RBI New Rules: अक्सर बैंक कर्मचारी अपना टारगेट पूरा करने के लिए ग्राहकों को ऐसी चीजें बेच देते हैं जिनकी उन्हें जरूरत नहीं होती. जैसे एफडी (FD) कराने गए ग्राहक को जबरदस्ती इंश्योरेंस पॉलिसी थमा देना. क्रेडिट कार्ड के फायदों के बारे में झूठ बोलना या छुपे हुए चार्ज (Hidden Charges) न बताना. किसी इन्वेस्टमेंट प्लान में गारंटीड रिटर्न का लालच देना जो असल में जोखिम भरा हो.
आरबीआई (RBI) ने इसे लेकर एक नया ड्राफ्ट जारी किया है. इस नए ड्राफ्ट का सीधा मतलब ये है कि अब बैंक आपको कोई भी स्कीम या पॉलिसी गलत तरीके से या झूठ बोलकर नहीं बेच पाएंगे. अगर वे ऐसा करते हैं, तो उन्हें भारी कीमत चुकानी होगी.
अब बैंक को क्या करना होगा?
अभी तक अगर बैंक कुछ गलत बेचता था, तो ग्राहक को शिकायत के लिए दर-दर भटकना पड़ता था. लेकिन 1 जुलाई 2026 से नियम यह है कि अगर यह साबित हो गया कि प्रॉडक्ट गलत तरीके से बेचा गया है, तो बैंक को ग्राहक का पूरा पैसा वापस (Full Refund) करना होगा. इसमें बैंक कोई कैंसिलेशन चार्ज या प्रोसेसिंग फीस नहीं काट सकेगा.
नुकसान की भरपाई
सिर्फ पैसा वापस करना काफी नहीं होगा. अगर उस गलत प्रॉडक्ट की वजह से ग्राहक को कोई आर्थिक नुकसान हुआ है जैसे किसी दूसरी जगह निवेश न कर पाने का नुकसान या ब्याज का नुकसान, तो बैंक को उसकी भरपाई (Compensate) भी करनी होगी.
बैंकों की जिम्मेदारी बढ़ी
इस नए नियम (Responsible Business Conduct) के तहत अब बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे ग्राहक की जरूरत और उसकी आर्थिक स्थिति को समझकर ही कोई प्रॉडक्ट बेचें. प्रॉडक्ट के जोखिम (Risks) के बारे में साफ-साफ बताएं. अगर बैंक का कोई एजेंट या थर्ड-पार्टी भी गलती करती है, तो जिम्मेदारी बैंक की ही होगी.
कब से लागू होगा?
यह नियम 1 जुलाई 2026 से लागू करने का प्रस्ताव है. आरबीआई ने अभी इसका ड्राफ्ट जारी किया है ताकि बैंकों और जनता से राय ली जा सके. यह नियम आने के बाद बैंकों की मनमानी खत्म होगी और टारगेट के चक्कर में ग्राहकों को ठगने का खेल बंद होगा. अब बैंक कर्मचारी आपको सर, ये स्कीम ले लो, बहुत फायदा होगा… कहने से पहले सौ बार सोचेंगे.