Retail Inflation: सितंबर 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54% हो गई. खाद्य पदार्थों, खासकर सब्जियों की कीमतों में तेजी और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती महंगाई ने आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ाया है. सोमवार, 12 अक्तूबर 2026 को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति 4.83% थी. इस तरह महंगाई दर में लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई. नई सीपीआई सीरीज के तहत सितंबर की दर 2026 में अब तक का सबसे ऊंचा स्तर बताया गया है. ये भारतीय रिजर्व बैंक के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य से लगातार चौथे महीने ऊपर बनी हुई है. सितंबर का आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के 5.40% के अनुमान से भी ज्यादा रहा.
सब्जियों की कीमतों ने बढ़ाई महंगाई
खुदरा महंगाई में इजाफे की बड़ी वजह खाने की चीजों, खासकर सब्जियों के दाम में उछाल है. इसके अलावा कमजोर मानसून, कम बारिश, अल नीनो की आशंकाओं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भी महंगाई का दबाव बढ़ा है. रुपये की कमजोरी से आयात होने वाली चीजों की लागत बढ़ने का जोखिम भी बना हुआ है.
ग्रामीण और शहरी महंगाई के आंकड़े
सितंबर में ग्रामीण क्षेत्रों की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 6.08% हो गई, जबकि अगस्त में ये 5.24% थी. वहीं, शहरी क्षेत्रों में महंगाई 4.31% से बढ़कर 4.88% दर्ज की गई. आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण परिवारों पर कीमतों में बढ़ोतरी का असर थोड़ा ज्यादा पड़ा है.
RBI ने रेपो रेट में की बढ़ोतरी
बढ़ते महंगाई जोखिमों के बीच दिए गए डिटेल के मुताबिक RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया. इससे पहले 2025 में केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दरों में कुल 1.25 फीसदी की कटौती की थी. RBI ने ये भी चिंता जताई कि महंगाई का दबाव उपभोक्ता वस्तुओं की व्यापक श्रेणियों तक फैल रहा है. इससे कंपनियों की कीमतें तय करने की रणनीति और लोगों की महंगाई से जुड़ी अपेक्षाओं पर असर पड़ सकता है.
FY27 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ा
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए RBI ने खुदरा महंगाई का अनुमान 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है. दिए गए पूर्वानुमानों के मुताबिक-
- पहली तिमाही (Q1 FY28): 5.6%
- दूसरी तिमाही (Q2 FY27): 4.9%
- तीसरी तिमाही (Q3 FY27): 6.0%
- चौथी तिमाही (Q4 FY27): 5.7%
महंगाई कम होनी की उम्मीदें कितनी?
आरबीआई को उम्मीद है कि पर्याप्त अनाज के भंडार और सरकार के वक्त पर उठाए गए कदमों से प्रतिकूल मौसम के असर को सीमित करने में मदद मिल सकती है. सितंबर 2026 में महंगाई का 5.54% तक पहुंचना खाद्य कीमतों के दबाव को दिखाता है. आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा मानसून, फूड सप्लाई, कच्चे तेल की कीमतों और RBI की मौद्रिक नीति पर निर्भर करेगी.