नई दिल्ली : अगर आप भी अपनी गाड़ी में पेट्रोल-डीजल भरवाते हैं, तो सोशल मीडिया पर एथेनॉल (Ethanol) को लेकर चल रही बहस आपने जरूर सुनी होगी. कोई कह रहा है कि इससे गाड़ी का इंजन खराब हो रहा है, तो कोई इसे सरकार का अच्छा कदम बता रहा है. इस पूरे विवाद पर अब खुद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने खुलकर बात की है.
एक हालिया मीडिया इंटरव्यू में नितिन गडकरी ने एथेनॉल मिक्स ईंधन को लेकर चल रही अफवाहों को तो खारिज किया ही, साथ ही यह भी बता दिया कि भविष्य में बिना मिलावट वाले यानी 100% प्योर पेट्रोल की कीमत कितनी हो सकती है.
168 रुपये प्रति लीटर होगा प्योर पेट्रोल?
नितिन गडकरी ने इंटरव्यू में एक बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि भविष्य में अगर ग्राहकों को बाजार में बिना मिलावट वाले 100% प्योर पेट्रोल का विकल्प दिया जाता है, तो इसकी कीमत लगभग 168 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है. इसके मुकाबले एथेनॉल मिक्स पेट्रोल काफी सस्ता पड़ेगा. उन्होंने बताया कि सरकार चीनी मिलों और किसानों से एथेनॉल को लगभग 54 रुपये से 66 रुपये प्रति लीटर की दर पर खरीदती है. ऐसे में एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल आम जनता की जेब पर भारी नहीं पड़ेगा.
क्या एथेनॉल से खराब हो रहे हैं गाड़ियों के इंजन?
सोशल मीडिया पर चल रहे दावों पर कि E20 (20% एथेनॉल मिक्स) पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं, गडकरी ने सख्त रुख अपनाया. उन्होंने साफ कहा कि सरकार या ऑटोमोबाइल कंपनियों के पास ऐसा कोई ठोस डेटा नहीं है जो इस बात को साबित करे. भारत में E20 पेट्रोल लागू करने से पहले कई सालों तक तकनीकी संस्थानों और रिसर्च एजेंसियों ने इसकी गहन जांच की है. यह पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर ही मार्केट में उतारा गया है.
ऑटो कंपनियां और किसान दोनों तैयार
गडकरी ने बताया कि देश की बड़ी-बड़ी ऑटो कंपनियां जैसे Toyota, Maruti Suzuki, Tata Motors, Mahindra और Hyundai फ्लेक्स-फ्यूल इंजन (Flex-Fuel Engine) तैयार कर चुकी हैं. ये गाड़ियां 100% एथेनॉल या 100% पेट्रोल दोनों पर आसानी से चल सकती हैं. टू-व्हीलर सेगमेंट में भी बजाज, टीवीएस, हीरो और होंडा ने अपनी तकनीक तैयार कर ली है.
किसानों को मिला बंपर फायदा:
इस नीति से सबसे ज्यादा फायदा किसानों को हुआ है. मक्के की कीमत 1200 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर अब 2600 से 2800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है. बिहार और उत्तर प्रदेश के किसानों को इससे लगभग 45000 करोड़ रुपये का सीधा लाभ मिला है.
क्यों जरूरी है एथेनॉल?
नितिन गडकरी का कहना है कि उनका मकसद किसी खास ईंधन का प्रचार करना नहीं है. वह चाहते हैं कि भारत पेट्रोलियम आयात (क्रूड ऑयल इंपोर्ट) पर अपनी निर्भरता कम करे. हर साल विदेशों से तेल मंगाने में लाखों करोड़ रुपये खर्च होते हैं. अगर देश में ही बायोफ्यूल बनेगा, तो देश का पैसा देश में रहेगा, प्रदूषण कम होगा और भारत साल 2070 तक कार्बन न्यूट्रल बनने के अपने लक्ष्य को हासिल कर सकेगा.
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