निजी क्षेत्र के आरबीएल बैंक (RBL Bank) में वरिष्ठ प्रबंधन के स्तर पर एक और बड़ा फेरबदल होने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के दिग्गज अधिकारी भाविन लखपतवाला (Bhavin Lakhpatwala) जल्द ही आरबीएल बैंक के नए मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) के रूप में कार्यभार संभाल सकते हैं। वह अंतरिम सीएफओ दीपक रुइया का स्थान लेंगे, जो दिसंबर 2025 से इस पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

यूएई के एमिरेट्स एनबीडी (Emirates NBD) द्वारा आरबीएल बैंक में नियंत्रण हिस्सेदारी खरीदने की बड़ी डील को रिजर्व बैंक (RBI) की मंजूरी मिलने के बाद, यह इस बैंक में पहली सबसे हाई-प्रोफाइल नियुक्ति होने जा रही है।

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HDFC बैंक में सीएफओ की रेस में शामिल थे लखपतवाला

भाविन लखपतवाला का बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में एक बेहद शानदार और लंबा ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। लखपतवाला साल 2011 से एचडीएफसी बैंक के साथ जुड़े हुए थे और विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने कुछ ही दिनों पहले बैंक से इस्तीफा दिया है, जहां वह आखिरी बार सीनियर एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट के रूप में कार्यरत थे। मनी कंट्रोल की एक र‍िपोर्ट की मानेंतो एचडीएफसी बैंक के भीतर उन्हें वर्तमान सीएफओ के उत्तराधिकारी (सक्सेसर) के रूप में एक मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा था। एचडीएफसी बैंक से पहले वह दिग्गज ऑडिटिंग फर्म डेलॉयट (Deloitte) और एजेस फेडरल लाइफ इंश्योरेंस में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

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हालांकि, आरबीएल बैंक में उनकी नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा आने वाले हफ्तों में होने की उम्मीद है, जो पूरी तरह से बैंक के बोर्ड और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अंतिम मंजूरी पर निर्भर करेगी।

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दीपक रुइया की जगह लेंगे, पिछले 6 महीने से खाली था स्थायी पद

आरबीएल बैंक में सीएफओ का स्थायी पद पिछले 6 महीनों से खाली चल रहा था। आरबीएल के पूर्व सीएफओ भुवनेश ताराशंकर ने 15 दिसंबर, 2025 को बैंक से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद मार्च 2023 से बैंक के डिप्टी सीएफओ रहे दीपक रुइया को अंतरिम सीएफओ बनाया गया था। मुंबई मुख्यालय वाले इस बैंक में पिछले कुछ महीनों में कई बड़े बदलाव हुए हैं। डिजिटल बैंकिंग यूनिट के हेड पुष्पेंद्र शर्मा ने दिसंबर में इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद उस विभाग को व्यापक टेक्नोलॉजी विंग में विलय कर दिया गया।

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बैंक के इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव साल 2010 से जुड़े राजीव आहूजा की सेवानिवृत्ति रही, जिन्होंने रत्नाकर बैंक से आरबीएल बैंक के रूप में इसके कायाकल्प (ट्रांसफॉर्मेशन) में बेहद केंद्रीय भूमिका निभाई थी।

Emirates NBD की मेगा-डील के बाद विदेशी बैंक की सब्सिडियरी बना RBL

यह हाई-प्रोफाइल नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है जब आरबीएल बैंक का मालिकाना हक पूरी तरह बदल चुका है। मई 2026 में, आरबीआई (RBI) ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रमुख बैंक एमिरेट्स एनबीडी को आरबीएल बैंक में 60 प्रतिशत की नियंत्रण हिस्सेदारी खरीदने की अंतिम मंजूरी दे दी थी। यह सौदा 26,850 करोड़ रुपये ($3 बिलियन) में हुआ था।

इस सौदे के पूरा होने के बाद आरबीएल बैंक को अब भारत में एक विदेशी बैंक की सहायक कंपनी (Foreign Bank Subsidiary) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ट्रांजैक्शन के तहत एमिरेट्स एनबीडी द्वारा अतिरिक्त 26 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए एक ओपन ऑफर भी लाया गया है।