पिछले रिकॉर्ड  83.9850 को पार कर गया है, इसे 12 सितंबर को नोट किया गया था। बता दें कि शुरुआती कारोबार में रुपया थोड़ा बेहतर करता दिखा और दो पैसे की बढ़त के साथ 83.96 पर पहुंच गया, मगर ये रिकॉर्ड लंबे समय तक नहीं टिका। दिन के खत्म होने के साथ कई आर्थिक कारणों से रुपया फिर गिर गया। ट्रेडर्स ने बताया कि तेल की बढ़ती कीमतों, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और लगातार विदेशी पूंजी के आउटफ्लो के कारण रुपये में डॉलर के मुकाबले गिरावट आई है। यहां हम जानेंगे कि इसके पीछे क्या वजह है।

कारोबार की शुरुआत में दिखी बढ़त

जैसे कि हमने देखा कि शुरुआती ट्रेडिंग में ग्लोबल मार्केट के रुझानों के बीच रुपया थोड़ा बढ़कर 83.96 पर पहुंच गया। मगर भारतीय करेंसी में यह बढ़त लंबे समय तक नहीं टिकी और दिन के अंत तक रुपया  83.9900 के निचले स्तर पर पहुंच गया।  फॉरेन एक्सचेंज ट्रेडर की माने तो क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में फॉरेन कैपिटल के निरंतर प्रवाह ने रुपये को प्रभावित किया। इसके अलावा भारतीय शेयर बाजार में भी ठंडी शुरुआत ने लोकल करेंसी को भी प्रभावित किया है। [caption id="attachment_45315" align="aligncenter" ] Rupee vs Dollar[/caption] यह भी पढ़ें - नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा पहला IAF विमान, वॉटर कैनन से सलामी देकर किया स्वागत

क्यों गिरा रुपया ?

वहीं इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट दिन की शुरुआत में रुपया 83.97 प्रति डॉलर पर रहा, लेकिन जल्द ही 83.96 पर पहुंच गया। यह गुरुवार के 83.98 के रिकॉर्ड के मुकाबले बेहतर रहा। डॉलर इंडेक्स 0.11% की गिरावट के साथ 102.87 पर रहा, यह छह प्रमुख ग्लोबल करेंसी के मुकाबले अमेरिकी डॉलर के प्रदर्शन को ट्रैक करता है। तेल की कीमतों के लिए अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 77.71 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो 1.48% की वृद्धि को दर्शाता है। तेल की बढ़ती कीमतों, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और लगातार विदेशी पूंजी के आउटफ्लो के कारण रुपये के निरंतर गिरावट आई है, जिससे यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है।


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