भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सबसे महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक आज से शुरू हो गई है। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार, 5 जून को इस बैठक में लिए गए नीतिगत फैसलों का आधिकारिक ऐलान करेंगे।
इस बार की यह बैठक बेहद संवेदनशील समय पर हो रही है, जब पश्चिम एशिया में लंबे समय से तनाव जारी है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, वैश्विक सप्लाई-चेन पूरी तरह बाधित है और डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने सबसे निचले स्तरों पर पहुंच चुका है। इन सभी विपरीत परिस्थितियों के बीच बाजार के दिग्गजों की नजर इस बात पर है कि आरबीआई लोन की ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है।
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ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद नहीं, लेकिन सख्त रहेगा आरबीआई का रुख
मनीकंट्रोल द्वारा 16 अर्थशास्त्रियों और ट्रेजरी प्रमुखों के बीच किए गए एक पोल के अनुसार, इस बात की पूरी संभावना है कि आरबीआई इस बार भी मुख्य ब्याज दरों यानी रेपो रेट (Repo Rate) में कोई बदलाव नहीं करेगा और इसे 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखेगा। लोन लेने वाले ग्राहकों और फिक्स डिपॉजिट (FD) के निवेशकों के लिए फिलहाल यथास्थिति (Status Quo) बनी रहने की उम्मीद है।
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हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि बढ़ती महंगाई के जोखिम और रुपये की कमजोरी को देखते हुए नीति समिति अपना रुख तटस्थ (Neutral) रख सकती है, लेकिन आरबीआई का नीतिगत बयान काफी सख्त या हॉकिश (Hawkish Tone) हो सकता है।
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महंगाई और विकास दर (GDP) के अनुमानों में हो सकता है संशोधन
बाजार के जानकारों के मुताबिक, इस बैठक में देश की आर्थिक सेहत से जुड़े दो बड़े आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल सकता है:
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महंगाई का अनुमान बढ़ेगा: कोटक महिंद्रा एएमसी के फिक्स्ड इनकम हेड अभिषेक बिसेन और बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के अनुसार, भले ही मौजूदा खुदरा महंगाई (CPI) 3.48% के आसपास बनी हुई है, लेकिन थोक महंगाई (WPI) और ईंधन की बढ़ती लागत चिंता का विषय है। आरबीआई वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने महंगाई के अनुमान को बढ़ाकर 5 प्रतिशत के आसपास कर सकता है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के आर्थिक अनुसंधान विभाग ने भी इस वित्त वर्ष के लिए महंगाई अनुमान को संशोधित कर 5 से 5.1 प्रतिशत कर दिया है।
जीडीपी ग्रोथ अनुमान में कटौती संभव: वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते देश की विकास दर की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। मदन सबनवीस के मुताबिक, आरबीआई जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6.9% से घटाकर करीब 6.5% से 6.6% के दायरे में ला सकता है।
10 साल के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा रुपया, फोकस में रहेगा एक्सचेंज रेट
इस बार की क्रेडिट पॉलिसी में भारतीय रुपये की स्थिति पर सबसे गंभीर चर्चा होने की उम्मीद है। साल 2026 में अब तक भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 6 प्रतिशत से अधिक टूट चुका है, जो पिछले एक दशक (10 साल) में रुपये का सबसे खराब प्रदर्शन है।
विदेशी मुद्रा बाजार में मची इस उथल-पुथल को नियंत्रित करने के लिए गवर्नर संजय मल्होत्रा की ओर से कुछ ठोस स्पष्टीकरण और करेंसी वोलेटिलिटी को थामने के लिए विदेशी मुद्रा उपकरणों (Forex Tools) के इस्तेमाल के संकेत मिल सकते हैं। निवेशक और शेयर बाजार के कारोबारी शुक्रवार को आने वाली इस कमेंट्री का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि भविष्य की मौद्रिक नीतियों की दिशा को समझा जा सके।